इथियोपिया की संसद में मोदी ने क्यों कहा “हमारे वीर राजाओं को ‘हिंदू राजन’ मानता है इथियोपिया! 500 साल पुरानी है यह कहानी”
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इथियोपिया की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए अपनी बात की शुरुआत एक ऐसे ऐतिहासिक और भावनात्मक वाक्य से की, जिसने वहाँ के सांसदों सहित दुनियाभर के इतिहासप्रेमियों का ध्यान खींच लिया — “आपके वीर राजाओं को इथियोपिया ‘हिंदू-राजन’ क्यों कहता है — क्योंकि हमारी मित्रता का इतिहास 500 साल से भी अधिक पुराना है।”
यह ऐतिहासिक संबोधन केवल कूटनीति नहीं था बल्कि दो सभ्यताओं के प्राचीन, सांस्कृतिक और सामाजिक संपर्क का प्रतीक बन गया — जिसमें मोदी ने भारत और इथियोपिया के ऐतिहासिक रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित किया।
इतिहास की परतों में — भारत और इथियोपिया का जुड़ाव
भारत और इथियोपिया के बीच संबंध आज किसी नई चीज़ का नाम नहीं हैं — यह हजारों सालों का साझा इतिहास है.
प्राचीन आक्सुम साम्राज्य से लेकर मध्ययुगीन व्यापारिक मार्ग तक, दोनों देशों के बीच सिल्क, मसाले, सोना-हाथी दांत जैसे माल का आदान-प्रदान हुआ करता था।
एडुलिस पोर्ट के माध्यम से भारतीय व्यापारी इथियोपिया आते-जाते थे, जिससे सांस्कृतिक और सामुदायिक संपर्क गहरा हुआ।
16वीं सदी में, गोवा से आए भारतीय समुद्री यात्री और धर्मांतरित समुदाय भी वहाँ बसे, जिनका योगदान स्थानीय सभ्यता में दिखता है।
इतिहासकारों के मुताबिक इस संबंध की शुरुआत लगभग 2,000 वर्ष पहले से मानी जाती है और यह व्यापार, संस्कृति और मानवीय संपर्कों से आज तक जुड़ी है।
क्यों “हिंदू राजन”?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में उस गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आपसी सम्मान का उल्लेख किया, जिसे इथियोपिया ने सदियों से भारत की सभ्यता और वीर-राजाओं के प्रति रखा है।
यह वाक्य सिर्फ गर्व नहीं बल्कि इतिहास के उन पन्नों को उजागर करता है जहां भारत-इथियोपिया के बीच मानव, विचार, पर्यटन और धार्मिक आदान-प्रदान की रूपरेखा बनी थी।
इतिहास के कुछ दस्तावेज़ों में प्राचीन काल में “राजा-राजाओं के प्रति आदर” और राजनीतिक-सांस्कृतिक सम्मान की बात मिलती है, खासकर क्रिश्चियन और हिंदू समुदायों के धार्मिक और सामाजिक आदान-प्रदान से जुड़ी कथाओं में — जो मध्य काल के बाद भी स्थायी रूप से स्थानीय लोककथाओं में जीवित रहे।
साझा संस्कृति और सद्भावना का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि भारत-इथियोपिया के बीच सिर्फ कूटनीतिक संबंध नहीं, बल्कि साझा विश्वास, आदान-प्रदान और कभी-कभी एक-दूसरे के राष्ट्रगान में भी भावनात्मक समानताएँ पाई जाती हैं, जिससे दोनों देशों के लोग एक-दूसरे को “भी घर जैसा” महसूस करते हैं।
यह बयान न केवल ऐतिहासिक साझेदारी की याद दिलाता है, बल्कि आज के वैश्विक संदर्भ में दक्षिण-दक्षिण सहयोग, साझा विकास, आर्थिक साझेदारी और मानवीय मंचों पर एकजुटता की दिशा में भी एक वैश्विक संदेश के रूप में सामने आया है।
दूर तक दिखता असर
मोदी के इस संबोधन से स्पष्ट हुआ है कि —
भारत और अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक रिश्ता सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है।
दोनों देशों ने सदियों से मानवीय आदान-प्रदान, समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक संपर्कों के आधार पर रिश्ते बनाए हैं।
आज यह संबोधन वैश्विक south-south सहयोग और विश्व विकास में समान भूमिका का एक मजबूत संकेत भी बन गया है।
मोदी की इस ऐतिहासिक बात का सार यह है कि इंसानी रिश्तों, व्यापारिक आदान-प्रदान और सभ्यता के आदर से भरा इतिहास आज के सामरिक, आर्थिक और सामाजिक साझेदारियों को और भी गहरा बना रहा है।