KGMU डॉक्टर रमीज मलिक पर धर्मांतरण–यौन शोषण आरोप: पैतृक पीलीभीत आवास पर कुर्की नोटिस, गिरोह की तलाश जारी, संगठित नेटवर्क की पोल खुली
पीलीभीत / लखनऊ। केन्यल जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ के एक रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज मलिक पर धर्मांतरण, यौन शोषण, फर्जी निकाह और ब्लैकमेल जैसे गंभीर आरोपों ने नया मोड़ ले लिया है। फरार इस डॉ. रमीज के खिलाफ लखनऊ और पीलीभीत पुलिस की संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी है और बुधवार शाम पुलिस टीम ने उसके पीलीभीत स्थित पैतृक आवास पर कुर्की का नोटिस चस्पा कर दिया है। पुलिस न सिर्फ डॉक्टर को गिरफ्तार करने के प्रयास में है, बल्कि उसके पूरा गिरोह, फर्जी निकाह में शामिल काजी और गवाहों की तलाश भी तेज कर रही है। मामले ने समाज में हलचल मचा दी है और प्रशासन इस घटना को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है
धर्मांतरण, फर्जी निकाह और यौन शोषण: आरोपों की गंभीरता
पुलिस जांच के मुताबिक आरोपी डॉ. रमीज मलिक पर यह आरोप हैं कि उसने एक महिला डॉक्टर को शादी का झांसा देकर रिश्ता बनाया, बाद में उसे धर्मांतरण के लिए दबाव डालता रहा, और अंत में फर्जी निकाह का कागजी खेल कर उसे फंसा रखा था। पीड़िता का आरोप है कि रमीज ने शादी का झूठा वादा करके उसके साथ लंबे समय तक यौन शोषण किया, धर्म बदलने का दबाव बनाया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि डॉ. रमीज और पीड़िता कभी भी पीलीभीत नहीं आए थे, लेकिन उन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार कर निकाह का खेल रचा था।
काजी–गवाह का भी पर्दाफाश: फर्जी निकाह का खेल
जांच में यह खुलासा हुआ है कि फर्जी निकाह को पूरा करने में पीलीभीत के फीलखाना मोहल्ले के काजी जाहिद हसन राना और एक युवक शारिक नामक गवाह ने मदद की थी। पुलिस ने न सिर्फ उनके खिलाफ जांच तेज की है, बल्कि काजी और गवाहों को भी पकड़ने के लिए छापेमारी की है और उनसे जुड़े दस्तावेज जमा किए हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों की मिली जानकारी से यह पता चल रहा है कि यह फर्जी निकाह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक बड़ा नेटवर्क था।
कुर्की नोटिस चस्पा, पुलिस की दबिशें जारी
बुधवार शाम लखनऊ पुलिस ने पीलीभीत से न्यूरिया पुलिस के सहयोग से डॉ. रमीज के पैतृक आवास पर धारा 82 के तहत कुर्की का नोटिस चस्पा किया। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि पुलिस अब डॉक्टर की संपत्ति को भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में ले रही है और गिरफ्तारी के बाद विशेषज्ञों को बड़े मामले में सजा दिलाने के प्रयास करेगी। पुलिस ने न्यूरिया कस्बे के अलावा अन्य स्थानों पर छापेमारी की है और कुछ संदिग्धों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया है।
फरार आरोपी डॉक्टर की तलाश, इनाम और NBW जारी
डॉ. रमीज मलिक अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है और उसके मोबाइल फोन भी बंद हैं। लखनऊ पुलिस ने उसके गिरफ्तारी के लिए तीन टीमों का गठन किया है और उसके आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट (NBW) जारी किया गया है। इसके अलावा पुलिस ने वह व्यक्ति ढूंढने में मदद करने वाले किसी भी जानकारी पर ₹50,000 तक का इनाम घोषित किया है। पुलिस की कार्रवाई सीएम कार्यालय और महिला आयोग के निर्देशों के बाद और भी तेज हो गई है।
दोनों ओर की शिकायत: आत्महत्या का प्रयास और FIR
इस प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब पीड़िता, जो KGMU की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर है, ने शिकायत की कि रमीज द्वारा किए गए दबाव और प्रताड़ना के कारण वह इतने मानसिक तनाव में आ गई कि उसने आत्महत्या का प्रयास तक किया। FIR में उसके द्वारा यह भी बताया गया कि आरोपी ने न केवल यौन शोषण किया बल्कि गर्भपात के लिए मजबूर भी किया और अपने निजी वीडियो/फोटो वायरल करने की धमकी दी। कानून के तहत पुलिस ने धर्मांतरण नकली निकाह, धोखाधड़ी, ब्लैकमेल और यौन शोषण जैसे कई गंभीर आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है।
गिरोह और नेटवर्क की खोज, पुलिस खुफिया जाँच तेज
जांच ने जिस तथ्य को उजागर किया है वह यह है कि यह केवल एक व्यक्ति का असामान्य मामला नहीं है, बल्कि एक संभावित धर्मांतरण गिरोह और संगठन से जुड़ा हुआ है। पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि डॉ. रमीज का संबंध कथित धर्मांतरण गिरोह के सरगना ‘छांगुर’ से था और उसे धर्मांतरण के बदले 15 लाख रुपये तक की रकम भी दी गई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसरों के भी संदिग्ध सहयोग की जांच की जा रही है। इससे यह मामला सामाजिक और संगठित स्तर पर फैलने की आशंका पैदा करता है।
परिवार की गिरफ्तारी और आरोपियों का रियल कनेक्शन
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि डॉ. रमीज के माता–पिता ने अपने बेटे की गतिविधियों में भूमिका निभाई और पुलिस ने उन्हें लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में गिरफ्तार किया है। कथित रूप से परिवार ने दो महिलाओं के साथ जुड़े मामले में सहायक भूमिका निभाई और इनकी पूछताछ के दौरान कई गंभीर बयान दर्ज किए गए हैं। इससे यह मामला और भी जटिल और गंभीर हो गया है।
प्रशासन–महिला आयोग की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने मामले पर संज्ञान लिया है और कमिशन की उपाध्यक्ष ने कहा कि यह केवल एक व्यक्तिगत अपराध नहीं है बल्कि एक गंभीर प्रणालीगत समस्या के रूप में देखा जाना चाहिए। आयोग ने पुलिस और प्रशासन से आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की है। इस प्रकरण ने मेडिकल शिक्षा जगत के इर्द–गिर्द भी व्यापक बहसें शुरू कर दी हैं।
KGMU डॉक्टर रमीज मलिक का मामला न सिर्फ कानूनी तौर पर गंभीर है बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी चिंताजनक है। धर्मांतरण, यौन शोषण, फ़र्जी निकाह और ब्लैकमेल जैसे आरोपों ने पूरे समाज को हिला दिया है। पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन यह अब पुलिस तलाश, गिरोह के नेटवर्क, संगठित अपराध के पहलू और आरोपी की गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं है — यह पूरा प्रकरण न्याय, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी की परीक्षा भी है।