3

Recent News

CJP Protest में 101 हत्या के आरोपी समेत 2873 अपराधी हुए शामिल; दिल्ली पुलिस ने किया दावा - 'FRS से हुई पहचान'..

CJP Protest: दिल्ली में 20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो मार्च’ को लेकर दिल्ली पुलिस…

Commonwealth Games: घर बेचकर की ट्रेनिंग, भारत के लिए जीता गोल्ड; शर्मिला धनखड़ ने रच दिया इतिहास..

Commonwealth Games: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के पैरा शॉट…

Rakshabandhan 2026 कब है? जानें सही तारीख, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, भद्रा का समय और पूजा विधि..

Rakshabandhan 2026: रक्षाबंधन हिंदू धर्म का एक प्रमुख और बेहद पवित्र त्योहार है। यह भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और…

UP Shocking Case: जिसका कर दिया अंतिम संस्कार, वह जिंदा लौटा.. शांति पाठ के दिन सामने खड़ा मुर्दा देख लोग हैरान!

UP Shocking Case: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस से लेकर पूरे…

Pilibhit News: डीएम ने एनसीओआरडी बैठक में नशे के सौदागरों पर सख्त कार्रवाई, बॉर्डर निगरानी और स्कूलों में जागरूकता अभियान के निर्देश दिए।

Pilibhit News: नशे के कारोबार पर कसेगा शिकंजा, डीएम ज्ञानेन्द्र सिंह ने अधिकारियों को दिया सख्त एक्शन प्लान एनसीओआरडी (NCORD)…

3

Recent News

CJP Protest: दिल्ली में 20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो मार्च’ को लेकर दिल्ली पुलिस…

Commonwealth Games: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के पैरा शॉट…

Rakshabandhan 2026: रक्षाबंधन हिंदू धर्म का एक प्रमुख और बेहद पवित्र त्योहार है। यह भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और…

UP Shocking Case: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस से लेकर पूरे…

Pilibhit News: नशे के कारोबार पर कसेगा शिकंजा, डीएम ज्ञानेन्द्र सिंह ने अधिकारियों को दिया सख्त एक्शन प्लान एनसीओआरडी (NCORD)…

Breaking News

Chhath Puja 2023: जानिए क्यों मनाई जाती है छठ पूजा, पुराणों में ही है बहुत बड़ा पूजा का महत्व

छठ पूजा 2023: शुरू हुई छठ पूजा, षष्ठी मैया की पूजा से मिलता है पुत्र रत्न का वरदान, पढ़िए आगे का महत्व

रामायण में है बड़ी मान्यता

Chhath Puja 2023: हमारे देश में सूर्योपासना के लिए प्रसिद्ध पर्व है छठ। मुख्य रूप से इसे सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है। यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है। पारिवारिक सुख-समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है।

स्त्री और पुरुष दोनों की है छठ मैया

इस पर्व को स्त्री और पुरुष समान रूप से मनाते हैं। छठ पूजा की परंपरा और उसके महत्व का प्रतिपादन करने वाली अनेक पौराणिक और लोक कथाएं प्रचलित हैं।

एक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की। सप्तमी को सूर्योदय के समय फिर से अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था।

महाभारत में भी थी मान्यता

एक दूसरी मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देव का पूजन प्रारंभ किया। कर्ण भगवान सूर्य का परम भक्त थे। वह प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने थे। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है।

छठ पर्व के बारे में एक कथा और भी है

कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। तब उसकी मनोकामनाएं पूरी हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया। लोक परंपरा के अनुसार सूर्य देव और छठी मईया का संबंध भाई-बहन का है। लोक मातृका षष्ठी की पहली पूजा सूर्य ने ही की थी।

पढ़िए कथा पुराण

पुराण में इस बारे में एक और कथा प्रचलित है। एक अन्य कथा के अनुसार राजा प्रियवद को कोई संतान नहीं थी, तब महर्षि कश्यप ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियवद की पत्नी मालिनी को यज्ञाहुति के लिए बनाई गई खीर दी। इसके प्रभाव से उन्हें पुत्र हुआ परंतु वह मृत पैदा हुआ। प्रियवद पुत्र को लेकर शमशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे।

षष्टी की पूजा से मिलता है पुत्र रत्न

उसी वक्त भगवान की मानस कन्या देवसेना प्रकट हुई और कहा कि ‘सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती हूं। राजन तुम मेरा पूजन करो तथा और लोगों को भी प्रेरित करो’। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी।

जय हो सूर्य देव की
जय हो छठी मैया की