अयोध्या नगरी: अयोध्या में बन रहे भव्य रामलला मंदिर का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने हाल ही में मंदिर निर्माण की प्रगति और इसकी भव्यता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। मंदिर परिसर में बनने वाले सभी मंदिरों के शिखर शुद्ध सोने से मढ़े जाएंगे। यह निर्णय मंदिर की दिव्यता और आध्यात्मिक आकर्षण को बढ़ाने के लिए लिया गया है।
अयोध्या नगरी: ये है सोने के दरबाजों को जड़ने के पीछे का प्रशासन का मकसद

अयोध्या नगरी: रामलला मंदिर के सभी दरबाजों को सोने से मढ़ने का कार्य मंदिर को वैश्विक पहचान दिलाने का एक बड़ा कदम है। मुख्य शिखर को 22 कैरेट शुद्ध सोने से सजाया जाएगा, जिसमें लगभग 160 किलोग्राम सोने का उपयोग होगा। मंदिर के 12 बड़े और छोटे शिखरों को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि वे सूर्य की पहली किरण से जगमगा उठें। सोने के शिखर भारतीय कला, संस्कृति और समृद्धि के प्रतीक होंगे। यह सोना भक्तों के दान से प्राप्त किया गया है, जो इस परियोजना में जनता की भागीदारी को दर्शाता है।
अयोध्या नगरी: फरवरी 2024 से रामलला दरबार का ऐसा होगा दृश्य
फरवरी 2024 एक ऐतिहासिक समय होगा, जब श्रद्धालु कुबेर टीले से रामलला का दर्शन कर सकेंगे। निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है ताकि भक्तों को गर्भगृह में विराजमान रामलला के दिव्य दर्शन का अवसर मिल सके। रामलला के भव्य दरबार में पहली बार भगवान राम अपने स्वर्णिम शिखरों के बीच विराजमान होकर भक्तों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेंगे।
रामलला दरबार के 50 दरवाजे होंगे भारतीय भव्य कला का प्रतीक
रामलला मंदिर के संपूर्ण ढांचे में कुल 50 दरवाजे लगाए जाएंगे। इनमें भूतल को छोड़कर सभी दरवाजे लकड़ी के होंगे, जिन पर भारतीय संस्कृति और रामायण से जुड़े प्रसंगों की intricate कारीगरी की जाएगी। इन दरवाजों को इस प्रकार उकेरा जाएगा कि वे भारतीय वास्तुकला और आध्यात्मिकता के प्रतीक बनें।
अयोध्या नगरी: वाल्मीकि रामायण के अंशों का प्रदर्शन बढ़ाएगा श्रद्धलुओं का ज्ञान
मंदिर परिसर में वाल्मीकि रामायण के प्रमुख अंशों को संस्कृत और हिंदी में अंकित किया जाएगा। यह शिलालेख विशेष पत्थरों पर उकेरे जाएंगे, जो भक्तों को रामायण के प्रसंगों और भगवान राम के आदर्शों से जोड़ेंगे। यह पहल श्रद्धालुओं को धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने के लिए की गई है।
इन तरीकों से होगा राम कथा का जीवंत प्रदर्शन
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को रामायण की गहराई से परिचित कराने के लिए आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कला का उपयोग किया जाएगा। रामायण के प्रसंगों को चित्रों, मूर्तियों और डिजिटल प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया जाएगा। यह व्यवस्था न केवल श्रद्धालुओं को भगवान राम के आदर्शों से जोड़ने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें एक अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव भी देगी।
ऐसी होगी अंगद टीला से मंदिर तक जाने बाले मार्ग की बनावट
अंगद टीला से रामलला मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर स्थायी कैनोपी लगाई जाएगी। यह छाया प्रदान करने वाला ढांचा श्रद्धालुओं को धूप, गर्मी और बारिश से बचाने में मदद करेगा। इस मार्ग को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।
ऐसा होगा रामलला दरबार की भव्यता और प्रबंधन
रामलला दरबार के गर्भगृह में भगवान राम की प्रतिमा को संगमरमर और सोने से सजाया जाएगा। गर्भगृह के शिखर और दीवारों को सोने और शुद्ध संगमरमर से अलंकृत किया जाएगा। भगवान राम की मूर्ति के पीछे सोने की नक्काशी की जाएगी, जो उनकी महिमा को और भी अद्वितीय बनाएगी।
भविष्य में श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए, मंदिर प्रबंधन उच्च स्तरीय व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रहा है। दर्शन के लिए कतारबद्ध प्रणाली, डिजिटल टिकटिंग, और लाइव प्रसारण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही, सोने के शिखरों और अन्य संरचनाओं की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
जानिए कैसी होगीं भविष्य की योजनाएं और श्रद्धालुओं का अनुभव
- प्रकाश व्यवस्था: सोने के दरबाजों की चमक बढ़ाने के लिए विशेष प्रकाश व्यवस्था की जाएगी।
- सुरक्षा प्रबंध: दरबाजों और गर्भगृह की सुरक्षा के लिए उच्चस्तरीय प्रबंधन लागू किया जाएगा।
- आध्यात्मिक अनुभव: मंदिर की भव्यता और सोने के दरबाजों की दिव्यता श्रद्धालुओं को एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगी।
रामलला मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल होगा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, वास्तुकला और आध्यात्मिकता का प्रतीक भी बनेगा। यह अयोध्या नगरी को विश्व के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में अग्रणी स्थान पर पहुंचाएगा। श्रद्धालु इस मंदिर की भव्यता और भगवान राम के दिव्य दर्शन का अनुभव कर अपने जीवन को धन्य महसूस करेंगे।