
संजीव गुप्ता को माफिया घोषित कर मुकदमा क्यों नहीं कर रहा प्रशासन
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में जब से बालू खदानों का पट्टा हुआ है और खनन कार्य शुरू हुआ है तभी से अवैध खनन की तस्वीरे सामने आ रही है और प्रशासन लगातार जुर्माने के साथ चेतावनी भी दे रहा है लेकिन संजीव गुप्ता जैसे बालू माफिया अवैध खनन करने से बाज नहीं आ रहे हैं आपको बता दे की बांदा की मरौली खंड संख्या पांच बालू खदान में अब तक तीन बार अवैध खनन और अवैध परिवहन पर जुर्माना लग चुका है और प्रशासन ने हर बार चेतावनी भी दी है वही बरियारी बालू खदान भी संजीव गुप्ता के नाम है जिसमें लगभग एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया था। इसके बावजूद हर छापेमारी में अवैध खनन पाया जाता है। आखिरकार प्रशासन अवैध खनन रोक नहीं पा रहा या फिर अवैध खनन करने की छूट दे रखी है और नाम मात्र का जुर्माना लगाया जा रहा है आखिरकार खनिज अधिकारी की ड्यूटी क्या है जब वह अवैध खनन रोक नहीं पा रहे है जब पट्टाधारक अवैध खनन करने से बाज नहीं आ रहे तो उन्हें माफिया घोषित कर खनन अधिनियम के तहत मुकदमा कर दंडित क्यों नहीं किया जा रहा जिले में लगभग एक दर्जन खदानें संचालित है और अब तक लगभग सभी खदानों में अवैध खनन पाया गया है जिसके चलते खनिज अधिकारी अर्जुन सिंह पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। आखिरकार सीएम योगी का चाबुक ऐसे अधिकारियों पर कब चलेगा यह देखने वाली बात होगी।