कोहरे की चादर में मौत का तांडव, मथुरा एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा, 8 बसें और 3 कारें टकराईं, 13 लोग जिंदा जले, 80 से अधिक घायल
एक झटके में उजड़ गईं ज़िंदगियाँ, सड़क पर बिखर गए लोगों के अंग
मथुरा से दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहाँ घने कोहरे ने एक बार फिर सड़क को श्मशान में बदल दिया। यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए भीषण सड़क हादसे में 8 यात्री बसों और 3 कारों की आपस में जबरदस्त टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भयानक थी कि कई वाहन आग की लपटों में घिर गए और कम से कम 13 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि 70 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे के बाद का मंजर इतना भयावह था कि मौके पर पहुंचे राहतकर्मियों और पुलिसकर्मियों की आंखें भी भर आईं। जले हुए शवों के टुकड़े सड़क पर बिखरे पड़े थे, जिन्हें प्रशासन ने 17 पॉलिथीन बैग में भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।
कैसे हुआ हादसा: कोहरा बना काल
प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के मुताबिक, हादसे के वक्त यमुना एक्सप्रेस-वे पर घना कोहरा छाया हुआ था, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई थी। बताया जा रहा है कि एक वाहन के अचानक ब्रेक लगाने के बाद पीछे से आ रही बसें और कारें एक-एक कर टकराती चली गईं।
कुछ ही पलों में यह टक्कर श्रृंखलाबद्ध दुर्घटना में बदल गई। कई बसें और कारें आपस में फंस गईं और टक्कर के बाद वाहनों में आग लग गई, जिससे अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
जिंदा जल गए यात्री, चीख-पुकार से कांप उठा एक्सप्रेस-वे
हादसे में सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि कई यात्री आग की लपटों में घिरकर जिंदा जल गए। आग इतनी तेज थी कि मौके पर मौजूद लोग चाहकर भी मदद नहीं कर सके।
चीख-पुकार, धुएं का गुबार और जलते वाहनों के बीच एक्सप्रेस-वे पर अफरा-तफरी मच गई। कुछ यात्री जान बचाने के लिए सड़क पर कूद पड़े, तो कई लोग घायल अवस्था में तड़पते रहे।
70 से अधिक घायल, अस्पतालों में मची अफरा-तफरी
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी की टीमें मौके पर पहुंचीं। घायलों को मथुरा और आसपास के जिलों के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
डॉक्टरों के मुताबिक, कई घायलों को गंभीर जलन, सिर और रीढ़ की चोटें आई हैं।
शवों के टुकड़े, 17 पॉलिथीन में समेटी गई इंसानियत
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों के शव पूरी तरह जल चुके थे और कई शवों के अंग अलग-अलग जगह बिखरे मिले। प्रशासन को इन्हें 17 पॉलिथीन बैग में भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजना पड़ा।
कई शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया है, जिसके लिए डीएनए जांच की जरूरत पड़ सकती है।
एक्सप्रेस-वे पर यातायात ठप, घंटों फंसे रहे वाहन
दुर्घटना के बाद यमुना एक्सप्रेस-वे पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। दमकल कर्मियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाया गया, तब जाकर यातायात धीरे-धीरे बहाल हो सका।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे की जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक तौर पर कोहरे और तेज रफ्तार को हादसे की वजह माना जा रहा है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
घटना के बाद एक्सप्रेस-वे पर कोहरे के दौरान वाहन गति सीमा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
यह खबर क्यों ज़रूरी है?
यह खबर सिर्फ एक हादसे की जानकारी नहीं है, बल्कि एक चेतावनी है—
कोहरे में तेज रफ्तार कितनी जानलेवा हो सकती है
एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा मानकों की कितनी सख्त जरूरत है
यात्रियों, ड्राइवरों और प्रशासन—तीनों की जिम्मेदारी कितनी अहम है
हर बार की तरह अगर इस हादसे को भी “दुर्घटना” कहकर भुला दिया गया, तो अगली सुबह कोई और एक्सप्रेस-वे, कोई और शहर, कोई और परिवार इसी दर्द से गुज़रेगा।
एक सवाल, जो हर किसी से है
जब कोहरा दिख रहा था, खतरा सामने था —
तो क्या सावधानी पर्याप्त थी?
और अगर नहीं, तो इसकी कीमत 13 जली हुई ज़िंदगियों ने क्यों चुकाई?