बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। एक युवा छात्र नेता की मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब उसी आंदोलन से जुड़े एक और बड़े चेहरे पर जानलेवा हमला हो गया। खूलना में छात्र नेता मोतालेब सिकदर को सिर में गोली मारी गई है। यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि बांग्लादेश की मौजूदा सत्ता, सुरक्षा व्यवस्था और पूरे चुनावी माहौल पर बड़ा सवाल खड़ा करता है — और यही वजह है कि भारत भी इस घटनाक्रम को लेकर गंभीर चिंता में है।
घर में घुसकर सिर में मारी गोली
बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिमी शहर खूलना में सोमवार दोपहर अज्ञात बंदूकधारियों ने नेशनल सिटिजंस पार्टी (NCP) के नेता मोहम्मद मोतालेब सिकदर को उनके घर में घुसकर गोली मार दी। हमलावरों ने सीधे उनके सिर को निशाना बनाया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।
कान के आर-पार निकली गोली, बाल-बाल बचे
स्थानीय लोगों ने तुरंत मोतालेब को खूलना मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक गोली एक कान से घुसी और दूसरे कान के पास से बाहर निकल गई। गनीमत रही कि गोली दिमाग तक नहीं पहुंची, जिससे उनकी जान बच गई। फिलहाल उनका इलाज जारी है।
हादी की हत्या के बाद दूसरा बड़ा हमला
यह हमला ऐसे वक्त हुआ है जब बांग्लादेश अभी तक युवा छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या से उबर नहीं पाया है। 12 दिसंबर को ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान हादी को सिर में गोली मारी गई थी। इलाज के लिए उन्हें सिंगापुर ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। हादी फरवरी में होने वाले आम चुनाव के उम्मीदवार भी थे।
छात्र आंदोलन से बनी सत्ता की पार्टी
मोतालेब सिकदर और हादी — दोनों उसी नेशनल सिटिजंस पार्टी से जुड़े हैं, जिसकी जड़ें अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन में हैं। इसी आंदोलन के विरोध और दबाव के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़कर देश से बाहर जाना पड़ा था। बाद में उन्हें भारत में शरण दी गई थी।
भारत को लेकर क्यों बढ़ी नाराज़गी
यहीं से भारत इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में आ जाता है। बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार और सत्ता पक्ष के समर्थकों के बीच यह नैरेटिव बनाया गया कि भारत ने उनके “राजनीतिक दुश्मन” शेख हसीना का साथ दिया। आसान शब्दों में कहें तो —
“जिस नेता को हटाया गया, भारत ने उसी को पनाह दी”
इसी सोच के कारण भारत को मौजूदा हालात का जिम्मेदार ठहराया जाने लगा।
भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी माहौल
हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश के कई इलाकों में भारत विरोधी नारे लगे। कट्टरपंथी संगठनों ने भारत सीमा तक मार्च निकाले और पूर्व प्रधानमंत्री को सौंपने की मांग की। कुछ जगहों पर हिंदू धार्मिक स्थलों के बाहर भी तनाव देखा गया। अब मोतालेब सिकदर पर हुए हमले के बाद आशंका जताई जा रही है कि फिर से एंटी-इंडिया और एंटी-हिंदू माहौल भड़काया जा सकता है।
भारत अलर्ट मोड में
इन हालातों को देखते हुए भारत भी सतर्क हो गया है। भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थिति की समीक्षा की है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि बांग्लादेश की अस्थिरता का सीधा असर भारत की सीमाई सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति पर पड़ सकता है।
सवाल जो अभी बाकी हैं
लगातार हो रहे हमलों ने बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था और चुनावी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सरकार इन हमलों को रोक पाएगी?
और क्या इन घटनाओं का इस्तेमाल भारत विरोधी माहौल बनाने के लिए किया जाएगा?
आने वाले दिन बांग्लादेश और भारत — दोनों के लिए बेहद अहम होने वाले हैं।