हिंदू जलाया जाता है तो विपक्ष चुप रहता है, लेकिन अब देश चुप नहीं बैठेगा” — सांसद रविकिशन का करारा प्रहार, बोले: हम बंगाल को बांग्लादेश नहीं बनने देंगे
गोरखपुर के वनटांगिया गांव की शांत ज़मीन शुक्रवार को उस वक्त राजनीतिक और वैचारिक उबाल की गवाह बनी, जब भारतीय जनता पार्टी के फायरब्रांड सांसद और अभिनेता रविकिशन शुक्ला ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और देश के भीतर विपक्ष की चुप्पी को लेकर ऐसा हमला बोला कि बयान सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया।
मंच जल संरक्षण का था, लेकिन शब्द राष्ट्र, धर्म और चेतावनी के थे।
प्रदेश का पहला ‘जल अर्पण गांव’ और मंच से उठा राष्ट्रवाद का स्वर
गोरखपुर के वनटांगिया गांव, जंगल तिनकोनिया नंबर तीन को उत्तर प्रदेश का पहला ‘जल अर्पण गांव’ घोषित किया गया। इस ऐतिहासिक पहल के तहत आयोजित कार्यक्रम में सांसद रविकिशन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने गांव के प्रधान और ग्रामीणों को जल कलश सौंपकर जल अर्पण कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत कराई।
कार्यक्रम का उद्देश्य जल संरक्षण था, लेकिन जैसे ही पत्रकारों से बातचीत शुरू हुई, माहौल पूरी तरह बदल गया।
“बांग्लादेश में दलित हिंदू को जलाया गया, विपक्ष कहां था?”
पत्रकारों से बात करते हुए सांसद रविकिशन ने बांग्लादेश की एक दिल दहला देने वाली घटना का जिक्र किया, जिसमें एक दलित हिंदू युवक को मारकर पेड़ से उल्टा लटकाया गया और फिर जिंदा जला दिया गया।
इस घटना को लेकर उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जब बांग्लादेश में इस तरह की बर्बरता होती है, तब कांग्रेस, विपक्ष के अन्य नेता और पवन खेड़ा जैसे लोग पूरी तरह खामोश हो जाते हैं।
उनका सवाल सीधा था — क्या हिंदू की जान की कोई कीमत नहीं है?
पवन खेड़ा और आरएसएस पर बयान को लेकर तीखा हमला
सांसद रविकिशन ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा आरएसएस को लेकर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यही सोच, यही बयानबाज़ी कांग्रेस को ले डूबी है और इसी कारण आज कांग्रेस की बिहार में यह हालत हो चुकी है।
उनके शब्दों में यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि उस मानसिकता का प्रतीक है, जो हिंदू समाज के दर्द पर आंखें मूंद लेती है।
“हम बंगाल को बांग्लादेश नहीं बनने देंगे” — सीधी राजनीतिक घोषणा
रविकिशन यहीं नहीं रुके। उन्होंने बेहद स्पष्ट और आक्रामक शब्दों में कहा कि
“हम बंगाल को बांग्लादेश नहीं बनने देंगे। अब बंगाल जीतेंगे, उसके बाद उत्तर प्रदेश जीतेंगे।”
यह बयान सिर्फ चुनावी दावा नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक संदेश था — कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का असर अब भारत की राजनीति और जनभावनाओं पर साफ दिखने लगा है।
“देश का युवा और मां-बहनें जाग गई हैं”
बांग्लादेश की घटनाओं का जिक्र करते हुए सांसद ने कहा कि अब सिर्फ नेता नहीं, बल्कि पूरा देश जाग चुका है।
उन्होंने कहा कि बंगाल ही नहीं, पूरे देश का युवा, मां-बहनें अब समझ चुकी हैं कि धार्मिक कट्टरता और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक है।
उनके मुताबिक, यह जागरूकता ही आने वाले समय की सबसे बड़ी ताकत बनने जा रही है।
हिंदू जलता है तो इन्हें फर्क नहीं पड़ता”
रविकिशन ने विपक्ष पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि
जब एक हिंदू को जिंदा जला दिया जाता है, तब इन लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता।
लेकिन अगर चर्च या मस्जिद के पास डीजे बज जाए, तो इन्हें तुरंत परेशानी होने लगती है।
उन्होंने साफ कहा कि यह चयनात्मक संवेदनशीलता देश को तोड़ने का काम करती है।
हिंदू समाज शांतिप्रिय है, लेकिन कमजोर नहीं
अपने बयान को संतुलित करते हुए सांसद ने यह भी कहा कि हिंदू समाज शांतिप्रिय समाज है।
हम न तो विवाद चाहते हैं और न ही किसी की शांति में दखल देते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम अत्याचार सहते रहेंगे।
उनके शब्दों में अब वह दौर खत्म हो चुका है, जब हिंदू समाज चुप रहकर सब सह लेता था।
राजनीतिक संकेत और राष्ट्रीय संदेश
रविकिशन का यह बयान सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। यह बयान उस व्यापक माहौल को दर्शाता है, जिसमें बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार, भारत में विपक्ष की चुप्पी, और आने वाले चुनावों की रणनीति — तीनों एक साथ जुड़ते दिखाई दे रहे हैं।
यह साफ है कि यह मुद्दा अब सिर्फ मानवाधिकार का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता और राजनीतिक दिशा का भी बन चुका है।
बयान नहीं, चेतावनी
वनटांगिया गांव से दिया गया यह बयान एक संदेश है —
कि अब बांग्लादेश की घटनाएं सिर्फ सीमा पार की खबर नहीं रहीं।
वे भारत की राजनीति, समाज और चुनावी समीकरणों को सीधे प्रभावित कर रही हैं।
रविकिशन के शब्दों में साफ चेतावनी है —
“अब देश चुप नहीं बैठेगा।”