देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पाने वाला इंदौर इन दिनों एक गंभीर स्वास्थ्य संकट से गुजर रहा है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। हालात इतने भयावह हैं कि एक सप्ताह से लोग बीमार पड़ते रहे, लेकिन प्रशासन को इसकी गंभीरता तब समझ आई, जब मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा।
दूषित पानी बना मौत का कारण, आंकड़ों में उलझा प्रशासन
अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, दूषित पानी पीने से डायरिया फैलने के कारण मौतें हुई हैं।
हालांकि शासन ने फिलहाल सिर्फ 3 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है।
सरकारी तौर पर पुष्टि की गई मौतें:
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नंदराम (70)
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उर्मिला (60)
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ताराबाई कोरी (70)
इनके अलावा जिन लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है:
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गोमती रावत (50)
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उमा कोरी (31)
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संतोष बिगोलिया
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नंदलाल पाल (75)
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उर्मिला यादव (69)
इनमें से अधिकतर मृतक भागीरथपुरा की भाऊ गली और आसपास के इलाकों के रहने वाले थे।
अस्पतालों में हालात गंभीर, ICU तक पहुंचे मरीज
दूषित पानी से बीमार पड़े मरीजों को शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति:
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वर्मा हॉस्पिटल: 30
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ईएसआईसी हॉस्पिटल: 11
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एमवायएच: 5
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त्रिवेणी हॉस्पिटल: 7
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अरबिंदो हॉस्पिटल: 6
(अरबिंदो में 3 मरीज ICU में)
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 100 बेड की अलग यूनिट बनाई गई है।
एक हफ्ते से फैल रही थी बीमारी, पहली मौत 26 दिसंबर को
जांच से साफ हो रहा है कि पिछले एक सप्ताह से लोग बीमार हो रहे थे।
26 दिसंबर को गोमती रावत की मौत संभवतः पहली थी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
इसके बाद पांच दिनों में मौतों का आंकड़ा 8 तक पहुंच गया।
मंत्री के अचानक दौरे से खुली सच्चाई
सोमवार रात मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अचानक इंदौर पहुंचने और वर्मा हॉस्पिटल जाने के बाद मामला सामने आया।
तब पता चला कि 150 से ज्यादा लोग बीमार हो चुके हैं।
मंगलवार को दिनभर में 5 मौतों की खबर आई, जबकि देर रात 3 और मौतों की पुष्टि हुई।
इलाज पूरी तरह मुफ्त, खर्च शासन उठाएगा
सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि:
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भागीरथपुरा क्षेत्र से आने वाले मरीजों से एक भी पैसा नहीं लिया जाएगा
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इलाज का पूरा खर्च शासन वहन करेगा
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पहले जमा की गई राशि वापस की जाएगी
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और आंकड़े
सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के मुताबिक:
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2703 घरों का सर्वे
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12,000 लोगों की जांच
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1146 मरीजों को मौके पर इलाज
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111 मरीज अस्पताल में भर्ती
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18 मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे
15 गलियों में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ घर-घर पहुंच रहा है।
लीकेज बना जानलेवा, शौचालय के नीचे टूटी थी जल लाइन
जांच में सामने आया कि:
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चौकी से लगे शौचालय के नीचे मुख्य जल लाइन में लीकेज
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इसी से गंदा पानी पेयजल लाइन में मिला
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नर्मदा जल सप्लाई से भी बदबूदार पानी आ रहा था
राउ विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 75 और 76 में भी हालात चिंताजनक हैं।
जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई
अब तक हुई कार्रवाई:
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जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले निलंबित
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पीएचई अभियंता योगेश जोशी निलंबित
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डिप्टी इंजीनियर शुभम श्रीवास्तव की सेवा समाप्त
तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है।
मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख की सहायता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने:
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मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपए
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दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
50 टैंकरों से पानी सप्लाई और हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।
दवाइयों की रिकॉर्ड बिक्री, डर के साए में लोग
स्थानीय दवा दुकानदारों के अनुसार:
“सालभर की दवाइयां चार दिन में बिक गईं।”
इलाके में डर, गुस्सा और असुरक्षा का माहौल है।
स्वच्छता की रैंकिंग से आगे जिम्मेदारी जरूरी
यह हादसा सिर्फ बीमारी या दूषित पानी की कहानी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की कीमत है।
सवाल यह है कि शिकायतें पहले थीं, टेंडर जारी था, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इंदौर जैसे शहर में अगर लोग पानी से मरने लगें, तो यह पूरे सिस्टम पर सवाल है।