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Indian Oil Reserve: ये रिपोर्ट होश उड़ा देगी – भारत पर पेट्रोल संकट का खतरा? खतरे की घंटी बज चुकी है!

Indian Oil Stock: ये रिपोर्ट होश उड़ा देगी - भारत पर पेट्रोल संकट का खतरा? खतरे की घंटी बज चुकी है!

Indian Oil Reserve: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता तेज हो गई है। संसद की एक महत्वपूर्ण समिति ने अपनी ताजा रिपोर्ट में साफ कहा है कि देश के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) की रफ्तार बेहद धीमी है, जो भविष्य में बड़े संकट का कारण बन सकती है।

भारत के पास कितने दिन का पेट्रोल भंडार?

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस समय भारत के पास कुल 74 दिनों का पेट्रोलियम भंडार है। इसमें:

  • 9.5 दिन का रणनीतिक भंडार (SPR)

  • 64.5 दिन का भंडार सरकारी तेल कंपनियों के पास

लेकिन संसदीय समिति का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए देश के पास कम से कम 90 दिनों का भंडार होना जरूरी है।

कहां हैं मौजूदा रणनीतिक भंडार?

फिलहाल भारत में तीन जगहों पर रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद हैं:

  • विशाखापत्तनम

  • मंगलुरु

  • पाडुर

इनकी कुल क्षमता करीब 53.3 लाख मैट्रिक टन है और इनका संचालन इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) करती है।

फेज-2 परियोजनाएं क्यों अटकीं?

ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए 2021 में दूसरे चरण के तहत:

  • ओडिशा के चांदीखोल

  • कर्नाटक के पाडुर

में नए भंडार बनाने को मंजूरी दी गई थी।

लेकिन करीब 5 साल बाद भी इन परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई, जिस पर समिति ने नाराजगी जताई है।

बजट मिला, लेकिन खर्च नहीं हुआ!

रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इन परियोजनाओं के लिए आवंटित बजट का बहुत छोटा हिस्सा ही खर्च हो पाया:

  • 2023-24: 508 करोड़ → घटाकर 40 करोड़, खर्च 0

  • 2024-25: 408 करोड़ → 30 करोड़, खर्च 17.25 करोड़

  • 2025-26: 100 करोड़ → 20 करोड़, खर्च 14.54 करोड़

यानि कई सालों से बजट घटाया भी जा रहा है और जो मिल रहा है, उसका भी पूरा इस्तेमाल नहीं हो रहा।

पश्चिम एशिया संकट से क्यों बढ़ी चिंता?

मौजूदा पश्चिम एशिया संकट ने यह दिखा दिया है कि अगर समय रहते रणनीतिक भंडार को मजबूत किया गया होता, तो आज भारत को ऊर्जा सुरक्षा को लेकर इतनी चिंता नहीं होती।

अगर भविष्य में तेल सप्लाई प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर पड़ सकता है।

समिति की सरकार को सलाह

संसदीय समिति ने सरकार को कई अहम सुझाव दिए हैं:

  • बजट अनुमान यथार्थवादी और जरूरत के हिसाब से तय किए जाएं

  • आवंटित धन का पूरा उपयोग सुनिश्चित किया जाए

  • परियोजनाओं में देरी खत्म कर तेजी से काम पूरा किया जाए

  • जहां संभव हो, वहां नए भूमिगत भंडार (कैवर्न) बनाए जाएं

Indian Oil Reserve: भारत की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल ठीक स्थिति में दिखती है, लेकिन भविष्य के जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 74 दिन का भंडार पर्याप्त नहीं माना जा रहा, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सरकार समय रहते इन परियोजनाओं को गति दे पाएगी, या देश को भविष्य में ईंधन संकट का सामना करना पड़ सकता है?