मजार जिहाद: गाजियाबाद में गरमाई सियासत
गाजियाबाद में जीटी रोड पर बने एक कथित अवैध मजार को लेकर शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया। नगर निगम की महापौर सुनीता दयाल ने जिस दृढ़ता से मोर्चा संभाला, उसने पूरे शहर को चौंका दिया। इससे पहले यह मजार सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जहां मेयर खुद पहुंचकर सवाल उठाती दिखीं कि—”ये मजार यहां बनी कैसे?”
मजार जिहाद: संदिग्ध की हरकत और मेयर की एंट्री
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जब महापौर शुक्रवार को दोबारा मौके पर पहुंचीं, तो मजार के पास बैठा एक संदिग्ध युवक स्कूटी से तेजी से फरार हो गया। यह दृश्य मौके पर मौजूद लोगों ने भी देखा और नगर निगम की टीम ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। नगर निगम के दस्ते ने मजार को अवैध निर्माण करार देते हुए तोड़फोड़ की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी।
मजार जिहाद: मेयर सुनीता दयाल का दो-टूक बयान
“गाजियाबाद में मजार जिहाद नहीं चलने देंगे। ये मजार अवैध है, इसे तत्काल हटाया जाएगा।”
जब मेयर से पूछा गया कि क्या यह मजार गयासुद्दीन की है, जिनके नाम पर गाजियाबाद का नाम पड़ा, तो उन्होंने स्पष्ट किया:
“गयासुद्दीन के वंशजों की कब्रें निजी जमीन पर हैं। यह अवैध निर्माण है, इसका गयासुद्दीन से कोई संबंध नहीं।”
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा पहलू: रक्षा मंत्रालय की ज़मीन पर कब्जा?
मेयर ने सबसे गंभीर पहलू उजागर करते हुए बताया कि यह मजार रक्षा मंत्रालय के एक अत्यंत संवेदनशील कैंपस के बिल्कुल करीब बनी है, जहां सुरक्षा उपकरण और सैन्य सामग्री रखी जाती है।
“यह केवल अवैध कब्जा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।”
FIR की तैयारी: संदिग्ध की पहचान होगी उजागर
जिस व्यक्ति को मजार पर बैठा देखा गया, उसके खिलाफ थाने में FIR की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। महापौर ने कहा:
“जल्द ही उस व्यक्ति की पहचान उजागर कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
मजार जिहाद: सुनीता दयाल की सख्त कार्यशैली बनी चर्चा का विषय
इस कार्रवाई ने न सिर्फ प्रशासन को हरकत में ला दिया, बल्कि आम जनता के बीच ‘कानून का राज’ स्थापित करने का मजबूत संदेश दिया है। मेयर की सक्रियता, निष्पक्षता और बोल्ड फैसले गाजियाबाद में सुशासन की नई मिसाल बनते जा रहे हैं।