सावन और भाद्रपद मास का विशेष त्योहार हरतालिका तीज इस बार मंगलवार को मनाया जाएगा। यह व्रत विवाहित और अविवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान शिव-पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है।
हरतालिका तीज व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। लेकिन उनके पिता, हिमालय, उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे। इस स्थिति से पार्वती जी को बचाने के लिए उनकी सहेलियों ने उनका अपहरण कर उन्हें घने जंगल में छिपा दिया।
वहीं, माता पार्वती ने कठिन तपस्या शुरू की। उन्होंने अन्न-जल त्याग कर केवल सूखे पत्तों का सेवन किया और वर्षा, ठंड तथा गर्मी में कठोर साधना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। यही कारण है कि इस व्रत का नाम **हरितालिका तीज** पड़ा।
पढ़िए व्रत का महत्व
हरतालिका तीज का व्रत न केवल पति-पत्नी के मधुर संबंधों को मजबूत करता है बल्कि स्त्रियों को अखंड सौभाग्य भी प्रदान करता है। इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की स्मृति में व्रत और पूजा की जाती है। महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और रात्रि में जागरण कर कथा श्रवण करती हैं।
जानिए पूजा की विधि
इस दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। उसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र को स्थापित कर पूजा की जाती है। फल-फूल, बेलपत्र, धूप-दीप और विशेष रूप से सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है। रात्रि में हरतालिका तीज की कथा सुनने के बाद व्रत का समापन होता है।
रिश्तों को करता है मजबूर
हरतालिका तीज व्रत केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते की मजबूती और पारिवारिक सुख-शांति का भी प्रतीक है। इसी कारण से यह त्योहार उत्तर भारत के कई राज्यों में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है।