हिना की गुहार: सौतन स्वीकार है “मुझे ससुराल भेजो… या इच्छा मृत्यु की अनुमति दो”
सहारनपुर DM कार्यालय में फूटा एक मजबूर महिला का दर्द, जिसने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया
सहारनपुर का आज जिला कलेक्ट्रेट का माहौल उस समय भारी हो गया जब 2019 में मुस्लिम रीति-रिवाज़ से विवाह करने वाली विवाहिता हिना आँसूओं में डूबी हुई प्रशासन के दरवाज़े पहुँची। उसके हाथ में एक प्रार्थना पत्र था और दिल में दर्द का पहाड़।
हिना की मांग बेहद साफ, बेहद कड़वी और झकझोर देने वाली थी—
“या तो मुझे मेरे ससुराल में, मेरे पति के साथ सम्मानपूर्वक रहने की व्यवस्था कराई जाए… या मुझे इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी जाए।”
दहेज में 50 लाख रुपये और कार… फिर भी नहीं मिली ‘बहू’ की जगह
हिना ने बताया कि उसके परिवार ने शादी में 50 लाख रुपये का दहेज और एक कार ससुराल वालों को दिया था।
लेकिन इसके बावजूद दहेज की भूख शांत नहीं हुई।
– उसके साथ मारपीट,
– मानसिक प्रताड़ना,
– और संतान न होने के नाम पर तानों की आग
लगातार उस पर बरसाई जाती रही।
हिना रोते हुए बताती है कि दहेज की मांगें बढ़ती गईं और एक दिन उसे घर से बाहर निकाल दिया गया।
पति ने कर ली दूसरी शादी… बिना तलाक, बिना जानकारी
हिना जब मायके में थी, तभी उसे पता चला कि उसके पति ने चुपचाप दूसरी शादी भी रचा ली।
लेकिन हिना ने यहाँ भी वह इंसानियत, वह ‘दरीयादिली’ दिखाई, जो शायद समाज में दुर्लभ है।
हिना ने कहा—
“इस्लाम में चार पत्नियां रखने की बात कही गई है, मैं इसका विरोध नहीं करती…
वह उसे भी रखे, मुझे भी रखे… यह उसका निजी मामला है।
लेकिन जब मेरा तलाक हुआ ही नहीं, तो मुझे मेरे पति से अलग क्यों किया जा रहा है?”
समाज में अक्सर सुना जाता है—
‘औरत की सबसे बड़ी दुश्मन उसकी सौतन होती है’
लेकिन हिना ने अपनी सौतन तक को स्वीकार किया,
सिर्फ इसलिए कि उसे अपने पति के साथ रहने की इजाज़त मिल जाए।
क्या यह सहनशीलता नहीं, बलिदान नहीं… या फिर मजबूरी की पराकाष्ठा?
कई शिकायतें, कोई कार्रवाई नहीं—हिना टूटी, बिखरी और अंत में प्रशासन की चौखट पर पहुँची
हिना ने कई बार पुलिस और प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं।
आख़िरकार वह टूट गई…
और आज DM दफ्तर आकर बोली—
“अगर मेरे पति मुझे नहीं रखना चाहते, तो मुझे इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी जाए…
मैं अब जीना नहीं चाहती।”
यह सुनकर हर संवेदनशील इंसान का दिल काँप उठे—
क्या एक महिला की ज़िंदगी इतनी सस्ती है?
क्या वह सिर्फ दहेज की मशीन है?
क्या वह सिर्फ मनमर्ज़ी से इस्तेमाल और त्याग देने की वस्तु है?
DM और SSP का आश्वासन—”उचित कार्रवाई होगी”
जिलाधिकारी और SSP ने हिना की बात सुनने के बाद उसे आश्वासन दिया है कि
इस मामले में न्यायसंगत और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन सवाल अब भी वहीं है…
क्या कार्रवाई समय रहते होगी?
क्या हिना को उसके अधिकार मिलेंगे?
क्या दहेज के खिलाफ कानून सिर्फ किताबों तक सीमित रह जाएगा?
समाज के लिए आईना, धर्म नहीं, सोच जहरीली है
यह खबर किसी धर्म विशेष पर टिप्पणी नहीं, बल्कि समाज के सामने एक कड़वा आईना है।
धर्म चाहे हिंदू हो, मुस्लिम…
सिख हो या ईसाई,
महिलाओं की भावनाएं, दर्द, उम्मीदें और रिश्ते—सब एक से होते हैं।
लेकिन अफ़सोस…
यह इंसानी समाज अब भी महिलाओं को बोझ, खिलौना और वस्तु की तरह देखता है।
सबसे तीखा सवाल—
जब तलाक नहीं हुआ, तो हिना को उसके हक़ से बेदखल किसने कर दिया?
दहेज की आग ने न जाने कितनी बेटियों को निगल लिया…
और आज हिना उस आग का ज़िंदा सबूत बनकर खड़ी है।
पीड़िता हिना का बयान
“हमारे परिवार ने 50 लाख रुपये और एक कार दी थी, फिर भी मुझे प्रताड़ित किया।
जब मैं मायके चली गई, मेरे पति ने दूसरी शादी कर ली।
इस्लाम में चार पत्नियां रखने की बात है, मैं इसे स्वीकार करती हूं…
लेकिन जब तलाक नहीं हुआ, तो मुझे मेरे पति से अलग क्यों किया जा रहा है?
अगर मुझे मेरा हक़ नहीं मिला… तो मुझे इच्छा मृत्यु दे दी जाए।”
रॉकेट पोस्ट भारत यह खबर इसलिए प्रसारित की है?
ताकि समाज समझ सके—
हर दिन हजारों हिनाएं दहेज, दूसरी शादी, प्रताड़ना और समाज की चुप्पी के बीच दम तोड़ रही हैं।
ताकि सिस्टम जागे—
कानून सिर्फ कागज़ पर नहीं, जमीन पर भी दिखे।
और ताकि हर व्यक्ति महसूस कर सके—
महिला कोई खिलौना नहीं…
वह इंसान है, उसकी इज़्ज़त, उसके अधिकार सबसे पहले हैं।