बांग्लादेश में हिंदू होना क्या अपराध बन चुका है?” — दीपू चंद्र की हत्या से दिल्ली तक उबाल, भारत-बांग्लादेश रिश्तों में भूचाल
बांग्लादेश की धरती एक बार फिर हिंदू खून से लाल है।
मैमनसिंह जिले में 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या और फिर शव को जलाने की घटना ने न सिर्फ मानवता को शर्मसार किया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि —
क्या बांग्लादेश में हिंदुओं की जान की कोई कीमत नहीं रह गई?
इस जघन्य हत्या के खिलाफ भारत की राजधानी दिल्ली से लेकर देश के कई हिस्सों में आक्रोश फूट पड़ा है।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रही है
दीपू चंद्र की हत्या: “फेसबुक पोस्ट” का झूठा बहाना, सच्चाई कुछ और!
18 दिसंबर की रात बांग्लादेश के मैमनसिंह में जो हुआ, वह कोई सामान्य अपराध नहीं था—
27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या
हत्या के बाद शव को आग के हवाले किया गया
पहले दावा किया गया कि दीपू ने फेसबुक पर “धार्मिक भावनाएं आहत” की थीं
लेकिन शुरुआती जांच में इस दावे का कोई सबूत नहीं मिला
सवाल सीधा है—
अगर कोई सबूत नहीं था, तो भीड़ किस आधार पर कानून अपने हाथ में ले बैठी?
क्या सिर्फ हिंदू होना ही उसका अपराध था?
मॉब लिंचिंग या सुनियोजित आतंक?
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले अब “अलग-थलग घटनाएं” नहीं रह गई हैं।
दीपू की हत्या ने उस डरावने ट्रेंड को फिर उजागर कर दिया है जिसमें—
भीड़ बनती है
अफवाह फैलाई जाती है
हिंदू युवक या परिवार को निशाना बनाया जाता है
और फिर राज्य मशीनरी देर से जागती है
यह वही पैटर्न है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी पहले उठा चुके हैं।
दिल्ली में उबाल: VHP का सीधा संदेश — “हिंदुओं पर अत्याचार बंद करो”
दीपू चंद्र की हत्या के बाद
विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया जा रहा है ।
प्रदर्शनकारियों की मांगें साफ थीं—
दीपू के हत्यारों की तुरंत गिरफ्तारी
पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा
बांग्लादेश सरकार द्वारा अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा की गारंटी
यह प्रदर्शन किसी देश के खिलाफ नहीं,
बल्कि हिंदू जीवन की कीमत पूछने की आवाज था।
बांग्लादेश की पलटवार कूटनीति: भारतीय उच्चायुक्त तलब
हैरानी की बात यह रही कि
हिंदू युवक की हत्या पर आत्ममंथन करने के बजाय
बांग्लादेश सरकार ने भारत पर ही सवाल खड़े कर दिए।
भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को एक हफ्ते में दूसरी बार तलब किया गया
भारत में बांग्लादेशी मिशनों पर प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई
दिल्ली और सिलीगुड़ी की घटनाओं को “अस्वीकार्य” बताया
वीज़ा सेवाएं बंद: सुरक्षा या दबाव की राजनीति?
बांग्लादेश हाई कमीशन ने—
दिल्ली
सिलीगुड़ी
अगरतला
में वीज़ा और काउंसलर सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दीं।
तारीखें साफ बोलती हैं—
20 दिसंबर: दिल्ली में हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन
22 दिसंबर: सिलीगुड़ी में वीज़ा सेंटर में तोड़फोड़
इसके बाद: वीज़ा सेवाओं पर रोक
सवाल उठता है—
क्या यह कदम सुरक्षा के नाम पर असहज सवालों से बचने की कोशिश है?
10 दिनों में बिगड़े रिश्ते: पूरी टाइमलाइन
14 दिसंबर
शेख हसीना के बयानों पर नाराजगी
भारतीय उच्चायुक्त तलब
18 दिसंबर
दीपू चंद्र दास की हत्या
शव जलाया गया
19 दिसंबर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश
20 दिसंबर
भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर चिंता जताई
दिल्ली में प्रदर्शन
22 दिसंबर
सिलीगुड़ी वीज़ा सेंटर में तोड़फोड़
बांग्लादेश ने वीज़ा सेवाएं रोकीं
23 दिसंबर
फिर प्रदर्शन
भारतीय उच्चायुक्त दोबारा तलब
हादी हत्याकांड और ध्यान भटकाने की कोशिश?
बांग्लादेश ने दावा किया कि
छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के आरोपी के भारत भागने की कोई पुष्टि नहीं है।
तो फिर सवाल यह है—
जब आरोपी भारत में नहीं है, तो गुस्सा भारत पर क्यों?
क्या हिंदू हत्या के मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश हो रही है?
हिंदू समाज के नाम संदेश: डर नहीं, जागरूकता जरूरी
दीपू चंद्र की हत्या सिर्फ एक नाम नहीं है,
यह उस संघर्ष की कहानी है जिसे बांग्लादेश का हिंदू समाज सालों से झेल रहा है।
यह खबर डर फैलाने के लिए नहीं
बल्कि जागने और जगाने के लिए है
ताकि हर हिंदू यह समझे कि
एकता, आवाज और अंतरराष्ट्रीय दबाव ही सुरक्षा का रास्ता है
सवाल बांग्लादेश सरकार से है
क्या बांग्लादेश अपने हिंदू नागरिकों को सुरक्षा देगा?
क्या मॉब लिंचिंग पर सख्त कार्रवाई होगी?
या फिर हर बार “कूटनीतिक बयान” देकर मामले दबा दिए जाएंगे?
हिंदू समाज अब जवाब चाहता है।
और यह आवाज अब दबने वाली नहीं है।