पति ने पढ़ा-लिखा कर SI बनाया… और नौकरी लगते ही ने पत्नी ने दिया धोखा या कुछ और!
हापुड़ Love Story विवाद अब प्रशासनिक दरवाजे तक पहुँचा
पति ने पढ़ा लिखा दरोगा बनाया.. SI पत्नी ने कराई 10 लाख का दहेज़ मांगने की FIR
यूपी के हापुड़ मे शादी के बाद पत्नी पायल UP पुलिस मे दरोगा बनी तो परिवार की कलह थाने की दहलीज तक पहुँच गई। 2016 मे अफेयर, 2021 मे लव मैरिज व 2022 मे सामाजिक रीति रिवाज़ से विवाह किया। पति का आरोप है की शादी के बाद पायल ट्रेनिंग पर गई व दरोगा के पद पर पोस्टिंग हुई तो पत्नि पायल ने पति पर दहेज़ के लिए उत्पीड़न की FIR करा दी।
आइये विस्तार से बताते हैं कि लव स्टोरी से लेकर अब तक की कहानी आखिर क्या है, और यह मामला कैसे प्रेम से पुलिस तक कैसे पहुँच गया।
पायल की शिकायत के मुताबिक बरेली पोस्टिंग होने पर वो अपनी सारी सैलरी अपने पति के एकाउंट में ट्रांसफर करती रही। इससे भी उनकी भूख नहीं मिटी। उन्होंने दबाव बनाया कि 10 लाख का लोन अपने नाम पर लेकर उन्हें दें। जो उसने किया, लेकिन उसके बाद भी पति और ससुराल पक्ष के लोग लगातार 10 लाख रुपये नकद और एक लग्जरी कार की मांग कर रहे हैं।
वही पति का कहना है कि उसने मेहनत करके पत्नी को दरोगा बनवाया, अब वो उसे और उसके परिवार को फंसाने में लगी है।
एक लव स्टोरी से थाने तक का सफर – अफेयर, शादी और नौकरी की कहानी
साल 2016 में पायल और गुलशन की प्रेम कहानी की शुरुआत उस दौर में हुई, जब दोनों एक-दूसरे के करीब आए, बातचीत शुरू हुई और समय के साथ रिश्ता गहराता गया। वह समय कॉलेज और कोचिंग वाली उम्र का था, जब सपने अपनी दिशा ढूंढते हैं। पायल के मन में पुलिस वर्दी का सपना था, जबकि गुलशन ने न सिर्फ सपने को समझा, बल्कि उसे अपनी जिम्मेदारी मान लिया।
इस दौरान दोनों में प्रेम, विश्वास और भविष्य की योजनाएँ पनपीं। यही रिश्ता आगे चलकर 2021 में लव मैरिज तक पहुँचा, जब दोनों ने समाज और परिवार के फैसले से पहले ही एक-दूसरे को अपना जीवन साथी चुन लिया। उसके बाद 2 दिसंबर 2022 को दोनों परिवारों की रजामंदी से सामाजिक रीति-रिवाज़ के साथ विवाह हुआ।
शादी तक आते-आते उनका रिश्ता केवल प्रेम नहीं, बल्कि एक-दूसरे के संघर्ष और सपनों का साथी बन चुका था। पायल की ट्रेनिंग शुरू हुई, पोस्टिंग लगी, लेकिन किसी को भी अंदाजा नहीं था कि कुछ वर्षों बाद यही रिश्ता कानूनी जंग में बदल जाएगा।
पति की मेहनत – पढ़ाई, तैयारी, ट्रेनिंग और सपनों की आहुति
यह कहानी का सबसे भावुक और महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहाँ गुलशन यानि पति ने केवल प्रेमी नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक और संघर्ष साथी की भूमिका निभाई। पायल का सब-इंस्पेक्टर (SI) बनना आसान सफर नहीं था। इसमें प्रतियोगी परीक्षाओं, लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, मेडिकल और ट्रेनिंग तक लम्बा संघर्ष शामिल था।
इस दौरान गुलशन ने पायल की कोचिंग फीस, फॉर्म फीस, होस्टल का किराया, स्टडी मटेरियल, और जरूरत के कई निजी खर्च तक उठाए। सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहारा भी दिया। कई बार असफलताओं और निराशा के बीच जब पायल टूटती, तो गुलशन उसे संभालता, प्रोत्साहित करता, और कहता कि—
“तुम एक दिन वर्दी पहनोगी, बस संघर्ष जारी रखो।”
इसी हौसले और निरंतर प्रयास के बीच आखिरकार पायल ने UP पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (SI) की नौकरी हासिल की। ट्रेनिंग के दौरान भी गुलशन और पायल संपर्क में थे। ट्रेनिंग पूरी होने पर पायल की बरेली में पोस्टिंग हुई, जिसे परिवार ने गर्व से देखा।
गुलशन अक्सर रिश्तेदारों और दोस्तों से कहा करता था कि—
“मेरी पत्नी दरोगा है, मैंने उसे तैयार किया, अब हमारा भविष्य उज्ज्वल होगा।”
परंतु किसे पता था कि सपनों की वही चमक आगे जाकर रिश्ते की सबसे बड़ी टूटन साबित हो जाएगी।
वर्दी का सपना पूरा, लेकिन रिश्तों में दूरी
पायल की ट्रेनिंग और पोस्टिंग के साथ-साथ उसकी दिनचर्या बदल गई। वर्दी, थाना, रिपोर्टिंग, ड्यूटी शिफ्ट, कानूनी दबाव, और रोज़ाना का सरकारी वातावरण— इन सबने उसके व्यवहार को और कड़ा बना दिया।
वहीं गुलशन को लगने लगा कि वह जिस पत्नी के लिए वर्षों तक संघर्ष करता रहा, वह अब उससे धीरे-धीरे दूर हो रही है। घर में बातचीत कम होने लगी, एक-दूसरे के लिए समय घटने लगा और इस बीच तनाव और दूरी बढ़ती चली गईं।
कुछ रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने यह भी महसूस किया कि पायल अब अपने परिवार की तुलना में नौकरी और विभागीय जीवन को अधिक प्राथमिकता देने लगी है। यहीं से विवाद की जमीन तैयार होने लगी, जो आगे जाकर दहेज़ और कानूनी जंग में बदल गई।
पत्नी का आरोप – “सैलरी दी, लोन लिया, फिर भी दहेज़ की भूख नहीं मिटी”
यह विवाद तब उफान पर आया जब पायल ने SP कार्यालय में प्रार्थना पत्र देकर गंभीर आरोप दर्ज कराए। पायल ने कहा कि शादी के बाद उसने अपनी पूरी सैलरी पति के बैंक खाते में ट्रांसफर की, ताकि वह परिवार में आर्थिक सहयोग बना सके।
इसके बाद पायल का आरोप है कि गुलशन और उसके परिवार ने उस पर दबाव बनाकर ₹10 लाख का लोन उसके नाम से निकलवाया, जिसे उसने पति के कहने पर लिया। लेकिन लोन के बाद भी पायल का आरोप है कि ससुराल पक्ष को संतोष नहीं हुआ और उन्होंने ₹10 लाख नगद और एक लग्ज़री कार की दहेज़ मांग शुरू कर दी।
पायल ने यहां तक आरोप लगाया कि मना करने पर उसे मारपीट, मानसिक उत्पीड़न और यहां तक कि तेज़ाब फेंकने की धमकी तक दी गई। यही कारण था कि एक पुलिस अधिकारी होने के बावजूद उसने FIR दर्ज कराने का रास्ता चुना, ताकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
पति का पलट-वार – “मैंने मेहनत कर दरोगा बनाया, अब वही फंसाने में लगी है”
इस मामले में पति गुलशन की तरफ से जो भावनाएँ और आरोप सामने आए, वे भी कम गंभीर नहीं हैं। गुलशन का कहना है कि उसने वर्षों तक पायल की पढ़ाई, तैयारी, और ट्रेनिंग में अपना समय, पैसा और अपने जीवन के करियर का हिस्सा झोंक दिया।
गुलशन का दावा है कि—
“अगर मैं दहेज़ का भूखा होता, लालची होता तो क्या मैं उसे दरोगा बनाने में अपनी मेहनत नहीं लगाता?”
उसका आरोप है कि नौकरी लगने के बाद पायल ने अपने व्यवहार में बड़ा बदलाव किया, वह पति और ससुराल से दूरियां बनाने लगी और अब वह झूठे आरोप लगाकर उसे और पूरे परिवार को फँसाने में लगी है। गुलशन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है और कहता है कि सच सामने आने पर उसकी मेहनत और नीयत साफ हो जाएगी।
कानूनी स्थिति – FIR दर्ज, धाराएँ लागू, जांच ने पकड़ी रफ्तार
पायल की ओर से शिकायत के बाद नगर कोतवाली में गुलशन और उसके परिवार पर दहेज़ उत्पीड़न, धमकी, मारपीट और अन्य संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की जा चुकी है।
मामला सिर्फ घरेलू विवाद नहीं बल्कि कानूनी और दहेज़ कानून के अंतर्गत आता है, इसलिए पुलिस ने इस पर औपचारिक जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधीक्षक की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होगी, और कोई भी पक्ष चाहे पति हो या पत्नी – कानून के आगे विशेषाधिकार प्राप्त नहीं करेगा।
समाज और क़ानून के सामने खड़े बड़े सवाल…
यह पूरा मामला समाज में कई गंभीर सवाल छोड़ जाता है—
क्या दहेज़ प्रथा अभी भी ज़िंदा है?
क्या दहेज़ कानून का दुरुपयोग हो रहा है?
क्या लव मैरिज भी दहेज़ विवादों से सुरक्षित नहीं?
क्या महिला सशक्तिकरण और परिवारिक संरचना के बीच संघर्ष बढ़ रहा है?
क्या वर्दी और वैवाहिक जीवन के बीच टकराव बन रहा है?
इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में तभी मिलेगा जब जांच पूरी होगी और अदालत व पुलिस दोनों पक्षों की दलीलें सुनेंगे।
एक तरफ संघर्ष, प्यार, पढ़ाई, वर्दी, और सपनों की जीत है, तो दूसरी तरफ आरोप, FIR, दहेज़, धारा, और कानूनी लड़ाई।
यह कहानी सिर्फ पायल और गुलशन की नहीं, बल्कि यह समाज का दर्पण है जिसमें प्यार, बलिदान, महत्वाकांक्षा, अधिकार और कानून की रेखाएँ एक साथ दिखाई देती हैं।
अंततः सच्चाई वही होगी जो कानूनी जांच और तथ्यों के आधार पर सामने आएगी।