Illegal Hunting India: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले से वन्यजीव के शिकार का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां तीन युवकों पर एक बंगाल मॉनिटर लिजार्ड यानी गोह को जंगल में पकड़ने, उसके पैर काटने और फिर उसे शराब के साथ चखना बनाने के लिए पकाकर खाने का आरोप है। युवकों ने पूरी घटना का वीडियो भी बनाया और उनमें से एक ने इसे सोशल मीडिया पर रील के तौर पर पोस्ट कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग ने तीनों युवकों को पकड़ लिया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई
मामला जिले के श्यामगिरी इलाके का बताया जा रहा है। Instagram पर हुंगा ओयाम नाम की आईडी से वीडियो पोस्ट किया गया था। वीडियो में दो युवक एक मॉनिटर लिजार्ड को पकड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। इनमें से एक युवक कैमरे के सामने इसे शराब के साथ चखना बनाने की बात करता नजर आता है।
वीडियो में गोह के साथ क्रूरता के दृश्य
वीडियो में मॉनिटर लिजार्ड को पकड़ने के बाद उसके साथ क्रूरता किए जाने के दृश्य भी दिखाई देते हैं। युवक चाकू से उसके पैर काटते हुए नजर आ रहे हैं। इसके बाद मॉनिटर लिजार्ड को पकाकर खाने की बात सामने आई है। पूरी घटना की रील सोशल मीडिया पर पोस्ट होने के बाद मामला वन विभाग के अधिकारियों तक पहुंचा।
वन विभाग ने तीनों युवकों को पकड़ा
वीडियो की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग ने मामले में कार्रवाई शुरू की। PCCF के निर्देश पर बचेली रेंजर प्रीतेश पांडेय और उनकी टीम ने श्यामगिरी क्षेत्र में युवकों की तलाश शुरू की। कार्रवाई करते हुए टीम ने तीनों आरोपियों को पकड़ लिया।
तीनों आरोपी खूंटेपाल गांव के रहने वाले
वन विभाग की कार्रवाई में पकड़े गए आरोपियों की पहचान हुंगा ओयाम (30), कोसा ओयामी (39) और नंदाराम ओयामी (36) के रूप में हुई है। तीनों खूंटेपाल गांव के रहने वाले बताए गए हैं। बताया जा रहा है कि तीनों युवक बोर उत्खनन करने वाली गाड़ी में काम करते हैं।
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल तीनों युवकों को वन विभाग की टीम अपने साथ लेकर आई है और पूरे मामले की जांच जारी है।
3 से 4 महीने की थी मॉनिटर लिजार्ड
वन विभाग के अनुसार, जिस बंगाल मॉनिटर लिजार्ड का शिकार किया गया, उसकी उम्र करीब 3 से 4 महीने बताई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक इसके शिकार पर भी 3 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। बताया गया है कि इसी तरह की सजा टाइगर या अन्य जीवों के शिकार के मामलों में भी हो सकती है।
क्या है बंगाल मॉनिटर लिजार्ड?
बंगाल मॉनिटर लिजार्ड का वैज्ञानिक नाम Varanus bengalensis है। भारत में इसे आम तौर पर गोह, गोहेरा या मॉनिटर लिजार्ड के नाम से जाना जाता है। यह छिपकली प्रजाति का एक बड़ा सरीसृप है और देश के बड़े हिस्से में पाया जाता है।
मजबूत शरीर और लंबी मांसल पूंछ
बंगाल मॉनिटर का शरीर मजबूत होता है और इसकी पूंछ लंबी और मांसल होती है। इसकी एक खास पहचान इसकी दो हिस्सों में बंटी हुई जीभ है। यह मुख्य रूप से जमीन पर रहने वाला जीव है और दिन के समय ज्यादा सक्रिय रहता है।
क्या खाता है बंगाल मॉनिटर?
बंगाल मॉनिटर लिजार्ड कई तरह के छोटे जीवों को अपना भोजन बनाता है। इसके भोजन में कीड़े-मकौड़े, मेंढक, केकड़े, छोटे जीव, छिपकलियां और अन्य छोटे जीव शामिल होते हैं।
भारत के अलावा इन देशों में भी मिलता है
बंगाल मॉनिटर भारत के बड़े हिस्से में पाया जाता है। इसके अलावा इसकी मौजूदगी पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका और पश्चिम व दक्षिण एशिया के कुछ अन्य हिस्सों में भी दर्ज की गई है।
जंगल से लेकर खेतों तक में बना सकता है ठिकाना
यह मॉनिटर लिजार्ड सिर्फ घने जंगलों तक सीमित नहीं रहता। यह झाड़ियों वाले इलाकों, खेतों, सूखे और नम क्षेत्रों समेत कई तरह के प्राकृतिक आवासों में रह सकता है। बस्तर जैसे वन क्षेत्र इसके लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराते हैं, इसलिए यहां इसे देखे जाने की संभावना रहती है।
बस्तर में स्थानीय संख्या को लेकर क्या पता है?
हालांकि किसी खास इलाके में बंगाल मॉनिटर की स्थानीय संख्या कितनी है, यह सिर्फ उसके सामान्य भौगोलिक वितरण के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। यानी किसी क्षेत्र में इसकी मौजूदगी की संभावना होने का मतलब यह नहीं है कि वहां इसकी स्थानीय आबादी कितनी है, इसका सटीक आंकड़ा उपलब्ध है।
4 से 5 महीने में इन जानवरों के शिकार के मामले
दंतेवाड़ा जिले में पिछले 4 से 5 महीने के दौरान वन्यजीव शिकार से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। इनमें बाघ, तेंदुआ, महाराष्ट्र के राजकीय पशु शेकरू और अब मॉनिटर लिजार्ड के शिकार के मामले शामिल हैं।
चारों मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी
इन चारों मामलों में वन विभाग की कार्रवाई हुई है और आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। ताजा मॉनिटर लिजार्ड शिकार मामले में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया वीडियो वन विभाग के लिए अहम सुराग बना, जिसके बाद तीनों युवकों तक टीम पहुंची।
UPDATES और कार्रवाई पर रहेगी नजर
दंतेवाड़ा के श्यामगिरी इलाके में सामने आए इस मामले में वन विभाग की जांच जारी है। फिलहाल तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। आगे की कार्रवाई और जांच में सामने आने वाली जानकारी से मामले की तस्वीर और साफ होगी।