बैटरी संचालित कृत्रिम हाथ: दुर्घटना, बीमारी या अन्य कारणों से अपना हाथ गंवा चुके दिव्यांगजनों के लिए पीलीभीत से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। जिला प्रशासन की पहल पर आगामी अक्टूबर माह में जिले में एक विशेष नि:शुल्क कृत्रिम हाथ वितरण शिविर आयोजित किया जाएगा। इस शिविर में चयनित 100 पात्र दिव्यांगजनों को आधुनिक बैटरी संचालित कृत्रिम हाथ पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल एक कृत्रिम अंग उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सम्मानजनक जीवन जीने में सक्षम बनाना भी है।
डीएम ज्ञानेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में होगी विशेष पहल, मिलेंगे बैटरी संचालित कृत्रिम हाथ
जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाला यह विशेष शिविर जिले के दिव्यांगजनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। जिला प्रशासन के सहयोग से ऐसे लोगों को आधुनिक तकनीक से बने कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनका हाथ किसी दुर्घटना, बीमारी या अन्य कारणों से प्रभावित हो चुका है। यह शिविर पूरी तरह नि:शुल्क होगा और चयनित लाभार्थियों को किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना पड़ेगा।
100 पात्र दिव्यांगजनों को मिलेगा आधुनिक बैटरी संचालित कृत्रिम हाथ
अक्टूबर में आयोजित होने वाले इस विशेष शिविर में कुल 100 पात्र दिव्यांगजनों को अत्याधुनिक बैटरी संचालित कृत्रिम हाथ लगाए जाएंगे। इन कृत्रिम हाथों की सहायता से लाभार्थी अपने दैनिक जीवन के कई कार्य स्वयं कर सकेंगे, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आने की उम्मीद है।
आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी आत्मनिर्भरता
विशेषज्ञों के अनुसार यह आधुनिक कृत्रिम हाथ बैटरी से संचालित होता है और एक बटन के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। इसकी मदद से उपयोगकर्ता सामान्य जीवन में कई जरूरी कार्य आसानी से कर सकता है।
इन कृत्रिम हाथों की प्रमुख विशेषताएं हैं—
- वस्तुओं को आसानी से पकड़ना और छोड़ना।
- घरेलू एवं व्यक्तिगत दैनिक कार्य स्वयं करना।
- आत्मनिर्भर होकर सामान्य जीवन जीने में सहायता।
- कम समय में चार्ज होने वाली बैटरी, जो लंबे समय तक कार्य करती है।
यह तकनीक उन लोगों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है, जो अब तक शारीरिक सीमाओं के कारण अनेक कठिनाइयों का सामना कर रहे थे।
डीएम के समक्ष हुआ आधुनिक कृत्रिम हाथ का लाइव प्रदर्शन
इस परियोजना को लेकर श्री पार्श्वनाथ कल्पवृक्ष फाउंडेशन, जयपुर तथा इनाली फाउंडेशन, पुणे के प्रतिनिधियों ने निशक्त जन सेवा संस्थान के पदाधिकारियों के साथ जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह से मुलाकात की। बैठक के दौरान आधुनिक कृत्रिम हाथ का लाइव प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें उसकी कार्यप्रणाली और उपयोगिता को विस्तार से समझाया गया।
प्रतिनिधिमंडल में अंकित जैन, शमी लांबेकर और अभिषेक खरे शामिल रहे। वहीं निशक्त जन सेवा संस्थान की ओर से अध्यक्ष अमृतलाल, कविता बंसल और डॉ. प्रेम सागर शर्मा उपस्थित रहे।
‘ऐसी तकनीक दिव्यांगजनों के जीवन में बदलाव लाएगी’
प्रदर्शन देखने के बाद जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि आधुनिक तकनीक आधारित ऐसे उपकरण दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने इस सामाजिक अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।
शिविर में भोजन सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं रहेंगी उपलब्ध
निशक्त जन सेवा संस्थान के अध्यक्ष अमृतलाल ने बताया कि अक्टूबर में आयोजित होने वाले इस विशेष शिविर में चयनित 100 लाभार्थियों को पूरी तरह नि:शुल्क आधुनिक कृत्रिम हाथ लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि शिविर के दौरान भोजन सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी संस्था की ओर से उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि लाभार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
पात्र दिव्यांगजन जल्द कराएं पंजीकरण
संस्थान ने ऐसे सभी दिव्यांगजनों से जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की अपील की है, जिनका हाथ दुर्घटना, बीमारी या अन्य कारणों से प्रभावित हुआ है और जिन्होंने अभी तक अपना पंजीकरण नहीं कराया है। समय रहते पंजीकरण कराने पर चयन प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
पंजीकरण एवं जानकारी के लिए संपर्क करें
अधिक जानकारी या पंजीकरण के लिए इच्छुक दिव्यांगजन अथवा उनके परिजन निम्नलिखित मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं—
- 9837009375
- 9897855607
- 7906134930
समाज से भी सहयोग की अपील
निशक्त जन सेवा संस्थान ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई ऐसा दिव्यांगजन है, जिसने किसी कारणवश अपना हाथ खो दिया है, तो उसे इस नि:शुल्क शिविर की जानकारी अवश्य दें। एक छोटी-सी सूचना किसी व्यक्ति के जीवन में नया आत्मविश्वास, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का मार्ग खोल सकती है। जिला प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की यह संयुक्त पहल न केवल आधुनिक तकनीक को जरूरतमंदों तक पहुंचाने का प्रयास है, बल्कि समाज में समावेशिता और संवेदनशीलता को भी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
