3

Recent News

Online Betting: यूपी के झाँसी में 100 करोड़ का सट्टा सिंडिकेट फूटा, भाजपा नेता समेत 9 फरार, निकला दुबई कनेक्शन..

Online Betting: उत्तर प्रदेश के झांसी में ऑनलाइन सट्टे के बड़े नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। इस गिरोह…

Police Encounter: देहरादून में मारा गया यूपी का बदमाश, एक भाई का पहले हुआ एनकाउंटर, 1100 करोड़ का चक्कर क्या?

Police Encounter: उत्तर प्रदेश के शामली जिले के गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के गांव बुंटा निवासी अकरम को उत्तराखंड के देहरादून में…

Crime News: यूपी के मिर्ज़ापुर में पुलिस चौकी पर भीड़ का हमला, सिपाही को घसीटकर पीटा.. प्रभारी की वर्दी फाड़ी

Crime News: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली बड़ी घटना सामने आई है। शहर कोतवाली क्षेत्र…

Latest Hindi News: एकसाथ जलीं 16 लाशें, 1 चिता पर 4 महिलाएं.. कई गाँव में पसरा मातम, 6 बच्चे भी शामिल..

Latest Hindi News: मध्य प्रदेश के धार जिले से एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। मजदूरों…

Crime News: CM के जिले में सनसीखेज वारदात! सूखे नाले में दफन मिली जींस-टॉप पहनी महिला और बच्चे की लाश..

Crime News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। गुलरिहा इलाके में सूखे…

3

Recent News

Online Betting: उत्तर प्रदेश के झांसी में ऑनलाइन सट्टे के बड़े नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। इस गिरोह…

Police Encounter: उत्तर प्रदेश के शामली जिले के गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के गांव बुंटा निवासी अकरम को उत्तराखंड के देहरादून में…

Crime News: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली बड़ी घटना सामने आई है। शहर कोतवाली क्षेत्र…

Latest Hindi News: मध्य प्रदेश के धार जिले से एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। मजदूरों…

Crime News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। गुलरिहा इलाके में सूखे…

Breaking News

जानिए देवों के देव महादेव शिव शंकर जी को क्यों कहा गया नटराज – नृत्य से खुश हुआ था देवलोक

भोलेनाथ ने तांडव नृत्य के बाद रची थी रास लीला – फिर ब्रज में लिया था अवतरण और फिर आगे जानिए 
 
 
Dharmik – भक्तों और देवी सज्जनों क्या आप जानते हैं कि देवों के देव महादेव शिव शंकर को और राधा रानी प्रसन्न भगवान श्री कृष्ण यानी दोनों भगवान को नटराज क्यों कहा जाता हैं। अगर नहीं जानते हैं तो हम आपको इस कथा से परिचित कराएंगे और बताएंगे भगवान शिव जी की एक लीला। 
 
 
शिव जी ने किया था तांडव नृत्य 
 
 
एक बार की बात है ‘नटराज’ भगवान शिव के तांडव नृत्य में सम्मिलित होने के लिए समस्त देवगण कैलाश पर्वत पर उपस्थित हुए। जगत जननी माता गौरी वहां दिव्य रत्न सिंहासन पर आसीन होकर अपनी अध्यक्षता में तांडव का आयोजन कराने के लिए उपस्थित थीं। देवर्षि नारद भी उस नृत्य कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए लोकों का परिभ्रमण करते हुए वहां आ पहुंचे थे। थोड़ी देर में भगवान शिव ने भावविभोर होकर तांडव नृत्य प्रारंभ कर दिया।
 
 
देव लोक में बजने लगे थे मृदंग 
 
 
समस्त देवगण और देवियां भी उस नृत्य में सहयोगी बनकर विभिन्न प्रकार के वाद्य बजाने लगे। वीणा वादिनी मां सरस्वती वीणा वादन करने लगीं, विष्णु भगवान मृदंग बजाने लगे, देवराज इन्द्र वंशी बजाने लगे, ब्रह्माजी हाथ से ताल देने लगे और लक्ष्मीजी गायन करने लगीं। अन्य देवगण, गंधर्व, किन्नर, यक्ष, उरग, पन्नग, सिद्ध, अप्सराएं, विद्याधर आदि भाव-विह्वल होकर भगवान शिव के चतुर्दिक खड़े होकर उनकी स्तुति में तल्लीन हो गए।
 
 
नृत्य में लीन हुए थे शिव जी 
 
 
भगवान शिव ने उस प्रदोषकाल में उन समस्त दिव्य विभूतियों के समक्ष अत्यंत अद्भुत, लोक विस्मयकारी तांडव नृत्य का प्रदर्शन किया। उनके अंग-संचालन-कौशल, मुद्रा-लाघव, चरण, कटि, भुजा, ग्रीवा के उन्मत्त किंतु सुनिश्चित विलोल-हिल्लोल के प्रभाव से सभी के मन और नेत्र दोनों एकदम चंचल हो उठे।
 
 
तब कहा गया नटराज 
 
सभी ने नटराज भगवान शंकरजी के उस नृत्य की सराहना की। भगवती महाकाली तो उन पर अत्यंत ही प्रसन्न हो उठीं। उन्होंने शिवजी से कहा- ‘भगवन्! आज आपके इस नृत्य से मुझे बड़ा आनंद हुआ है, मैं चाहती हूं कि आप आज मुझसे कोई वर प्राप्त करें।’
 
 
फिर भोले ने रखी अपनी मन की बात 
 
 
उनकी बातें सुनकर लोकहितकारी आशुतोष भगवान शिव ने नारदजी की प्रेरणा से कहा- ‘हे देवी! इस तांडव नृत्य के जिस आनंद से आप, देवगण तथा अन्य दिव्य योनियों के प्राणी विह्वल हो रहे हैं, उस आनंद से पृथ्वी के सारे प्राणी वंचित रह जाते हैं। हमारे भक्तों को भी यह सुख प्राप्त नहीं हो पाता अत: आप ऐसा करिए कि पृथ्वी के प्राणियों को भी इसका दर्शन प्राप्त हो सके किंतु मैं अब तांडव से विरत होकर केवल ‘रास’ करना चाहता हूं।’
 
 
ब्रज में लिया था रूप 
 
 
भगवान शिव की बात सुनकर तत्क्षण भगवती महाकाली ने समस्त देवताओं को विभिन्न रूपों में पृथ्वी पर अवतार लेने का आदेश दिया। स्वयं वे भगवान श्यामसुंदर श्रीकृष्ण का अवतार लेकर वृंदावन धाम में पधारीं। भगवान श्री शिवजी ने ब्रज में श्री राधा के रूप में अवतार ग्रहण किया। यहां इन दोनों ने मिलकर देव दुर्लभ, अलौकिक रास नृत्य का आयोजन किया।
 
भगवान शिव की ‘नटराज’ उपाधि यहां भगवान श्रीकृष्ण को प्राप्त हुई।