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UP News: 185 साल पुरानी ‘नूरी’ मस्जिद पर चला बुलडोज़र, 25000 लोग हाउस अरेस्ट.. 500m एरिया सील

UP News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में स्थित 185 साल पुरानी नूरी मस्जिद का कुछ हिस्सा आज प्रशासन द्वारा ढहा दिया गया। यह कार्रवाई बांदा-बहराइच हाईवे के चौड़ीकरण के चलते की गई, जिसमें 5 बुलडोजर की मदद से करीब 7 घंटे तक अतिक्रमण हटाने का काम चला। इस दौरान मस्जिद का एक हिस्सा भी तोड़ा गया। इस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि मस्जिद का हिस्सा हाईवे के रास्ते में आ रहा था, और इसके लिए पहले ही मस्जिद कमेटी को नोटिस जारी किया गया था।

मस्जिद के हिस्से का अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई

फतेहपुर के ललौली कस्बे में स्थित नूरी मस्जिद के अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई सुबह 8 बजे शुरू हुई, जो दोपहर 3 बजे तक चली। कार्रवाई के दौरान कई पुलिस बल और आरएएफ की टीम तैनात रही। 25000 से ज्यादा लोगों को हाउस अरेस्ट किया गया और 500 मीटर का एरिया सील कर दिया गया था। ड्रोन कैमरे से भी इलाके की निगरानी की जा रही थी। यह एक संवेदनशील मामला था और प्रशासन ने इसे पूरी सतर्कता के साथ संभाला।

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मस्जिद की कमेटी ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका

17 अगस्त को पीडब्ल्यूडी ने मस्जिद कमेटी को नोटिस भेजकर 1 महीने में अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी थी। मस्जिद कमेटी ने समय मांगा था, लेकिन जब समय पूरा हुआ और अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो प्रशासन ने बुलडोजर के जरिए कार्रवाई शुरू की। मस्जिद कमेटी ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें मस्जिद के 1839 में बने होने का हवाला दिया गया था। याचिका में यह भी कहा गया था कि मस्जिद पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया गया है। हालांकि, 6 दिसंबर को होने वाली सुनवाई टल गई थी, और अब 13 दिसंबर को फिर से सुनवाई होगी।

प्रशासन का पक्ष और मस्जिद का हिस्सा

फतेहपुर के एडीएम अवनीश त्रिपाठी के अनुसार, मस्जिद का जितना हिस्सा अतिक्रमण के दायरे में था, वही तोड़ा गया है। पीडब्ल्यूडी के एई एके गुप्ता ने बताया कि सड़क के दोनों ओर 12 मीटर का हिस्सा अतिक्रमण के दायरे में था, लेकिन पूरे मस्जिद को नहीं तोड़ा जाएगा। मस्जिद के टूटे हुए हिस्से को नापकर फिर से सड़क के लिए लिया जाएगा।

क्षेत्रीय लोगों का बयान और सुरक्षा

मस्जिद के आसपास के लोग और स्थानीय नेता इस कार्रवाई को लेकर चिंतित हैं। हालांकि, प्रशासन ने पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ कार्रवाई की है, और अब भी इलाके में पुलिस बल तैनात हैं।

13 दिसंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई

यह मामला एक संवेदनशील और जटिल स्थिति को दर्शाता है, जहां एक ओर हाईवे चौड़ीकरण के लिए जरूरी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर 185 साल पुरानी धार्मिक संरचना का हिस्सा ढहाया जा रहा है। यह कार्रवाई प्रशासन की ओर से की गई, लेकिन इसे लेकर धार्मिक और सामुदायिक दृष्टिकोण से कई सवाल उठाए जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि आगामी 13 दिसंबर को हाईकोर्ट इस मामले में क्या निर्णय लेता है।