Mahakumbh 2025: प्रयागराज में महाकुंभ के शुभ अवसर पर एक ऐतिहासिक रंगोली तैयार की जा रही है, जो अपनी भव्यता और क्षेत्रफल के कारण दुनिया की सबसे बड़ी रंगोली बन सकती है। इस रंगोली को बनाने में हजारों लोगों का सहयोग लिया जा रहा है और इसे एक अद्भुत कला के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
5000 वर्ग फुट में फैली होगी रंगोली
यह विशाल रंगोली 5000 वर्ग फुट के क्षेत्रफल में बनाई जा रही है। इतनी बड़ी रंगोली न केवल कला का प्रतीक है बल्कि यह प्रयागराज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को भी दर्शाती है।
11 टन रंगों का होगा इस्तेमाल
इस रंगोली को सजाने के लिए 11 टन रंगों का उपयोग किया जाएगा। हर रंग प्रयागराज के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है। रंगोली में प्रयागराज के घाट, मंदिर, रंग-बिरंगी नौकाओं, और साधु-संतों के चित्रों को शामिल किया जाएगा।
प्रयागराज की धरोहर को करेगी उजागर
इस रंगोली के माध्यम से प्रयागराज के प्रसिद्ध घाट, मंदिरों की सुंदरता, और वहां की पवित्रता को दर्शाया जाएगा। इसमें काशी, संगम और गंगा-यमुना की मिलन स्थली को खूबसूरत रंगों से उकेरा जाएगा। साधु-संतों की पारंपरिक वेशभूषा और उनकी आध्यात्मिकता को भी इस रंगोली का हिस्सा बनाया जाएगा।
रंगोली बनाने में जुटे हजारों कलाकार
इस अद्भुत कला को साकार करने के लिए हजारों कलाकार मिलकर मेहनत कर रहे हैं। रंगोली बनाने का यह प्रयास महाकुंभ के महत्व को बढ़ाने और इसे विश्वस्तरीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश
यह रंगोली न केवल एक कलाकृति होगी, बल्कि यह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संदेश भी प्रसारित करेगी। महाकुंभ जैसे पवित्र अवसर पर यह रंगोली भारतीय परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास है।
दुनिया भर से लोग करेंगे प्रशंसा
महाकुंभ में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह रंगोली आकर्षण का केंद्र बनेगी। यह न केवल प्रयागराज, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाने का एक अनूठा माध्यम होगी।
निष्कर्ष
प्रयागराज में बन रही यह रंगोली महाकुंभ के महत्व को और अधिक विशेष बनाएगी। यह कला, धर्म और संस्कृति का संगम है, जो पूरी दुनिया को भारतीय परंपराओं की भव्यता से परिचित कराएगी।
रिपोर्ट – अजय कुमार सरोज

