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स्कूल वैन में मौत का सफर! पीलीभीत एआरटीओ का बड़ा एक्शन

स्कूल वैन में खतरे की सवारी! एआरटीओ वीरेंद्र सिंह का बड़ा अभियान – फिटनेस रहित टेंपो और ओवरलोड ईको गाड़ियां सीज

अजय देव वर्मा

इस लेख को प्रस्तुत करने का मेरा उद्देश्य केवल समाचार साझा करना नहीं, बल्कि उस सामाजिक और मानवीय जिम्मेदारी को उजागर करना है जिसे हम अक्सर रोजमर्रा की भागदौड़ में नजरअंदाज कर देते हैं। क्या हम अपने बच्चों की जान को केवल कुछ रुपयों की बचत के लिए खतरे में डाल सकते हैं? यह लेख उन सभी अभिभावकों, स्कूल प्रबंधनों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक आईना है, जो ‘चलता है’ की मानसिकता में जी रहे हैं। अब वक्त है जागने का, समझने का और एकजुट होकर बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के लिए खड़े होने का।

स्कूल वैन में मौत का सफर! बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं – प्रशासन ने कसी नकेल

जनपद पीलीभीत में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक निर्णायक कदम उठाते हुए एआरटीओ वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। बीसलपुर रोड एवं बरेली रोड पर अनाधिकृत रूप से संचालित हो रहे स्कूल वाहनों तथा ओवरलोड मालवाहनों के खिलाफ यह सख्त कार्यवाही की गई। बच्चों की जान जोखिम में डालने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध सीधी कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं बची है।

 फिटनेस रहित टेंपो में ठूंसे गए 12 मासूम बच्चे, वाहन सीज

अभियान के दौरान एक बेहद जर्जर टेंपो को पकड़ा गया, जिसकी फिटनेस, परमिट, टैक्स सभी समाप्त हो चुके थे। हैरानी की बात यह रही कि यह टेंपो 12 स्कूली बच्चों को ठूंस दिया  था, जो कि सुरक्षा मानकों के घोर उल्लंघन की श्रेणी में आता है। प्रशासन ने इस वाहन को तत्काल सीज करते हुए थाना बरखेड़ा में जमा करा दिया।

स्कूल वैन में मौत का सफर! निजी ईको वाहन बना ‘स्कूल वैन’, क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर कर रहे थे परिवहन

दो ईको गाड़ियां जो कि सिर्फ निजी प्रयोग के लिए पंजीकृत थीं, लेकिन उन्हें व्यवसायिक उद्देश्य से स्कूली बच्चों को ढोने में लगाया गया था। इतना ही नहीं, इन वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चे बैठे पाए गए, जो कि एक गहरी लापरवाही को दर्शाता है। आरटीओ की टीम ने इन वाहनों को भी सीज कर थाना बरखेड़ा भेजा।

स्कूल वैन में मौत का सफर! ओवरलोडिंग में फंसे भारी वाहन – फिटनेस और परमिट भी फेल

स्कूल वाहनों के साथ-साथ, ओवरलोड और बिना परमिट चलने वाले मालवाहनों पर भी शिकंजा कसा गया। एक वाहन जिसकी फिटनेस और परमिट दोनों समाप्त थे, उसे जब्त किया गया। साथ ही दो अन्य भारी वाहन अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक माल ढोते पाए गए। तीनों वाहन सीज कर ललौड़ीखेड़ा पुलिस चौकी में खड़े कराए गए।

 कुल ₹1.98 लाख का जुर्माना, सरकार ने दिखाई ज़ीरो टॉलरेंस नीति

इस सघन जांच अभियान में कुल ₹1.98 लाख का प्रसमन शुल्क (चालान) अधिरोपित किया गया। इससे साफ है कि शासन-प्रशासन अब इस मुद्दे पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए स्कूल वाहन और सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति बेहद गंभीर है।

आरटीओ की अपील – “अपने बच्चों की जान जोखिम में न डालें”

एआरटीओ वीरेंद्र सिंह ने सभी स्कूल प्रबंधनों एवं अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को ऐसे अवैध, असुरक्षित और फिटनेस विहीन वाहनों में स्कूल ना भेजें। सिर्फ उन्हीं वाहनों का चयन करें जो परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा करते हैं। यह एक सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी है, जिससे कोई भी अछूता नहीं रह सकता।

आरटीओ की मंशा: हर बच्चे की सुरक्षित यात्रा प्राथमिकता

इस अभियान के पीछे आरटीओ वीरेंद्र सिंह की स्पष्ट और दूरदर्शी मंशा यही है कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए। उनका मानना है कि स्कूल जाने वाले मासूम बच्चे सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भविष्य की नींव हैं, और उन्हें हर हाल में सुरक्षित, फिट और कानूनी रूप से अधिकृत वाहनों में ही लाना-ले जाना चाहिए। यह कार्रवाई किसी एक दिन की सख्ती नहीं, बल्कि एक सतत चेतावनी है उन वाहन स्वामियों, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के लिए जो लापरवाही को आदत बना चुके हैं। आरटीओ का यह रुख साफ दिखाता है कि अब ‘चलता है’ की सोच को ‘रोकना ज़रूरी है’ की नीति से बदला जा रहा है।

 यह सिर्फ चेकिंग नहीं, बच्चों की सुरक्षा के लिए एक जनजागरण है

इस अभियान को सिर्फ चालान या सीज की प्रक्रिया समझना भूल होगी। यह एक सख्त चेतावनी और जनजागरण का प्रयास है। आए दिन देशभर में हो रही स्कूली वाहन दुर्घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि हम बच्चों की सुरक्षा को कितनी प्राथमिकता देते हैं? यह प्रशासनिक कार्रवाई उस दिशा में एक मजबूत कदम है जिसमें बच्चों को सस्ती सुविधा नहीं, सुरक्षित यात्रा की गारंटी चाहिए।

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