जम्मू-कश्मीर से मुंबई तक बारिश का कहर, बादल फटना और बाढ़ ने मचाई तबाही
Cloudburst in Jammu Kashmir: मानसून का यह दौर देश के कई हिस्सों में तबाही का रूप ले चुका है। जम्मू-कश्मीर से लेकर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और मुंबई तक बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। कहीं बादल फटने से घर और बस्तियां मलबे में तब्दील हो गईं, तो कहीं नदियां उफान पर आकर गांवों को जलमग्न कर रही हैं। स्थिति यह है कि बचाव दल दिन-रात राहत कार्यों में जुटे हुए हैं, जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और भारी बारिश की चेतावनी दी है।
जम्मू-कश्मीर: चार दिन में दूसरी बार बादल फटना
जम्मू-कश्मीर में चार दिन के भीतर दूसरी बार बादल फटने की घटना सामने आई है। कठुआ जिले के मथरे चक गांव में रविवार सुबह अचानक बादल फट गया, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई और कई घर मलबे में तब्दील हो गए। पास के जोद गांव में भी लगातार बारिश के चलते कई मकान ढह गए हैं। इस त्रासदी में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि छह लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज बारिश और अचानक आई तबाही ने सब कुछ पलभर में खत्म कर दिया। प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचकर मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन लगातार बारिश और नदियों के उफान की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतें आ रही हैं।
Cloudburst in Jammu Kashmir: किश्तवाड़ की त्रासदी अब भी ताजा
कठुआ से पहले किश्तवाड़ जिले के चोसोटी गांव में बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई थी। वहां अचानक आए मलबे और तेज पानी के बहाव में कई घर, दुकानें और अस्थायी ढांचे बह गए। दर्जनों लोग मौत का शिकार हो गए, जबकि सैकड़ों घायल और लापता बताए जा रहे हैं। बचने वाले लोग बताते हैं कि सब कुछ कुछ ही मिनटों में खत्म हो गया और उन्हें भागने का मौका तक नहीं मिला। आज भी इस घटना का मंजर लोगों के दिलों में दहशत पैदा कर रहा है।
Cloudburst in Jammu Kashmir: 17 से 19 अगस्त तक बारिश का अलर्ट
जम्मू-कश्मीर में मौसम विभाग ने 17 से 19 अगस्त तक तेज बारिश की आशंका जताई है। जम्मू, रियासी, उधमपुर, राजौरी, पुंछ, सांबा, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़, रामबन और कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में बादल फटने और भूस्खलन की संभावना बताई गई है। इस चेतावनी से साफ है कि हालात और गंभीर हो सकते हैं और प्रशासन को पहले से ही अलर्ट मोड पर रहना होगा। पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
मध्य प्रदेश में नदियों का उफान
जम्मू-कश्मीर की तरह मध्य प्रदेश में भी बारिश से हालात बिगड़ रहे हैं। बड़वानी जिले के राजपुर क्षेत्र में नदियां और नाले उफान पर हैं। यहां तक कि नगर पालिका के उपाध्यक्ष की कार भी बह गई। आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में सामान्य तौर पर अगस्त में 939 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस बार अब तक करीब 787 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। यह कुल बारिश का लगभग 84 प्रतिशत है, जिससे साफ है कि बरसात अभी और कहर ढा सकती है।
उत्तर प्रदेश में बाढ़ जैसे हालात
उत्तर प्रदेश के करीब 20 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। फतेहपुर में गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिसके चलते 10 से अधिक गांवों में पानी भर गया है। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में केवल 0.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य 8.8 मिलीमीटर होती है। यह सामान्य से 91 प्रतिशत कम है, लेकिन 1 जून से अब तक कुल 516 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से करीब 6 प्रतिशत ज्यादा है। इसका मतलब यह है कि बारिश असमान तरीके से हो रही है और जहां पानी गिर रहा है, वहां तबाही मचा रहा है।
Cloudburst in Jammu Kashmir: मुंबई और कोंकण क्षेत्र में रेड अलर्ट
मुंबई में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। विक्रोली इलाके में शनिवार को हुई भूस्खलन की घटना में दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए। रविवार को भी मुंबई में लगातार बारिश जारी रही, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी रही। रायगढ़ जिले की अंबा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि रत्नागिरी जिले की जगबुडी और कोडवली नदियां भी चेतावनी स्तर पार कर चुकी हैं। कोंकण क्षेत्र में भारी बारिश ने सड़क और रेल यातायात दोनों को प्रभावित किया है।
देश के कई राज्यों में मानसून ने तबाही का रूप ले लिया है। जम्मू-कश्मीर में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं लोगों के जीवन पर कहर बनकर टूटी हैं, तो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बाढ़ और भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए भी चेतावनी जारी की है, ऐसे में प्रशासन और आम जनता दोनों को सतर्क रहना होगा। पहाड़ी और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना जरूरी है ताकि किसी भी तरह की जनहानि को टाला जा सके।