लखीमपुर खीरी में दिल दहला देने वाला हादसा: अनियंत्रित कार 30 फीट गहरी नदी में समाई, शादी से लौट रहे पाँच लोगों की मौके पर मौत
लखीमपुर खीरी—मंगलवार देर रात जनपद में ऐसा भयावह हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को शोक और सदमे में डुबो दिया। शादी की दावत से घर बापस लौट रहे लोग काल के गाल में समा गए । रात के सन्नाटे में दौड़ती एक कार अचानक बेकाबू हुई 30 गहरी नदी में जा गिरी । पाँच जिंदगियाँ कुछ ही पलों में बुझ गईं… परिवारों के सपने, हंसी-खुशी और उम्मीदें सब ताश के पत्तों की तरह बिखर गईं।
शादी से घर लौट रही कार अचानक फिसली, सीधे 30 फीट नीचे नदी में गिर गई
यह दर्दनाक घटना लखीमपुर खीरी के पढुआ थाना क्षेत्र के ढखेरवा–गिरजापुरी मार्ग पर हुई, जहां बीती देर रात एक आल्टो कार अनियंत्रित होकर सीधे करीब 30 फीट नीचे बह रही नदी में जा गिरी।
रात का अंधेरा घना था, सड़क संकरी और मोड़ खतरनाक—बस एक चूक और जिंदगी का सफर वहीं थम गया।
कार में सवार सभी लोग शादी समारोह से अपने घर लौट रहे थे। ग्रामीणों के मुताबिक मोड़ अचानक आता है और रात में दृश्यता बेहद कम रहती है। कार सीधा पानी में जा समाई और गाड़ी में बैठे लोग बाहर निकल भी नहीं पाए।
ग्रामीणों की मदद से निकाले गए लोग, अस्पताल ले जाते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
घटना की भनक लगते ही गांव के लोग टॉर्च लेकर नदी किनारे दौड़े। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
कुछ ही देर में पढुआ थाना पुलिस पहुंची और ग्रामीणों की मदद से कार में फंसे पाँच लोगों को बाहर निकाला गया।
सभी को गंभीर हालत में रमियाबेहड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने पाँचों को मृत घोषित कर दिया।
कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त थी और नदी का पानी गाड़ी में भर जाने से किसी के बचने की उम्मीद ही नहीं बची थी।
सभी मृतक बहराइच निवासी, गांव में मातम पसरा
हादसे में जान गंवाने वाले पाँचों की पहचान इस प्रकार हुई—
जितेंद्र
घनश्याम
लाल जी
सुरेश
फुरचाली अहमद
ये सभी पड़ोसी जनपद बहराइच के रहने वाले थे और एक ही इलाके के परिचित लोग थे।
शादी की ख़ुशी से लौटने वाले ये पाँच साथी कुछ घंटे बाद अपने गांव वापस शव के रूप में पहुंचे।
गांव में मातम का ऐसा माहौल बना कि हर आंख नम हो गई।
घर की चौखट पर माताओं की चीखें, बच्चों की पुकार और परिवार का दर्द देखने वालों का दिल दहला गया।
ग्रामीण बोले—यह मोड़ मौत का मोड़, सुरक्षा व्यवस्था ना होने से लगातार हादसे
स्थानीय लोगों के अनुसार—
सड़क किनारे कोई सुरक्षा रेलिंग नहीं है।
मोड़ अचानक आता है।
रात को घना अंधेरा रहता है।
पहले भी कई दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं।
ग्रामीणों ने इसे “मौत का मोड़” बताते हुए कहा कि यदि सुरक्षा रेलिंग होती तो पाँच लोगों की जान शायद बच सकती थी।
लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने अभी तक मार्ग को सुरक्षित नहीं बनाया है।
प्रशासन को चेतावनी—इस मार्ग को तत्काल सुरक्षित किया जाए
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम भी है।
सड़क पर सुरक्षा रेलिंग लगाई जाए
रात में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की जाए
मोड़ पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएँ
क्योंकि हर गुजरते वाहन के साथ यह मोड़ एक नई मौत को बुलावा देता है।
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