UP Election 2027: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को लखनऊ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वे असली संत से आशीर्वाद लेने आए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ धार्मिक शिष्टाचार नहीं बल्कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा की बदलती रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है।
शंकराचार्य से लिया आशीर्वाद
लखनऊ में हुई इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि वे पूज्य शंकराचार्य जी से आशीर्वाद लेने आए थे।
उन्होंने कहा कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले साधु-संतों का आशीर्वाद मिलना बहुत महत्वपूर्ण होता है।
अखिलेश यादव ने कहा:
“आज मैंने पूज्यनीय शंकराचार्य जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले अगर साधु-संतों का आशीर्वाद मिल जाए तो नकली संतो का अंत हो जाएगा।”
“पूजनीय शंकराचार्य जी का आशीर्वाद मिलने से नकली संतों का अंत होने जा रहा है।”
– माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी pic.twitter.com/y61HfLCPy5
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) March 12, 2026
सोशल मीडिया पर भी किया पोस्ट
मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर भी एक पोस्ट साझा किया।
उन्होंने लिखा:
“जिनके ध्यान मात्र से मिलता आशीर्वाद है,
उनके साक्षात् दर्शन का मिला सौभाग्य है।
सच्चे संत का सम्मान ही सनातन का सम्मान है।”
इस पोस्ट को भी राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
गाय की सेवा को लेकर भी दिया बयान
मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने गाय की सेवा का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब गाय की सेवा को लेकर कई फैसले लिए गए थे।
अखिलेश ने कहा कि भविष्य में भी अगर उनकी सरकार बनती है तो वे गाय की सेवा और संरक्षण के लिए काम करेंगे।
पाप और पुण्य की लड़ाई का भी किया जिक्र
अखिलेश यादव ने अपने बयान में आध्यात्मिक संदर्भ देते हुए कहा कि हर व्यक्ति के अंदर अच्छा और बुरा दोनों तरह के विचार होते हैं।
उन्होंने कहा कि समाज में पाप और पुण्य के बीच लगातार संघर्ष चलता रहता है और आज जरूरत है कि हर व्यक्ति के अंदर सुदर्शन चक्र की तरह शक्ति हो, जिससे समाज में फैले पाप को खत्म किया जा सके।
2027 चुनाव से पहले बदली हुई रणनीति?
राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं।
अब तक समाजवादी पार्टी की राजनीति को अक्सर मुस्लिम वोट बैंक और पारंपरिक यादव वोट बैंक पर केंद्रित माना जाता रहा है।
लेकिन पिछले दो विधानसभा चुनावों में लगातार हार के बाद सपा नेतृत्व को शायद यह समझ आ गया है कि उत्तर प्रदेश में केवल एक वर्ग के वोट से सत्ता हासिल करना मुश्किल है।
हिंदू वोट को साधने की कोशिश
इसी वजह से अब सपा की राजनीति में कुछ बदलाव दिखाई देने लगे हैं।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात, गाय की सेवा की बात करना और सनातन से जुड़ी भाषा का इस्तेमाल करना कई लोगों को सपा की नई रणनीति का हिस्सा लगता है।
कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हिंदुत्व राजनीति की काट के रूप में भी देख रहे हैं।
योगी बनाम अखिलेश की नई राजनीतिक जंग
उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ की पहचान एक हिंदुत्ववादी नेता के रूप में बनी हुई है।
ऐसे में सपा की तरफ से धार्मिक संतों के साथ जुड़ाव दिखाना और सनातन की भाषा बोलना राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
कई लोग इसे “योगी की काट में दूसरे संत” की रणनीति भी बता रहे हैं।
हालिया शंकराचार्य विवाद से भी जुड़ रहा मामला
गौरतलब है कि हाल ही में शंकराचार्य से जुड़ा विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में काफी चर्चा में रहा था।
उस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया था और अब अखिलेश यादव की यह मुलाकात भी उसी संदर्भ में देखी जा रही है।
2027 का चुनाव बताएगा असर
हालांकि यह रणनीति कितनी सफल होगी, इसका जवाब अभी मिलना बाकी है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इसका असली असर 2027 के विधानसभा चुनाव में ही देखने को मिलेगा, जब यह साफ होगा कि सपा की नई रणनीति वोटों में कितना बदलाव ला पाती है।