Success Story: राजस्थान के सिरोही जिले के छोटे से गांव झाड़ोली से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने हर किसी को प्रेरित कर दिया है। एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहनों ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया। यह सिर्फ सफलता नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और सपनों की जीत की कहानी है।
एक साथ तीन भाई-बहनों का RAS में चयन
सिरोही जिले के झाड़ोली गांव में इस बार जश्न का माहौल है। कारण है एक ही परिवार के तीन भाई-बहनों का RAS में चयन। यह जिले के लिए बेहद खास पल है क्योंकि संभवतः पहली बार ऐसा हुआ है जब एक ही परिवार के तीन सदस्य एक साथ इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफल हुए हैं।
तीनों ने हासिल की शानदार रैंक
इस परीक्षा में सबसे छोटे भाई परमवीर सिंह ने 24वीं रैंक हासिल की है। वहीं बहन सेजल कुंवर ने 120वीं रैंक और बड़े भाई महिपाल सिंह ने 931वीं रैंक प्राप्त की। तीनों की यह उपलब्धि न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व की बात बन गई है।
पहले से चयनित थे, फिर भी नहीं रुके
परमवीर और सेजल पहले भी RAS में चयनित हो चुके थे।
- परमवीर सिंह ने 2023 में अपने पहले प्रयास में 66वीं रैंक हासिल कर DSP पद प्राप्त किया था और फिलहाल जयपुर के OTS में ट्रेनिंग ले रहे हैं।
- सेजल कुंवर ने दूसरे प्रयास में 522वीं रैंक लाकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में प्रवर्तन निरीक्षक का पद हासिल किया और वर्तमान में जोधपुर में कार्यरत हैं।
इसके बावजूद दोनों ने बेहतर रैंक के लक्ष्य के साथ दोबारा परीक्षा दी और इस बार और बेहतर प्रदर्शन किया।
तीसरे प्रयास में महिपाल की जीत
बड़े भाई महिपाल सिंह के लिए यह सफर थोड़ा चुनौतीपूर्ण रहा। शुरुआती प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और धैर्य के साथ तीसरे प्रयास में उन्होंने RAS परीक्षा पास कर ली। उनकी कहानी साबित करती है कि असफलता सिर्फ एक पड़ाव है, मंजिल नहीं।
घर पर रहकर की तैयारी
तीनों भाई-बहनों की सफलता का सबसे खास पहलू यह है कि उन्होंने घर पर रहकर ही तैयारी की।
- पिता लालसिंह सिरोही जिले के राजपुरा बालदा गांव में द्वितीय श्रेणी शिक्षक हैं।
- माता गृहिणी हैं।
परिवार का सहयोग, अनुशासन और नियमित पढ़ाई इनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।
समाज सेवा का है लक्ष्य
परिवार के मामा और आयुर्वेद चिकित्साधिकारी उदय प्रताप सिंह के अनुसार, तीनों का लक्ष्य शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए काम करना था। यही सोच उन्हें लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित करती रही।
गांव में जश्न और प्रेरणा
तीनों भाई-बहनों की सफलता के बाद झाड़ोली गांव में उत्सव जैसा माहौल है। ग्रामीण, रिश्तेदार और शुभचिंतक लगातार उनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं। यह कहानी अब पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।