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पीलीभीत: हिंदू छात्राओं के तिलक पर आपत्ति, हिजाब पर आज़ादी, सरकारी कन्या इंटर कॉलेज में बवाल!

पीलीभीत के सरकारी कन्या इंटर कॉलेज में तिलक पर आपत्ति को लेकर विवाद गहरा गया। शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची, डीएम ने मामले की जांच के आदेश दिए।

स्कूल में तिलक लगाने पर आपत्ति का आरोप: क्या अब संस्कार भी सवालों के घेरे में हैं? शिकायत के बाद डीएम ने दिए जांच के आदेश

माथे का तिलक बना विवाद का विषय, पूरे मामले ने खड़े कर दिए बड़े सवाल

पूरनपुर के पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज से सामने आए एक विवाद ने शिक्षा, संस्कार और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आरोप है कि तिलक लगाकर विद्यालय पहुंची एक छात्रा को तिलक हटाने के लिए कहा गया और उसका माथा धुलवाया गया। शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और पीलीभीत के जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए। अब प्रशासनिक जांच यह तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है, लेकिन इस घटना ने समाज के एक बड़े वर्ग को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या भारतीय परंपराओं और पारिवारिक संस्कारों की सामान्य अभिव्यक्ति भी अब विवाद का विषय बनने लगी है?

शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, संस्कार भी उतने ही महत्वपूर्ण

भारतीय समाज में हमेशा से यह माना जाता रहा है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों को मजबूत करना भी है। परिवार अपने बच्चों को सम्मान, अनुशासन, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास करते हैं। ऐसे में यदि किसी छात्रा के माथे पर लगे तिलक को लेकर विवाद खड़ा होता है, तो स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में सवाल उठते हैं कि क्या सांस्कृतिक पहचान के सामान्य प्रतीकों को भी संदेह की नजर से देखा जाना चाहिए? यही कारण है कि यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।

तिलक पर कथित आपत्ति और हिजाब को लेकर उठे सवाल

शिकायतकर्ता का आरोप है कि पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, पूरनपुर (पीलीभीत) में हिंदू छात्राएं यदि तिलक लगाकर विद्यालय पहुंचती हैं तो उन्हें तिलक हटाने के लिए कहा जाता है और कुछ मामलों में उनका माथा तक धुलवाने की बात सामने आई है। वहीं शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि हिजाब पहनकर आने वाली छात्राओं पर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई जाती। इसी आरोप ने पूरे विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। समाज के एक वर्ग का कहना है कि यदि विद्यालय में किसी प्रकार का ड्रेस कोड या धार्मिक प्रतीकों को लेकर नियम हैं तो उनका पालन सभी छात्रों पर समान रूप से होना चाहिए। लोगों का सवाल है कि यदि एक प्रतीक पर आपत्ति जताई जाती है और दूसरे को स्वीकार किया जाता है, तो इससे निष्पक्षता और समानता को लेकर प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक है। हालांकि पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, पूरनपुर से जुड़े इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

शिकायत में लगाए गए कई अन्य गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में केवल तिलक विवाद का ही उल्लेख नहीं है, बल्कि विद्यालय प्रशासन पर धार्मिक आधार पर भेदभाव के साथ-साथ , कथित वित्तीय अनियमितताओं, छात्राओं से अवैध वसूली, मिड डे मील योजना में गड़बड़ी, सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

डीएम के आदेश के बाद जांच पर टिकीं निगाहें

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं। अब सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो क्या कार्रवाई की जाएगी।

सवाल केवल एक विद्यालय का नहीं, सोच का भी है

यह विवाद केवल एक छात्रा, एक शिक्षक या एक विद्यालय तक सीमित नहीं है। यह उस व्यापक बहस से जुड़ा हुआ है जिसमें शिक्षा, संस्कृति, समानता और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसलिए जरूरी है कि जांच निष्पक्ष हो, तथ्य सामने आएं और जो भी सत्य हो, वह बिना किसी पूर्वाग्रह के समाज के सामने रखा जाए। क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य विभाजन नहीं, बल्कि जागरूक और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है।