Swara Bhasker एक बार फिर अपने बयान को लेकर सोशल मीडिया पर घिर गई हैं। दिल्ली में हुए एक इवेंट के दौरान स्वरा ने फिल्म ‘पद्मावत’ के जौहर सीन पर बात की और 2018 में फिल्म के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को लिखे अपने ओपन लेटर का भी जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने जौहर करने वाली महिलाओं और रेप सर्वाइवर के बीच तुलना करते हुए ऐसे सवाल उठा दिए, जिन पर सोशल मीडिया यूजर्स भड़क गए।
800 महिलाओं के जौहर वाले सीन पर स्वरा ने उठाए सवाल
स्वरा ने ‘पद्मावत’ में दिखाए गए करीब 800 महिलाओं के जौहर वाले सीन पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि अगर कोई महिला रेप की शिकार हो जाए तो क्या उसकी जिंदगी खत्म समझी जानी चाहिए? उन्होंने सवाल किया कि अपनी इज्जत बचाने के लिए जान देना आखिर कितना सही है?
स्वरा यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या रेप होना किसी महिला की जिंदगी का अंत है?
सवाल पूछना गलत नहीं है, लेकिन जिस ऐतिहासिक घटना को लेकर ये सवाल किए गए, उसे लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि शायद इतिहास को सिर्फ आज के नजरिए से देखने के बजाय उस दौर की परिस्थितियों को भी समझने की जरूरत है।
Swara Bhasker on Padmaavat:
🗣️ “Hindu women who committed Jauhar or suicide were COWARDS> They chose to die rather than live as concubines of Muslim invaders.” pic.twitter.com/Um5XGWGvdy
— The Analyzer (News Updates🗞️) (@Indian_Analyzer) September 1, 2026
सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर सुनाई खरी-खोटी
स्वरा के बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स नाराज नजर आए। लोगों का कहना था कि जौहर जैसी ऐतिहासिक प्रथा को आज के नजरिए से देखना और उसी आधार पर उसका अर्थ निकालना ठीक नहीं है।
एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि उन महिलाओं ने अपने सम्मान को बचाने के लिए जौहर किया था, लेकिन स्वरा को शायद यह बात समझ नहीं आएगी।
यानी इतिहास की पूरी परिस्थिति समझने के बजाय आज के नजरिए से सवाल खड़ा कर देना आसान है—लेकिन इतिहास इतना सीधा नहीं होता।
‘राजस्थान के लिए जौहर सिर्फ इतिहास नहीं’
एक दूसरे यूजर ने स्वरा को जवाब देते हुए लिखा कि राजस्थान के लिए जौहर सिर्फ इतिहास का एक चैप्टर नहीं है, बल्कि शौर्य और स्वाभिमान का हिस्सा है।
यूजर ने आगे तंज करते हुए कहा कि जिसकी सोच हर चीज को सिर्फ ‘मेरी बॉडी, मेरी चॉइस’ तक समझती है, वह जौहर के पीछे की हिम्मत और मर्यादा को कैसे समझेगी?
यह टिप्पणी सीधे उस नजरिए पर निशाना थी, जिसमें यूजर के मुताबिक जौहर को सिर्फ व्यक्तिगत पसंद या शरीर से जुड़े आधुनिक अधिकारों के नजरिए से देखा जा रहा है।
‘जौहर जानबूझकर लिया गया कदम था’
एक अन्य यूजर ने स्वरा को अपने फैक्ट्स ठीक करने की सलाह दी। यूजर ने कहा कि जौहर जानबूझकर लिया गया कदम था, ताकि महिलाएं खिलजी की गुलामी और सेक्सुअल वॉयलेंस से बच सकें।
यूजर ने तंज करते हुए कहा कि ‘लेकिन स्वरा को इतिहास कहां समझ आता है।’
यही लाइन सोशल मीडिया पर चल रही नाराजगी को समझने के लिए काफी है। लोगों की आपत्ति यह है कि जौहर को सिर्फ आज के नजरिए से देखने से उस दौर की परिस्थितियां, युद्ध और महिलाओं के सामने मौजूद खतरे पूरी तरह गायब हो जाते हैं।
भंसाली को 2018 में लिखा था ओपन लेटर
वैसे स्वरा के लिए इस तरह की ट्रोलिंग कोई नई बात नहीं है। वह अपने कई बयानों को लेकर पहले भी आलोचना झेल चुकी हैं।
दिल्ली के इवेंट में बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि ‘पद्मावत’ देखने के बाद उन्होंने फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली को एक ओपन लेटर लिखा था।
‘महिलाओं को वजाइना तक सीमित कर दिया’
अपने उस ओपन लेटर में स्वरा ने फिल्म को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने बताया था कि फिल्म देखने के बाद उन्हें लगा कि महिलाओं को एक ‘वजाइना’ तक सीमित कर दिया गया है।
2018 में उनके इस बयान पर भी खूब विवाद हुआ था। अब सालों बाद जब उन्होंने फिर से जौहर सीन और उसी पुराने ओपन लेटर का जिक्र किया तो मामला दोबारा चर्चा में आ गया।
सवाल यह है कि इतिहास किस नजरिए से देखा?
स्वरा का सवाल था कि रेप किसी महिला की जिंदगी का अंत क्यों माना जाए और अपनी इज्जत बचाने के लिए जान देना कितना सही है। आधुनिक समाज में महिला की गरिमा, अधिकार और स्वतंत्रता पर बहस जरूरी है।
लेकिन सोशल मीडिया पर विरोध करने वालों का तर्क है कि ऐतिहासिक जौहर को रेप सर्वाइवर के आधुनिक संदर्भ से सीधे जोड़कर देखना उस समय की वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज करता है।
इतिहास को आज की शब्दावली में समझना आसान जरूर है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह सही तस्वीर भी दे।
इतिहास को इंस्टाग्राम रील की तरह नहीं पढ़ा जा सकता!
यही वजह है कि यूजर्स स्वरा से कह रहे हैं कि इतिहास को सिर्फ अपनी सुविधा के हिसाब से चुनकर नहीं पढ़ा जा सकता। जौहर पर बहस कीजिए, सवाल कीजिए, आलोचना कीजिए—लेकिन पहले उस दौर को समझिए जिसमें यह सब हुआ।
क्योंकि सदियों पुराने युद्ध, आक्रमण, गुलामी और महिलाओं के सामने मौजूद खतरे को सिर्फ ‘मेरी बॉडी, मेरी चॉइस’ के एक आधुनिक फ्रेम में फिट कर देना शायद इतिहास को समझना नहीं, बल्कि इतिहास को अपने हिसाब से एडिट करना है।
और सोशल मीडिया का सवाल भी यही है—क्या जौहर पर राय बनाने से पहले उस इतिहास को पढ़ना जरूरी नहीं, जिसके बारे में राय दी जा रही है?
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).