Mecca Emergency Alert: यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी है। मंगलवार को मक्का, जेद्दा और ताइफ में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया। लोगों को ऊंची इमारतों, खिड़कियों, बालकनी, छत और खुले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई। कुछ देर बाद खतरा टलने की जानकारी दी गई, लेकिन लोगों से भीड़ से दूर रहने और घटनाओं की फोटो-वीडियो नहीं बनाने को कहा गया। इन लगातार हमलों में अब तक कम से कम 86 लोगों के घायल होने की बात सामने आई है।
मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट क्यों जारी हुआ?
मंगलवार को हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की तरफ ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया। सऊदी सिविल डिफेंस के मुताबिक, नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को खतरे की सूचना दी गई।
लोगों से कहा गया कि वे ऊंची इमारतों से दूर रहें और किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में सुरक्षित जगह पर चले जाएं। कुछ देर बाद सिविल डिफेंस ने बताया कि खतरा टल गया है। हालांकि, लोगों को भीड़ से दूर रहने और किसी भी घटना की फोटो या वीडियो नहीं बनाने की अपील की गई।
تم إطلاق إنذار من المنصة الوطنية للإنذار المبكر في حالات الطوارئ في مدينة مكة المكرمة للتحذير من خطر، اتبع الآتي: pic.twitter.com/rmX6ip83oj
— الدفاع المدني السعودي (@SaudiDCD) September 15, 2026
A warning has been issued by the National Early Warning Platform in Mecca City to alert of a potential danger. Please follow the instructions below: pic.twitter.com/IwvWhhKMan
— الدفاع المدني السعودي (@SaudiDCD) September 15, 2026
जेद्दा और ताइफ में भी अलर्ट
मंगलवार सुबह जेद्दा और ताइफ में भी इसी तरह के इमरजेंसी अलर्ट जारी किए गए थे। इन अलर्ट को भी कुछ समय बाद वापस ले लिया गया।
मक्का, जेद्दा और ताइफ में जारी चेतावनी में लोगों से भीड़ और खुले इलाकों में जाने से बचने को कहा गया। लोगों को शांत रहने और खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षित जगह जाने की सलाह दी गई।
घर के अंदर रहने और कांच से दूर रहने की सलाह
अलर्ट के दौरान लोगों से घर के अंदर रहने और खिड़कियों, बालकनी, छत, कांच तथा अन्य खुली जगहों से दूर रहने को कहा गया।
अगर कोई व्यक्ति घर से बाहर है तो उसे तुरंत नजदीकी इमारत में जाने या किसी मजबूत चीज की आड़ लेने की सलाह दी गई। लोगों से कहा गया कि खतरा पूरी तरह टलने तक सुरक्षित जगह पर ही रहें।
मक्का की सुरक्षा कितनी मजबूत है?
सऊदी के पास मिसाइलों से निपटने के लिए क्या है?
सऊदी अरब के पास सिर्फ एक तरह की मिसाइल डिफेंस प्रणाली नहीं है। उसने आसमान की अलग-अलग ऊंचाइयों और अलग-अलग तरह के खतरों के लिए कई परतों वाली सुरक्षा व्यवस्था तैयार कर रखी है।
इस व्यवस्था की सबसे अहम कड़ियों में Patriot और THAAD शामिल हैं। Patriot सिस्टम आने वाली मिसाइल या दूसरे हवाई खतरे को रडार से पकड़कर उसका पीछा करता है और जरूरत पड़ने पर इंटरसेप्टर मिसाइल से उसे रास्ते में ही रोकने की कोशिश करता है। सऊदी के पास Patriot की PAC-3 फैमिली भी है।
वहीं THAAD को इस पूरी व्यवस्था की ऊपरी परत समझ सकते हैं। यह खास तौर पर बैलिस्टिक मिसाइलों को ऊंचाई पर रोकने के लिए बनाया गया है। जुलाई 2025 में सऊदी अरब ने अपनी पहली THAAD यूनिट को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया था।
इसके नीचे Improved HAWK, Crotale, Shahine और MICA जैसी प्रणालियां हैं, जबकि Stinger, Avenger और Mistral जैसे सिस्टम कम दूरी के हवाई खतरों से निपटने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। यानी अगर कोई खतरा बहुत नीचे की ऊंचाई पर आ रहा हो, तो उसके लिए भी अलग सुरक्षा मौजूद है।
ड्रोन के लिए अलग इंतजाम
आज का खतरा सिर्फ बड़ी मिसाइलों तक सीमित नहीं है। छोटे ड्रोन भी बेहद अहम खतरा बन चुके हैं। ऐसे में हर छोटे ड्रोन पर महंगी इंटरसेप्टर मिसाइल दागना व्यावहारिक नहीं होता।
इसीलिए सऊदी ने Counter-Drone सिस्टम पर भी काम किया है। इनमें रडार और दूसरे सेंसर पहले ड्रोन को ढूंढते और ट्रैक करते हैं। इसके बाद उसे इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बाधित करने या दूसरे उपलब्ध साधनों से नष्ट करने की कोशिश की जा सकती है।
सऊदी के पास चीन का Silent Hunter लेजर सिस्टम भी सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है, जिसे कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन जैसे लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है।
अब इसे एक आसान उदाहरण से समझिए
मान लीजिए दूर से एक मिसाइल सऊदी की तरफ आती दिखाई देती है।
सबसे पहले रडार उसे देखता है। सिस्टम यह समझने की कोशिश करता है कि वह क्या है और किस दिशा में जा रही है। इसके बाद कमांड सिस्टम तय करता है कि खतरे से निपटने के लिए कौन-सी रक्षा परत इस्तेमाल की जाए।
अगर खतरा बैलिस्टिक मिसाइल का है, तो THAAD या Patriot जैसी मिसाइल-डिफेंस प्रणाली उसे रास्ते में रोकने की कोशिश कर सकती है। अगर खतरा कम ऊंचाई पर उड़ने वाला ड्रोन है, तो Counter-UAV सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, लेजर या कम दूरी की एयर-डिफेंस ज्यादा उपयुक्त हो सकती है।
यानी इसे ऐसे समझिए—सऊदी ने आसमान के चारों तरफ एक ही बड़ा कवच नहीं लगाया है, बल्कि अलग-अलग ऊंचाई और अलग-अलग खतरे के लिए कई छोटे-बड़े कवच तैयार किए हैं।
हालांकि, किसी खास हमले में कौन-सा सिस्टम चला, कितने इंटरसेप्टर इस्तेमाल हुए या मक्का के आसपास किस जगह कौन-सी बैटरी तैनात थी, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं होती। इसलिए ऐसे मामलों में अनुमान लगाने के बजाय सिर्फ वही बात कही जा सकती है जिसकी आधिकारिक पुष्टि हुई हो।
15 सितंबर 2026 को मक्का समेत कई इलाकों में सुरक्षा अलर्ट जारी हुआ था, लेकिन बाद में अलर्ट हटा दिए गए। उस घटना में सार्वजनिक रूप से यह पुष्टि नहीं की गई कि मक्का के ऊपर किसी खास मिसाइल को किस डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट किया।
تنبيه زال الخطر عن مدينة مكة المكرمة، لسلامتك الاستمرار في اتباع تعليمات #الدفاع_المدني وتجنب التجمهر والتصوير نهائيًا. في حالة الطوارئ اتصل بالرقم (911). pic.twitter.com/Lz62VWbfCm
— الدفاع المدني السعودي (@SaudiDCD) September 15, 2026
मक्का की तरफ पहले भी दागी जा चुकी है मिसाइल
मक्का को निशाना बनाने की कोशिश पहले भी हो चुकी है। 27 जुलाई 2017 को हूती विद्रोहियों ने मक्का की तरफ बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी।
हालांकि, इस मिसाइल को मक्का से करीब 69 किलोमीटर दूर अल-वसिलिया इलाके में ही नष्ट कर दिया गया था। उस समय भी घटना ने मक्का की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी थी।
हूती हमलों में अब तक 86 लोग घायल
मक्का, जेद्दा और ताइफ में जारी ताजा इमरजेंसी अलर्ट सऊदी अरब पर हूतियों के लगातार बढ़ते हमलों के बीच आया है। सोमवार को हूतियों ने सऊदी शहरों खमिस मुशैत, अबहा और ताइफ की ओर कई मिसाइल और ड्रोन दागे थे।
सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता कर्नल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, सोमवार के हमलों में कम से कम 13 नागरिक घायल हुए थे। मंगलवार को जारी बयान में अल-मलिकी ने सऊदी नागरिकों को निशाना बनाने वाले हूतियों के हमलों को जानबूझकर किया गया हमला बताया।
इससे पहले पिछले हफ्ते भी हूतियों ने सऊदी अरब पर बड़ी संख्या में मिसाइल और ड्रोन दागे थे। अबहा, खमिस मुशैत, जाजान और नजरान जैसे शहरों को निशाना बनाया गया था। इन हमलों में कम से कम 73 लोग घायल हुए थे।
इस तरह सोमवार के 13 घायलों और पिछले हफ्ते के 73 घायलों को मिलाकर इन हमलों में अब तक कम से कम 86 लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। हमलों के बाद सऊदी अरब की कुछ ऊर्जा सुविधाओं का काम भी कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था।
यमन में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी पर हमले
हूती विद्रोही ईरान से जुड़े माने जाते हैं। उनका आरोप है कि सऊदी अरब यमन में हवाई हमले कर रहा है और क्रूज मिसाइलें दाग रहा है। इसी तनाव के बीच यमन के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में हूती लड़ाकों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच भारी लड़ाई चल रही है।
इस बीच हूतियों ने यमन के पश्चिमी लाल सागर तट पर अपना कब्जा तेजी से बढ़ाया है। सोमवार को उन्होंने इस इलाके में दो और द्वीपों—ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश—पर भी कब्जा कर लिया।
ये दोनों द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित हैं। लाल सागर और बाब अल-मंदेब का इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
BREAKING: First time in history. 🇸🇦Mecca, the holiest site for nearly 2 billion Muslims, just received its first-ever live emergency missile & Drone warning.
Same alert hit Jeddah, Taif, Yanbu, Abha, Jazan and AlUla.
This follows days of Houthi missile and drone attacks on…
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) September 15, 2026
यमन में 500 से ज्यादा सरकारी लड़ाके मारे गए
यमन में हूतियों के खिलाफ चल रही लड़ाई में पिछले चार हफ्तों के दौरान सरकार समर्थित 500 से ज्यादा लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है। सरकार के समर्थन में लड़ने वाली नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स ने यह आंकड़ा जारी किया है।
संगठन के मुताबिक, इसी अवधि में होदेदा और ताइज प्रांतों में 1,000 से ज्यादा हूती लड़ाके भी मारे गए हैं। हालांकि, हूती विद्रोहियों की तरफ से इन आंकड़ों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
यमनी सरकार ने अब लाल सागर के तट पर और सैनिक भेजने का फैसला किया है। सरकार के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते हुई हार को स्वीकार करते हुए कहा कि सरकारी बल दोबारा इस इलाके में लौटेंगे।
सऊदी की मदद के लिए पाकिस्तान ने सेना भेजने से किया इनकार
हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों और यमन में उनके बढ़ते कब्जे ने सऊदी अरब की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यरुशलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब अब मदद के लिए अपने सहयोगी देशों से संपर्क कर रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब की मदद करने से साफ इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने कहा है कि उसकी सेना सऊदी अरब की जमीन की रक्षा के लिए तैनात की जा सकती है, लेकिन वह किसी दूसरे देश की जमीन पर चल रहे युद्ध में शामिल नहीं होगी।
यानी फिलहाल सऊदी अरब को हूती हमलों का सामना अपनी मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था और सहयोगी देशों से मिलने वाली संभावित मदद के जरिए करना होगा। मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी होना इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को भी दिखाता है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).