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बलिया बाढ़ में बह गए घर, कैसे होगी बेटी की शादी

बाढ़ की बर्बादी से टूटा परिवार, बेटी की शादी के सपने भी बह गए

बलिया बाढ़: बैरिया तहसील के चांद दियर गांव में बाढ़ ने लोगों की ज़िंदगी तबाह कर दी। एनएच 31 की सड़क के टूटने से गांव में पानी इस कदर घुसा कि लोग अपना सबकुछ छोड़कर बंधे पर भागने को मजबूर हो गए। जिन घरों में कभी खुशहाली थी, अब वहां सिर्फ पानी और बर्बादी का साया है। बाढ़ ने सिर्फ घर नहीं, बल्कि सपने भी बहा दिए।

बलिया के चांद दियर गांव में बाढ़ से तबाह एक परिवार। घर में पानी घुसने से सारा सामान बर्बाद हो गया। परिवार की एक महिला बेटी की शादी के लिए कर्ज लेने पर मजबूर है। सरकारी मदद न मिलने से गांववासी बंधे पर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ से क्षेत्र में व्यापक तबाही हुई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई।
बंधे पर बैठे बेसहारा लोग

बलिया बाढ़: सारा सामान बह गया, जानवर भी किसी तरह से बचाए

गांववाले अपने घर का सारा सामान पीछे छोड़कर सिर्फ अपनी जान बचाने के लिए भागे। हर कोने में पानी था और घर के अंदर जो कुछ भी था, वह सब बर्बाद हो गया। एक मां ने अपने टूटे दिल से बताया कि उनके घर का हर सामान पानी में बह गया। खाने से लेकर पहनने तक, हर चीज़ बर्बाद हो चुकी है। घर के जानवरों को भी किसी तरह से सुरक्षित बंधे पर लाया गया।

बलिया के चांद दियर गांव में बाढ़ से तबाह एक परिवार। घर में पानी घुसने से सारा सामान बर्बाद हो गया। परिवार की एक महिला बेटी की शादी के लिए कर्ज लेने पर मजबूर है। सरकारी मदद न मिलने से गांववासी बंधे पर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ से क्षेत्र में व्यापक तबाही हुई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई।
बेटी की शादी के दर्द की दास्तां सुनाती माँ

बलिया बाढ़: बेटी की शादी की तैयारी बर्बाद, अब कर्ज लेकर करनी पड़ेगी शादी

25 नवंबर को बेटी की शादी थी। मां की आंखों में आंसू हैं, जब वह कहती हैं, “जो भी शादी के लिए कपड़े, गहने खरीदे थे, सब बाढ़ में बह गए। अब तो कर्ज लेकर ही किसी तरह से बेटी की शादी करनी पड़ेगी।” उनकी आवाज़ कांप रही थी, जैसे बाढ़ का पानी उनकी उम्मीदों और खुशियों को भी बहा ले गया हो। तिलक 18 नवंबर को होना था, लेकिन अब शादी की तैयारी के नाम पर कुछ भी नहीं बचा।

छह बेटियों की मां के दर्द में छिपी भूख की पीड़ा

महिला ने बताया कि उनके घर में छह बेटियां और एक बेटा है। “कभी खाना मिलता है, कभी नहीं,” यह कहकर उनके होंठ सूख जाते हैं, जैसे उनकी भूख और दर्द ने उन्हें निःशब्द कर दिया हो। परिवार बंधे पर किसी तरह से दिन काट रहा है, लेकिन सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं आई। भूख का यह आलम है कि कभी-कभी आधी रात तक इंतजार करना पड़ता है कि कहीं से कुछ खाना मिल जाए।

बलिया के चांद दियर गांव में बाढ़ से तबाह एक परिवार। घर में पानी घुसने से सारा सामान बर्बाद हो गया। परिवार की एक महिला बेटी की शादी के लिए कर्ज लेने पर मजबूर है। सरकारी मदद न मिलने से गांववासी बंधे पर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ से क्षेत्र में व्यापक तबाही हुई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई।
दर्द वया करते तूफानी यादव

दिव्यांग तूफानी यादव: हमारा घर-खेत सब डूब गया, अब कैसे जियेंगे?

तूफानी यादव, जो दोनों हाथों से दिव्यांग हैं, बाढ़ के पानी में अपने घर और खेत को खो चुके हैं। उनकी आवाज़ में पीड़ा साफ सुनाई देती है, “घर-खेत सब डूब गया। फसल भी डूब गई। अब हमारे पास कुछ नहीं बचा।” गांव के अन्य लोग भी अपनी बर्बादी की कहानी सुना रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब यह लोग कैसे जिएंगे?

पानी में डूबने से गई एक जान, राहत के नाम पर सिर्फ इंतजार

बाढ़ के बीच, एक युवा लड़के की मौत ने पूरे गांव को और सदमे में डाल दिया। नाव की कमी के कारण लड़का पानी से होकर जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन गहरे पानी में डूब गया। एनडीआरएफ की टीम ने गांव में राहत कार्य शुरू किया, लेकिन उनकी पहुंच अब तक हर जरूरतमंद तक नहीं हो पाई। गांववालों की आंखों में चिंता और दर्द साफ झलकता है।

सरकार से अब तक कोई मदद नहीं, तिरपाल तक के लिए तरसे

बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि अब तक उन्हें सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। “तिरपाल तक नहीं मिला,” यह शब्द एक मां के होंठों से फूटते हैं, जैसे कि उनकी तकलीफें बढ़ते वक्त के साथ गहराती जा रही हों। बाढ़ ने इन लोगों से सबकुछ छीन लिया, और अब वे खुले आसमान के नीचे, बंधे पर जीने को मजबूर हैं। जहां कभी खुशियों का घर बसाने की उम्मीद थी, वहां अब सिर्फ कर्ज लेकर बेटी की शादी करने की मजबूरी है