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लखीमपुर खीरी: पकड़ से बाहर आदमखोर बाघ

24 कैमरों से की जा रही है की खोज बाघ अभी भी पकड़ से बाहर

लखीमपुर खीरी:  हाल ही में हुए दो किसानों की बाघ द्वारा हत्या की घटनाओं ने क्षेत्र में दहशत फैला दी है। बाघ की खोज के लिए वन विभाग ने विभिन्न उपाय किए हैं, जिसमें 24 कैमरों और ड्रोन कैमरों का उपयोग शामिल है। हालांकि, अब तक बाघ का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे वन विभाग के प्रयासों पर सवाल उठने लगे हैं।

यूपी के लखीमपुर खीरी में 2 किसानों की मौत का कारण बना बाघ अब भी वन विभाग की पकड़ से दूर है। इस बाघ को पकड़ने के लिए 24 कैमरे और ड्रोन कैमरे से निगरानी की जा रही है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।
ड्रोन से बाघ की निगरानी करते काल्पनिक चित्र

लखीमपुर खीरी: 2 किसानों को बाघ ने बनाया निवाला

बाघ की यह घटना 27 अगस्त को तब शुरू हुई जब अमरीश नामक किसान खेत में काम कर रहा था। बाघ ने उस पर अचानक हमला किया और उसे मौत के घाट उतार दिया। केवल तीन दिन बाद, जाकिर नामक किसान को भी बाघ ने अपने शिकारी प्रवृत्ति का शिकार बना दिया। जाकिर उस समय अपने गन्ने के खेत में काम कर रहा था। इस घटना ने न केवल परिवारों को गहरा दुख दिया, बल्कि पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया।

लखीमपुर खीरी:

यूपी के लखीमपुर खीरी में 2 किसानों की मौत का कारण बना बाघ अब भी वन विभाग की पकड़ से दूर है। इस बाघ को पकड़ने के लिए 24 कैमरे और ड्रोन कैमरे से निगरानी की जा रही है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।
बाग की खोज का काल्पनिक चित्र

वन विभाग का प्रयास जारी

बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने हर संभव कोशिश की है। डीएफओ साउथ संजय विश्वाल ने बताया कि मोहम्मदी रेंज के अंतर्गत बाघ प्रभावित क्षेत्र, जैसे ग्राम घरथनियां, बघेल, हरैया, इमलिया, मूड़ा अस्सी, मूड़ा जवाहर, बघमरा, और पिपरा रायपुर मड़िया जवाहर में गश्त की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस कॉम्बिंग में थर्मल ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है, जिससे गन्ने के खेतों में बाघ की संभावित गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

जागरूकता कार्यक्रम

वन विभाग केवल बाघ को पकड़ने पर केंद्रित नहीं है, बल्कि उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए भी जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों को वनकर्मियों द्वारा पम्फलेट वितरण और पोस्टर के माध्यम से जानकारी दी जा रही है। इस जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को यह बताना है कि वे अपने खेतों में समूह बनाकर जाएं, जिससे बाघ के साथ संभावित संघर्ष को कम किया जा सके।

विशेषज्ञों की टीम

इस रेस्क्यू ऑपरेशन में डॉ0 नितेश कुमार कटियार, जो कानपुर प्राणि उद्यान के पशु चिकित्सक हैं, तथा डॉ0 दया शंकर और उनकी टीम भी शामिल हैं। ये विशेषज्ञ बाघ प्रभावित क्षेत्रों में गश्त कर रहे हैं और उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने स्थानीय लोगों को भी सलाह दी है कि वे अपने खेतों में अकेले न जाएं और यदि किसी बाघ की गतिविधि का पता चले, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें।

निगरानी का लगातार प्रयास

वन विभाग की टीमें निरंतर निगरानी बनाए रख रही हैं। वे बाघ की संभावित गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए अतिरिक्त गश्त कर रही हैं। इस बीच, अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि वे सावधान रहें और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में तुरंत मदद मांगें।

जानकारी और सुझाव

यह घटना न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह बाघों का शिकार कर रहे हैं। वन विभाग की कोशिश है कि जल्द से जल्द बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जाए, ताकि इलाके में लोगों को फिर से सुरक्षा महसूस हो। यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है, लेकिन सभी प्रयास किए जा रहे हैं ताकि मानव और वन्यजीवों के बीच का संघर्ष कम से कम हो सके।