धान खरीद में पारदर्शिता:अधिकतम किसानों तक पहुंचेगा न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ
धान खरीद में पारदर्शिता: पीलीभीत जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के अंतर्गत धान खरीद की कार्यशाला गांधी सभागार में आयोजित की गई। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य था धान खरीद की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाना। सरकार की मंशा है कि धान क्रय प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न हो और किसानों को उनका सही हक मिले। बैठक में कई और महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनमें धान खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाने से लेकर उपकरणों की उपलब्धता और प्रक्रिया की निगरानी तक शामिल थे।

धान खरीद में पारदर्शिता: धान क्रय केंद्रों की स्थापना और तैयारियां
बैठक में बताया गया कि जनपद में धान खरीद के लिए 148 क्रय केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें से खाद्य विभाग द्वारा 34, पीसीयू द्वारा 32, पीसीएफ द्वारा 32, यूपीएसएस द्वारा 44, भा.खा.नि द्वारा 4 और मंडी समिति द्वारा 2 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2300 प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिससे किसानों को अपने धान का उचित मूल्य मिल सके।
सभी क्रय केंद्रों पर धान खरीदने के लिए पर्याप्त मात्रा में बोरे की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही, क्रय एजेंसियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने स्तर पर पुराने या सर्विसेबल बोरे खुद ही खरीदें। शासनादेश के अनुसार, मांग के अनुरूप एजेंसियों को बोरे उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि धान क्रय प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी न हो।
धान खरीद में पारदर्शिता: राइस मिलों का सत्यापन और सम्बद्वीकरण
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जनपद में अब तक 88 राइस मिलों में से 71 का सत्यापन ई-उपार्जन प्रणाली के माध्यम से किया जा चुका है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन राइस मिलों का सम्बद्वीकरण क्रय केंद्रों से ऑटोमेटेड सिस्टम द्वारा किया जाएगा। यह प्रक्रिया खाद्य आयुक्त के कार्यालय से होगी, जिससे पूरे क्रय सत्र में पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी प्रकार की धांधली न हो।
धान क्रय के लिए बनाए गए सभी केंद्र सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक संचालित रहेंगे। साथ ही, सुनिश्चित किया गया है कि क्रय केंद्रों पर किसानों के धान की तौल की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
मंडी में उपकरणों की स्थिति
बैठक के दौरान मंडी सचिव ने अवगत कराया कि मंडी में 267 इलेक्ट्रॉनिक कांटे, 118 नमी मापक यंत्र, 126 डस्टर, 135 विश्लेषण किट तथा छलना, पंखा और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जा चुके हैं। हालांकि, कुछ केंद्रों पर 22 डस्टर, 30 नमी मापक यंत्र और 29 इलेक्ट्रॉनिक कांटे की कमी पाई गई है, जिसे जल्द ही दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
सभी क्रय केंद्रों पर उपकरणों की स्थिति की निगरानी के लिए संबंधित अधिकारियों को आदेशित किया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि किसी भी केंद्र पर उपकरणों की कमी न हो। यदि किसी उपकरण में कोई तकनीकी खराबी आती है, तो उसे रियल टाइम में ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए मंडी सचिव को एक मैकेनिक नामित करने को कहा गया है, जो उपकरणों की देखरेख करेगा।
धान नीलामी की प्रक्रिया
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि मंडियों में धान की नीलामी दिन में दो बार की जाएगी। नीलामी के दौरान किसानों के धान की नमी अनिवार्य रूप से मापी जाएगी और इसे मंडी समिति के अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा, ताकि किसानों को डिस्ट्रेस सेल (नीलामी में नुकसान) की स्थिति में किसी प्रकार की गलतफहमी न हो।
धान की नीलामी के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी क्रय एजेंसियों का कम से कम एक-एक प्रतिनिधि उपस्थित हो। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी रहे और किसानों को सही मूल्य मिल सके। साथ ही, जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि यदि किसी धान क्रय केंद्र पर उपकरणों की कमी या खराबी होती है, तो तुरंत उसकी मरम्मत की जाए और केंद्र प्रभारी को इस बारे में सूचित किया जाए।
धान क्रय प्रक्रिया में पारदर्शिता और अनुशासन
धान क्रय प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि किसी भी किसान का धान रिजेक्ट करने से पहले उसका सैंपल सील्ड किया जाए और रिजेक्शन रजिस्टर में कारण सहित दर्ज किया जाए। किसानों का मोबाइल नंबर भी रजिस्टर में अंकित किया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।
केंद्र प्रभारियों को यह आदेश दिया गया कि वे धान क्रय केंद्रों पर सभी आवश्यक अभिलेख रखें और क्रय प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें। यदि किसी केंद्र प्रभारी द्वारा किसानों का धान अनुचित रूप से रिजेक्ट किया जाता है या प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
धान की स्मार्ट ट्रैकिंग और ऑनलाइन प्रक्रिया
धान की खरीद और राइस मिलों में भेजे जाने के दौरान रियल टाइम डेटा अपलोड करने की व्यवस्था की गई है। सभी ट्रकों में जीपीएस सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे धान की ट्रैकिंग आसानी से की जा सके। धान के ट्रांसपोर्टेशन के दौरान ट्रक की सेल्फी पोर्टल पर अपलोड की जाएगी, ताकि प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता रहे और किसी भी प्रकार की धांधली की संभावना समाप्त हो सके।
धान की ऑनलाइन फीडिंग और अपलोडिंग सुनिश्चित की जाएगी और यदि तकनीकी कारणों से डेटा अपलोड करने में देरी होती है, तो इसकी सूचना धान क्रय मैसेजिंग ग्रुप और संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी। यदि कोई केंद्र प्रभारी 1 दिन से अधिक समय तक ऑनलाइन फीडिंग नहीं करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
बिचौलियों के प्रवेश पर प्रतिबंध
बैठक में जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए कि किसी भी क्रय केंद्र पर बिचौलियों का प्रवेश नहीं होना चाहिए। सभी क्रय केंद्रों के कर्मचारियों को पहचान पत्र जारी किए जाएंगे, ताकि बिचौलियों की पहचान की जा सके और उन्हें क्रय प्रक्रिया से दूर रखा जा सके। यदि किसी केंद्र पर बिचौलियों की उपस्थिति पाई जाती है, तो उस केंद्र प्रभारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
समयबद्ध और मानक-आधारित धान खरीद
धान क्रय केंद्रों को सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुला रखा जाएगा। धान की उतराई और छनाई की दर किसानों से समन्वय बनाकर तय की जाएगी और यह दर ₹20 से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, केंद्र प्रभारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है कि क्रय केंद्रों पर किसानों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं, जैसे कि छाया और बैठने की व्यवस्था, उपलब्ध हों।
धान खरीद प्रक्रिया के दौरान सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करें और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो। क्रय केंद्रों पर समयबद्ध तरीके से धान की खरीद की जाए और किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।

कार्यशाला में उपस्थित अधिकारी
इस कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी (वि./रा.), जिला खाद्य विपणन अधिकारी, भाखानि डिपो प्रबंधक, सहायक आयुक्त (सहकारिता), लीड बैंक मैनेजर, बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रतिनिधि, जिला कृषि अधिकारी, मंडी सचिव, पीसीएफ के जिला प्रबंधक, यूपीएसएस के जिला प्रबंधक और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
इस प्रकार, सरकार ने धान क्रय प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और अनुशासित बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, ताकि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिल सके और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या धोखाधड़ी से बचा जा सके।