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Pilibhit news : एक ही परिवार के 3 बच्चों की मौत, संदिग्ध बुखार से दहशत

Pilibhit news : उत्तर प्रदेश के पिलीभीत जिले में बुखार के कारण एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौत का मामला सामने आया है, जिससे गांव में दहशत का माहौल बन गया है। बच्चों की मौत की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई और मुख्यालय से मलेरिया विभाग की टीम को तुरंत गांव भेजा गया। टीम ने मौके पर पहुंचकर स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

आर्थिक स्थिति के कारण उचित इलाज नहीं करा सका पीड़ित परिवार

बता दें कि पीड़ित परिवार पिलीभीत जिले के बरखेड़ा थाना क्षेत्र के जारकल्लिया गांव में रहता है। पीड़ित परिवार परिवार के सदस्य भगवान दास ने बताया कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण उन्हें अपने बेटे को उचित चिकित्सा सेवा मुहैया कराने में दिक्कतें हुईं। उनके पांच वर्षीय बेटे अनिल को 25 अक्तूबर को तेज बुखार आया था। प्रारंभिक उपचार के लिए वह शहर के एक निजी अस्पताल पहुंचे, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने की सलाह मिलने के बाद वह मजबूरी में झोलाछाप से इलाज कराने लगे। दुर्भाग्यवश, 27 अक्तूबर की सुबह अनिल की हालत बिगड़ने पर उसकी मृत्यु हो गई।

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भाई की बेटी भी बनी बुखार का शिकार

इसके बाद भगवान दास ने बताया कि उनके भाई मंशाराम की चार वर्षीय पुत्री सोनम को भी 26 अक्तूबर को बुखार आया। डॉक्टरों ने सोनम को जिला अस्पताल से लखनऊ के लिए रेफर किया, लेकिन लखनऊ ले जाने से पहले ही 27 अक्तूबर की सुबह उसकी मृत्यु हो गई। इसी दिन परिवार के चचेरे भाई रेवती प्रसाद की पांच वर्षीय बेटी सोमाया भी बुखार के कारण जिंदगी की जंग हार गई।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में लिए नमूने

एक ही परिवार के तीन बच्चों की इस तरह अचानक मौत से पूरे गांव में डर और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी, जिसके बाद विभाग ने मलेरिया जांच टीम को तुरंत भेजा। टीम ने जांच के लिए परिवार और आसपास के लोगों के नमूने लिए और गांव में अन्य रोगियों की स्थिति की भी जांच की है।

मृत्यु अलग-अलग कारणों से हुई : मुख्य चिकित्सा अधिकारी

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि तीनों बच्चों की मृत्यु अलग-अलग कारणों से हुई है, हालांकि वास्तविक कारण जानने के लिए जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरी गंभीरता से गांव का दौरा किया और स्थिति का आंकलन किया है। ग्रामीणों की चिंता को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाया जा रहा है ताकि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति से बचा जा सके।

गांव में फैली चिंता, लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जताई चिंता

वहीं दूसरी ओर गांव में अचानक हुई इन मौतों ने न केवल पीड़ित परिवार, बल्कि पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय लोग स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भरता को लेकर अपनी चिंता जता रहे हैं। ग्रामीणों ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की मांग की है ताकि जरूरत के समय उन्हें उचित उपचार मिल सके।

लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी है और इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से यह तथ्य एक बार फिर उजागर हो गया है। हालाँकि, बुखार जैसे लक्षणों की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के कदम सराहनीय हैं, लेकिन गांव में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।