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बदायूं की दरगाह के पीछे धर्म परिवर्तन की बड़ी साजिश?, जानिये

धर्म की आड़ में दरगाह का दबाव! बदायूं में महिला और 5 साल की बेटी पर धर्म परिवर्तन की सनसनीखेज कोशिश!”

बदायूं की दरगाह के पीछे धर्म परिवर्तन की बड़ी साजिश?, सिर्फ सास-ससुर नहीं, पति भी हो चुका है धर्मांतरण का शिकार — अब महिला और मासूम बेटी को बनाया जा रहा है निशाना!

कहां गया संविधान का अनुच्छेद 25? क्या अब आस्था भी डर के साए में जिएगी?

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने धर्म, भरोसे और महिला सुरक्षा को लेकर पूरे समाज को झकझोर दिया है। ये मामला न सिर्फ सामाजिक ताने-बाने को तोड़ता है, बल्कि ये सवाल खड़ा करता है कि क्या अब महिलाएं अपने ही घर में सुरक्षित नहीं?

“दरगाह का पीर, अतीक-अरशद गैंग का संदिग्ध सदस्य!”

बदायूं की एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि जिले की एक प्रसिद्ध दरगाह के पीर अतीक अरशद उर्फ़ पप्पन पीर ने न सिर्फ उसके पति, सास और ससुर का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया, बल्कि अब वो उसी महिला और उसकी 5 साल की मासूम बेटी पर भी धर्म बदलवाने का दबाव बना रहा है।

महिला का कहना है कि ये पीर अतीक-अरशद गैंग से भी जुड़ा हुआ है और बार-बार धमकी देता है कि अगर इस्लाम कबूल नहीं किया, तो अंजाम भुगतने को तैयार रहो!

बदायूं की दरगाह के पीछे धर्म परिवर्तन की बड़ी साजिश?, “मुस्लिम बन जाओ… वरना रहना मुश्किल कर देंगे!”

पीड़िता का कहना है:

“मेरे पति, सास-ससुर पहले ही इस पीर के चंगुल में आकर धर्म बदल चुके हैं। अब वो मुझसे और मेरी 5 साल की बेटी से कहता है कि इस्लाम कबूल कर लो, वरना न जीने देंगे, न कहीं सर छुपाने देंगे।”

महिला ने देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बदायूं पुलिस और एसएसपी को शिकायती पत्र भेजे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अभी तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

“धर्म की जबरन ठोंसी गई परिभाषा!”

महिला ने बताया कि पीर और उसके परिवारजन उसे कहते हैं:

“हिंदू धर्म में बहुत सारे भगवान हैं, जबकि मुसलमान एक को पूजते हैं… मुस्लिम बन जाओ, तभी परिवार का हिस्सा बन पाओगी।”

यह बयान न केवल धर्म की भावना को ठेस पहुँचाता है, बल्कि यह सीधे तौर पर भारतीय संविधान की आत्मा पर हमला है।

बदायूं की दरगाह के पीछे धर्म परिवर्तन की बड़ी साजिश?, पति का पलटवार या दबाव का नतीजा?

वहीं, अब पीड़िता का पति मीडिया के सामने आया है और उसने महिला पर ही आरोप लगा दिया कि वो घर में झगड़ा करती है और जबरन मकान पर कब्जा कर चुकी है।

उसका कहना है:

“हम हिंदू हैं, सनातन धर्म में आस्था रखते हैं। मेरी पत्नी झूठे आरोप लगा रही है।”

अब सवाल ये है कि यदि परिवार हिंदू है, तो फिर महिला से धर्म बदलने की मांग क्यों? और अगर नहीं है, तो पीड़िता के आरोप को इतनी आसानी से खारिज कैसे किया जा सकता है?

बदायूं की दरगाह के पीछे धर्म परिवर्तन की बड़ी साजिश?, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, लेकिन कार्रवाई कब?

सीओ सिटी रजनीश उपाध्याय ने बताया कि महिला का प्रार्थना पत्र मिला है और सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।

“जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

लेकिन ऐसे संवेदनशील मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की दरकार है, वरना यह नजीर बनेगा आने वाले ‘फर्जी धर्मगुरुओं’ के लिए।

सवाल समाज से, सरकार से और सिस्टम से…

  • क्या अब धर्मगुरु की वेशभूषा के पीछे भी एजेंडा छिपा है?

  • क्या महिलाओं को मजबूर करके धर्म बदलवाना संविधान का अपमान नहीं?

  • अगर पीड़िता ने राष्ट्रपति तक गुहार लगाई है, तो अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं?

  • क्या 5 साल की मासूम बच्ची की अस्मिता की कोई कीमत नहीं?

 

अंतिम शब्द:

धर्म कभी भी ज़बरदस्ती नहीं होता।
वो आत्मा का विषय है, हथियार नहीं।
जब भी धर्म को डर और दबाव का औजार बनाया गया, इतिहास ने उसे खारिज किया है।

अब वक्त है कि हम सिर्फ पीड़िता की नहीं, आस्था और संविधान की भी लड़ाई लड़ें।

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