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लाशों का सौदागर डॉक्टर? अब क्या मीडिया मैनेज का खेला ?

लाशों का सौदागर डॉक्टर? तीन दिन तक शव पर इलाज का नाटक, अब मीडिया मैनेज कर रहा है डॉ. चरित बोरा!

अजय देव वर्मा, रॉकेट पोस्ट लाइव

पीलीभीत:

यह कहानी किसी हॉरर फिल्म की नहीं, उत्तर प्रदेश के एक ज़िंदा अस्पताल की है। जहां ना सिर्फ़ इलाज के नाम पर लाश पर तीन दिन तक ड्रामा रचा गया, बल्कि अब इस काले सच पर पर्दा डालने की कोशिश भी खुलेआम हो रही है।

पीलीभीत के न्यूरो केयर अस्पताल में विष्णु नामक एक युवक, जो सड़क दुर्घटना में घायल हुआ था, की मौत उसी दिन हो गई थी। लेकिन उसके बाद भी डॉक्टरों ने तीन दिन तक इलाज का नाटक रचा, परिजनों को गेट के बाहर रोता छोड़ दिया और अंदर लाखों रुपये की वसूली करते रहे।
अब जब ये मामला सामने आया, तो मुख्य आरोपी डॉक्टर चरित बोरा मीडिया के सामने आया — लेकिन सिर्फ़ एक पक्षीय बयान देकर!

डॉक्टर बोरा का झूठ — मीडिया में बोला, ‘परिजनों ने ऑक्सीजन नली खींची’

डॉ. बोरा का कहना है कि जब विष्णु को बरेली शिफ्ट करने की तैयारी चल रही थी, तब परिजनों ने ज़बरदस्ती उसकी जीवन रक्षक दवाइयां और ऑक्सीजन की नली खींच ली, जिससे उसकी मौत हो गई।

अब यहाँ एक सीधा, ज़िम्मेदार और पत्रकारिता से जुड़ा सवाल उठता है —
👉 अगर डॉक्टर की यह बात मान भी ली जाए,
👉 तो उसने तुरंत पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी?

क्यों नहीं दर्ज करवाई FIR?

क्या किसी मरीज की मौत का जिम्मेदार कोई तीमारदार हो और डॉक्टर उसे तुरंत पुलिस के हवाले न करे — क्या ये सामान्य बात है?

साफ़ है कि डॉक्टर घिरने के बाद अब नया तरीका ढूंढ रहा है —
खुद को बचाने का… और परिजनों को गुनहगार दिखाने का।

तीन दिन तक इलाज का नाटक — लेकिन क्यों?
डॉ. बोरा का दावा है कि उसने पहले ही दिन रेफर लेटर बना दिया था।

तो फिर सवाल ये हैं:

मरीज को उसी समय क्यों नहीं रेफर किया गया?

तीन दिन तक क्यों इंजेक्शन, ड्रिप और ICU ड्रामा चला?

परिजनों को मिलने क्यों नहीं दिया गया?

मौत के बाद बदबू तक आने लगी, तब तक इलाज का दिखावा क्यों?

यह सब दर्शाता है कि डॉक्टर न केवल लापरवाही कर रहा था, बल्कि शायद जानबूझकर इलाज का झांसा देकर पैसे ऐंठ रहा था।

क्या मीडिया से मैनेजमेंट की कोशिश कर रहा है डॉक्टर बोरा?
जब मामला तूल पकड़ने लगा, तो डॉक्टर बोरा अचानक गायब हो गया।
फिर एक सीमित मीडिया चैनल के सामने आकर केवल अपना पक्ष रखकर चला गया।

यहां सवाल है —

हर मीडिया के सामने आने से डॉक्टर क्यों बच रहा है?

क्या कुछ मीडिया संस्थानों को मैनेज किया गया है?

क्या यह वीडियो बयान सिर्फ इसलिए है ताकि विष्णु के गरीब परिजनों को झूठा ठहराकर दबाव में लाया जा सके?

डर यही है कि डॉक्टर अपनी दौलत और पहुंच के दम पर अब पूरी कहानी पलटने की जुगत में है।
विष्णु जैसे मेहनतकश के परिजन उसकी दौलत के सामने कहाँ टिक पाएंगे?

अब एक ही उम्मीद — सीएम योगी आदित्यनाथ का सख्त संज्ञान

विष्णु के परिजन आज भी इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
एक तरफ दौलत वाला डॉक्टर है… और दूसरी तरफ एक गरीब मजदूर परिवार।

अगर योगी सरकार ने इस मामले का संज्ञान नहीं लिया, तो यह केस भी समय के साथ दबा दिया जाएगा।
डॉ. बोरा को कानून के कठघरे में लाना जरूरी है — ताकि
👉 सच्चाई सामने आए,
👉 निष्पक्ष जांच हो,
👉 और इंसाफ गरीब के पक्ष में भी बोल सके।

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सिर्फ एक Vishnu के लिए नहीं — बल्कि हर उस आवाज़ के लिए जो दौलत के आगे दबा दी जाती है।

#इंसाफ_दो_विष्णु_को

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