Asian Games: जापान में 19 सितंबर से शुरू होने वाले एशियन गेम्स से ठीक पहले भारतीय वुशु टीम से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे खेल जगत को झकझोर दिया है। राजस्थान के कोटा की अंतरराष्ट्रीय वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी का करीब 9 मिनट का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह रोते हुए अपने माता-पिता से माफी मांगती हैं और आत्महत्या की बात कहती हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दिव्यांशी का दावा है कि उनका एशियन गेम्स के लिए चयन हो चुका था, उन्हें भारतीय टीम की किट तक मिल गई थी, लेकिन आखिरी समय में उनका नाम हटाकर नाओरेम रोशिबीना देवी को टीम में शामिल कर दिया गया।
‘मां-पापा माफ करना…’, वीडियो के आखिरी हिस्से ने बढ़ाई चिंता
दिव्यांशी के वीडियो का सबसे परेशान करने वाला हिस्सा उसका आखिरी हिस्सा है। वह रोते हुए अपने माता-पिता से माफी मांगती हैं और कहती हैं कि उन्होंने कभी आत्महत्या करने के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन अब वह ऐसा करने की बात कर रही हैं।
इसके बाद वह अपने माता-पिता के प्रति प्यार जाहिर करती हैं। वीडियो के अंत में वह अपनी किट दिखाती हैं, कैमरा घर की छत की ओर करती हैं और इसे अपना आखिरी वीडियो बताती हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद मामला सिर्फ एक खिलाड़ी के टीम से बाहर होने का विवाद नहीं रह गया, बल्कि उसकी सुरक्षा और मानसिक स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के लिए आत्महत्या की बात shocking..
दिव्यांशी कोई शुरुआती स्तर की खिलाड़ी नहीं हैं। वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए मेडल जीत चुकी हैं और लंबे समय से वुशु की ट्रेनिंग कर रही हैं। उन्होंने 2024 जूनियर वर्ल्ड वुशु चैंपियनशिप में 60 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
जून 2026 में चीन में हुए इंटरनेशनल वुशु टूर्नामेंट में भी उन्होंने सिल्वर मेडल जीतने का दावा किया है। ऐसे में एशियन गेम्स जैसी बड़ी प्रतियोगिता से पहले उनका कैमरे पर इस स्तर का भावनात्मक संकट जाहिर करना इस पूरे मामले का सबसे गंभीर और चौंकाने वाला पहलू बन गया है।
आखिर दिव्यांशी को इतना बड़ा झटका क्यों लगा?
दिव्यांशी के मुताबिक सबसे बड़ा झटका उन्हें इसलिए लगा क्योंकि उनके अनुसार उनका एशियन गेम्स के लिए चयन पहले ही हो चुका था। उन्हें भारतीय टीम की किट दी गई थी और चयन से जुड़ी प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी।
उनका दावा है कि जापान के लिए अंतिम एंट्री भी कन्फर्म थी। लेकिन 11 सितंबर को खेल मंत्रालय की ओर से जारी अपडेट में उनकी जगह नाओरेम रोशिबीना देवी को टीम में शामिल कर लिया गया। यानी एशियन गेम्स शुरू होने से कुछ ही दिन पहले टीम में बदलाव हुआ।
जापान में होने वाले एशियन गेम्स के लिए भारतीय वुशु टीम से अचानक दिव्यांशी चौधरी को बाहर कर दिया गया !!
दिव्यांशी कोटा (राजस्थान) की रहने वाली हैं। उन्होंने करीब 9 मिनट का Video बनाकर अपना दुख दर्द बताया है। सुसाइड करने की बात कही है। मां–बाप से आखिरी बार माफी मांगी है।… pic.twitter.com/MQvsQAn0W6
— Sachin Gupta (@Sachingupta) September 12, 2026
जून में घोषित टीम से 11 सितंबर को नाम हटाया गया
भारतीय वुशु टीम की घोषणा 23 जून को की गई थी। उस समय दिव्यांशी चौधरी का नाम टीम में शामिल था।
लेकिन 11 सितंबर को खेल मंत्रालय की ओर से जारी अपडेट में टीम में बदलाव किया गया। दिव्यांशी की जगह नाओरेम रोशिबीना देवी को शामिल किया गया। इसके बाद दिव्यांशी का वीडियो सामने आया और उन्होंने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
दिव्यांशी ने कहा- फाइनल ट्रायल में रोशीबीना को हराया था
दिव्यांशी का दावा है कि जून में हुए एशियन गेम्स के फाइनल सिलेक्शन ट्रायल में उन्होंने 60 किलोग्राम वर्ग में नाओरेम रोशिबीना देवी को हराया था।
रोशिबीना दो बार की एशियन गेम्स मेडलिस्ट हैं और 2022 एशियन गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था। दिव्यांशी का सवाल है कि अगर उन्होंने फाइनल ट्रायल में रोशीबीना को हराया था, तो फिर बाद में उनकी जगह रोशीबीना को टीम में क्यों शामिल किया गया?
फेडरेशन का जवाब- दिव्यांशी चोटिल थीं
वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने दिव्यांशी को टीम से बाहर किए जाने की वजह चोट बताई है।
उनके मुताबिक दिव्यांशी चोटिल हैं और इसी कारण उन्हें एशियन गेम्स में नहीं भेजा जा रहा है। फेडरेशन का कहना है कि एशियन गेम्स में भारत के लिए मेडल जीतना सबसे बड़ा लक्ष्य है और किसी अनफिट खिलाड़ी को इतने बड़े टूर्नामेंट में भेजना सही नहीं होगा।
दिव्यांशी बोलीं- चोट के बाद भी रिकवर होकर खेली
दिव्यांशी ने अपनी तरफ से चोट की पूरी कहानी बताई है। उनका कहना है कि एशियन गेम्स की तैयारी के लिए श्रीनगर में 10 दिन का कैंप हुआ था।
इसी कैंप में रोशीबीना के साथ मुकाबले के दौरान उनके कंधे में चोट लगी। चोट के कारण उन्होंने 4-5 दिन अभ्यास नहीं किया, लेकिन इसके बाद रिकवर होकर दोबारा खेलना शुरू किया। दिव्यांशी का कहना है कि इसके बाद वह इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भी गईं।
डॉक्टर ने खेलने की अनुमति दी थी- दिव्यांशी का दावा
दिव्यांशी के मुताबिक उन्होंने कंधे की चोट डॉक्टर को दिखाई थी। उनका कहना है कि डॉक्टर ने उन्हें टेपिंग के साथ खेलने की सलाह दी थी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी MRI रिपोर्ट कोच और फेडरेशन के पास थी। दिव्यांशी के मुताबिक डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन में उन्हें खेलने के लिए सक्षम बताया गया था। इसी आधार पर वह खुद को एशियन गेम्स के लिए फिट बता रही हैं।
फेडरेशन बोला- निजी डॉक्टर की रिपोर्ट और SAI की रिपोर्ट अलग
फेडरेशन अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने दिव्यांशी के दावे पर कहा कि जिस रिपोर्ट के आधार पर वह खुद को फिट बता रही हैं, वह निजी डॉक्टर की रिपोर्ट है।
उनके मुताबिक स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी SAI की अलग मेडिकल रिपोर्ट है। इसमें दिव्यांशी को पूरी तरह फिट नहीं बताया गया है। फेडरेशन का कहना है कि मेडल के लक्ष्य को देखते हुए अनफिट खिलाड़ी को एशियन गेम्स में नहीं भेजा जा सकता।
पिता बोले- बेटी तीन महीने से टीम कैंप में तैयारी कर रही थी
दिव्यांशी के पिता सुनील कुमार सुंडा ने भी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक जम्मू-कश्मीर में हुए फाइनल चयन ट्रायल में उनकी बेटी पहले स्थान पर रही थी।
उन्होंने बताया कि दिव्यांशी ने फाइनल में चंडीगढ़ की खिलाड़ी को हराकर पहला स्थान हासिल किया था। इसके बाद वह करीब तीन महीने तक SAI के भारतीय वुशु टीम कैंप में तैयारी कर रही थीं।
चोट के बावजूद चीन में सिल्वर जीतने का दावा
सुनील कुमार का कहना है कि श्रीनगर कैंप में बेटी के कंधे में चोट लगी थी, लेकिन इसके बावजूद उसने चीन में इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेला और सिल्वर मेडल जीता।
पिता का सवाल है कि अगर दिव्यांशी खेलने के लिए पूरी तरह सक्षम नहीं थीं, तो चोट के बाद वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में कैसे खेलीं और मेडल कैसे जीता?
किट मिली, सेरेमनी हुई, फिर आखिरी समय में नाम कटा- पिता
दिव्यांशी के पिता का दावा है कि एशियन गेम्स के लिए उनकी बेटी का चयन हो चुका था। उसे भारतीय टीम की किट मिल चुकी थी और सेरेमनी भी हो चुकी थी।
उनका कहना है कि जापान के लिए अंतिम एंट्री भी कन्फर्म थी। इसके बाद अंदरूनी तौर पर उनकी बेटी का नाम हटाकर रोशीबीना देवी का नाम कर दिया गया।
यही वह बदलाव है जिसे लेकर दिव्यांशी और उनका परिवार सबसे ज्यादा सवाल उठा रहा है।
रोशीबीना पर जानबूझकर चोट पहुंचाने का आरोप
दिव्यांशी और उनके पिता ने श्रीनगर कैंप के दौरान लगी चोट को लेकर रोशीबीना पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कंधे की चोट जानबूझकर पहुंचाई गई थी।
हालांकि वुशु एसोसिएशन के अध्यक्ष ने इस आरोप से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि वुशु मार्शल आर्ट का खेल है और मुकाबले के दौरान चोट लग सकती है। उनके मुताबिक यह कहना उचित नहीं है कि किसी खिलाड़ी ने जानबूझकर दूसरी खिलाड़ी को चोट पहुंचाई।
फेडरेशन ने रोशीबीना के अनुभव को भी बताया अहम
फेडरेशन की ओर से रोशीबीना देवी के अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड का भी हवाला दिया गया है। उन्हें दो बार एशियन गेम्स की विजेता बताया गया है और उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव को महत्वपूर्ण माना गया है।
इस मामले में एक तरफ दिव्यांशी अपने ट्रायल प्रदर्शन और फिटनेस का हवाला दे रही हैं, वहीं फेडरेशन मेडिकल रिपोर्ट और रोशीबीना के अनुभव को टीम चयन के आधार के तौर पर सामने रख रहा है।
दिव्यांशी का अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड भी मजबूत
दिव्यांशी 60 किलोग्राम वर्ग में सांदा खेलती हैं। वह 2024 जूनियर वर्ल्ड वुशु चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं।
जून 2026 में चीन में हुए इंटरनेशनल वुशु टूर्नामेंट में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। वह 2017 से कोटा की महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी में ट्रेनिंग कर रही हैं और राजस्थान के लिए अलग-अलग स्तरों पर 12 गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।
एशियन गेम्स 19 सितंबर से, वुशु के मुकाबले 20 से 24 सितंबर तक
20वें एशियन गेम्स का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक जापान के आइची-नागोया में होगा। वुशु के मुकाबले 20 से 24 सितंबर तक खेले जाएंगे।
भारतीय वुशु टीम में कुल 7 खिलाड़ी हैं। इनमें 3 पुरुष और 4 महिला खिलाड़ी शामिल हैं।
भारतीय वुशु टीम में कौन-कौन खिलाड़ी हैं?
पुरुष टीम में सूरज सिंह मायांगलंबम, आर्यन और विक्रांत बलियान शामिल हैं।
महिला टीम में न्येमान वांगसू, अपर्णा, नाओरेम रोशिबीना देवी और लैंगलेंटोम्बी देवी हंजाबम शामिल हैं।
11 सितंबर के अपडेट के बाद दिव्यांशी चौधरी का नाम टीम से हट गया और उनकी जगह नाओरेम रोशिबीना देवी को शामिल किया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल- चयन से ज्यादा खिलाड़ी की मानसिक स्थिति
दिव्यांशी के मामले में चयन प्रक्रिया, मेडिकल रिपोर्ट और फाइनल ट्रायल को लेकर सवाल अपनी जगह हैं। लेकिन इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर बात उनका वह वीडियो है, जिसमें उन्होंने आत्महत्या की बात कही और इसे अपना आखिरी वीडियो बताया।
एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी का इस तरह कैमरे के सामने टूट जाना खेल संस्थाओं, परिवार और पूरे सिस्टम के लिए गंभीर चिंता का विषय है। चयन को लेकर विवाद और उसके कारणों की जांच अपनी जगह हो सकती है, लेकिन किसी भी स्थिति में खिलाड़ी की सुरक्षा सबसे पहले होनी चाहिए।
दिव्यांशी के दावों और फेडरेशन के जवाब के बीच असली स्थिति संबंधित मेडिकल रिपोर्ट, चयन रिकॉर्ड और ट्रायल के आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).