कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर सहित 25 लोगों पर मुकदमा, मऊ रेलवे स्टेशन का निरीक्षण बना विवाद
रेलवे स्टेशन पर बिना अनुमति निरीक्षण, आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई
मऊ जिले में उस समय माहौल गरमा गया, जब कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बेटे और पूर्व मंत्री अरविंद राजभर अपनी टीम के साथ मऊ रेलवे स्टेशन पर पहुंचे और बिना किसी आधिकारिक अनुमति के निरीक्षण शुरू कर दिया। इस दौरान स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों और यात्रियों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
25 अज्ञात लोगों पर भी मुकदमा, घोसी सांसद के लेटर पैड से खुला मामला
इस पूरे प्रकरण में केवल अरविंद राजभर ही नहीं, बल्कि उनकी टीम के 25 अज्ञात सदस्यों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ है। यह मामला तब उजागर हुआ जब घोसी लोकसभा के सांसद राजीव राय के लेटर पैड पर लिखे एक पत्र के जरिए रेलवे प्रशासन तक शिकायत पहुंची।
राजीव राय ने इस पत्र को सोशल मीडिया पर वायरल कर पूरे मामले को सार्वजनिक किया, जिससे यह मुद्दा सुर्खियों में आ गया।
आरपीएफ थाने में दर्ज हुई एफआईआर, नियम तोड़ने का आरोप
मामले की गंभीरता को देखते हुए, आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) थाने में अरविंद राजभर और 25 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। मुकदमे में यह आरोप लगाया गया है कि रेलवे परिसर में बिना अनुमति प्रवेश कर निरीक्षण करना रेलवे अधिनियम का उल्लंघन है।
मऊ की राजनीति में बढ़ा तनाव, आरोप-प्रत्यारोप तेज
इस कार्रवाई के बाद मऊ जिले की राजनीति में नया उबाल आ गया है।
विपक्षी दलों का कहना है कि यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित और विरोधियों को दबाने की साजिश है, जबकि प्रशासन और सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि कानून सभी के लिए बराबर है, चाहे वह मंत्री का बेटा ही क्यों न हो।
अरविंद राजभर की चुप्पी और जांच का अगला चरण
फिलहाल, अरविंद राजभर या उनकी टीम की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। आरपीएफ और रेलवे प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला मऊ और आसपास की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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