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बरेली में कांवड़ियों का बवाल: थाने के सामने कार तोड़ी, पुलिस रही खामोश

बरेली में कांवड़ियों का तांडव: थाने के सामने कार तोड़ी, पुलिस खामोश! सावन यात्रा में आस्था या अराजकता?

बरेली, उत्तर प्रदेश। सावन माह की कांवड़ यात्रा के बीच रविवार को बरेली के भुता क्षेत्र में माहौल अचानक गरमा गया, जब जलाभिषेक कर लौट रहे कांवड़ियों ने सड़क पर खड़ी एक कार को पुलिस की मौजूदगी में तोड़ डाला। घटना ने न केवल ट्रैफिक को ठप कर दिया, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

बरेली में कांवड़ियों का बवाल: कैसे भड़का विवाद-मामूली टक्कर बनी गुस्से की आग

भुता क्षेत्र से गुजर रहे कांवड़ियों का जत्था हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहा था। इसी दौरान एक कार ने कथित तौर पर बाइक सवार कांवड़िये को हल्का सा ‘साइड’ मार दिया। टक्कर से युवक गिर तो नहीं पड़ा, लेकिन उसका मोबाइल फोन टूट गया। यही छोटी सी बात बड़ी आग बन गई। कुछ ही मिनटों में जत्थे ने कार को घेर लिया और चालक से बहस शुरू कर दी।

थाने के सामने बवाल: भीड़ का कहर, कार के शीशे चकनाचूर

कांवड़ियों की भीड़ गुस्से में भुता थाने के पास पहुंची और वहां खड़ी कार पर पत्थर बरसाने लगी। कार के शीशे एक-एक कर टूट गए और कुछ कांवड़ियों ने डंडों से गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया। सबसे हैरानी की बात यह रही कि यह सबकुछ पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुआ। मौके पर मौजूद दरोगा और अन्य पुलिसकर्मी स्थिति को संभालने की बजाय तमाशबीन बनकर देखते रहे।

बरेली में कांवड़ियों का बवाल:  पुलिस की कार्रवाई-गाड़ी कब्जे में, चालक अस्पताल भेजा

हंगामे के दौरान पुलिस ने कार को कब्जे में लिया और कार चालक को चोटिल होने के कारण अस्पताल भेजा। बाद में थाना प्रभारी और क्षेत्राधिकारी (CO) मौके पर पहुंचे। उन्होंने कांवड़ियों को शांत कराने की कोशिश की और चालक को मुआवजे का आश्वासन देकर भीड़ को तितर-बितर किया। पुलिस ने कार की मरम्मत और टूटे मोबाइल की भरपाई कराकर मामला शांत करवाया।

बरेली में कांवड़ियों का बवाल: सवालों के घेरे में प्रशासन-भीड़ नियंत्रण में नाकामी

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि सावन के महीने में कांवड़ यात्रा के दौरान पुलिस और प्रशासन की क्या तैयारी है? क्यों सड़क पर गश्त और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनसे माहौल बिगड़ सकता है? स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिसकर्मी मौके पर होते हुए भी भीड़ पर सख्ती नहीं दिखा पाए, जिससे कांवड़ियों का मनोबल और बढ़ गया।

 सावन में संयम और सतर्कता ज़रूरी

ऐसे मामलों से साफ है कि सावन में कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासन को न केवल ट्रैफिक व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, बल्कि यात्रियों और आम लोगों के बीच सामंजस्य बनाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना चाहिए। साथ ही कांवड़ियों से भी अपेक्षा है कि वे संयम बरतें, क्योंकि आस्था के नाम पर हिंसा माहौल बिगाड़ सकती है।

खून से लाल हुआ हाईवे: कांवड़ियों की बिखरी लाशें, कब थमेगा रफ्तार का कहर?