पीलीभीत सांसद जितिन प्रसाद का गुस्सा फूटा – खुले मंच पर तहसीलदार की लगाईं क्लास, वायरल वीडियो ने मचाई हलचल!
पीलीभीत के बीसलपुर तहसील क्षेत्र में महीनों से ग्रामीण एक खतरनाक आवारा सांड के आतंक से दहशत में जी रहे थे। खनका, रोहनिया, शिवपुरी नवदिया, मिघौना समेत कई गांवों में यह सांड कई बार ग्रामीणों पर हमला कर चुका था, जिससे कई लोग घायल हो गए। ग्रामीणों ने बार-बार प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन तहसील प्रशासन की नींद नहीं टूटी। हालात इतने बिगड़ गए कि ग्रामीणों ने खुद गांव छोड़ने की धमकी तक दे डाली।
इसी बीच, बीसलपुर तहसील में आयोजित एक उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने यह मामला सीधे पीलीभीत सांसद और केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के सामने रख दिया। मंच पर ही सांसद का पारा चढ़ गया। उन्होंने सार्वजनिक मंच से ही तहसीलदार को फटकार लगाई, उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई और साफ शब्दों में कहा कि “अगर प्रशासन जनता की सुरक्षा नहीं कर सकता, तो यहां बैठे रहने का कोई मतलब नहीं!”
पीलीभीत: सांसद के सख्त आदेश – 3 दिन में सांड पकड़ो और पीड़ितों को मुआवजा दो!
जितिन प्रसाद ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए – सांड को 72 घंटे के भीतर पकड़कर सुरक्षित गौशाला भेजने और हमले में घायल हुए ग्रामीणों को मुआवजा दिलाने का निर्देश दिया। सांसद ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से कहा कि यह लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी और अगर आदेश का पालन नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
सांसद की सख्ती के बाद प्रशासन हरकत में आया और तीन दिनों के अंदर टीम बनाकर आवारा सांड को पकड़ लिया गया। पकड़े जाने के बाद उसे सुरक्षित गौशाला भेजा गया। इससे पहले महीनों तक प्रशासन इस सांड को पकड़ने का बहाना बनाता रहा, लेकिन सांसद की फटकार के बाद मामला सुलझ गया।
पीलीभीत: वायरल वीडियो बना चर्चा का केंद्र – जनता कर रही तारीफ
सांसद जितिन प्रसाद का यह पूरा एक्शन मोड वाला वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि सांसद जनता के सामने ही तहसीलदार की क्लास लेते हुए कह रहे हैं – “जनता को तंग करने वाले अधिकारियों की यहां कोई जगह नहीं, और लोगों की सुरक्षा हमारी पहली जिम्मेदारी है।”
ग्रामीणों ने सांड के आतंक से छुटकारा मिलने पर सांसद का आभार जताया और सोशल मीडिया पर उनकी तारीफों के पुल बांध दिए। वहीं, प्रशासनिक लापरवाही पर सांसद का यह सख्त रुख एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि इससे न सिर्फ एक बड़ी समस्या का समाधान हुआ, बल्कि ग्रामीणों को यह भी संदेश मिला कि उनकी आवाज़ को अनसुना नहीं किया जाएगा।
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