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मैनपुरी: पुलिस की हठधर्मिता, 17 साल खून के आँसू रोया युवक, कोर्ट से मिला न्याय

मैनपुरी पुलिस की हैवानियत! 17 साल तक निर्दोष युवक को घसीटा, खून के आंसू रोता रहा राजवीर – अब कोर्ट ने पुलिस पर कसे शिकंजे

मैनपुरी – ये कोई आम कहानी नहीं, बल्कि न्याय और प्रशासन की लापरवाही का वो काला सच है जिसने एक निर्दोष युवक की ज़िंदगी के 17 साल तबाह कर दिए। थाना कोतवाली क्षेत्र के ग्राम नगला भन्त निवासी राजवीर यादव ने अपने जीवन के सुनहरे साल कोर्ट और जेल की सलाखों के पीछे बर्बाद कर दिए – सिर्फ इसलिए क्योंकि पुलिस ने गलत नाम और पहचान के चलते उन पर फर्जी हरिजन एक्ट और गैंगस्टर केस दर्ज कर दिया।

कैसे बर्बाद हुए 17 साल?

साल 2008 में, एक मामला दर्ज होना था राजवीर के भाई रामवीर यादव पर। लेकिन पुलिस ने बिना तफ्तीश और सच्चाई जांचे, राजवीर यादव को आरोपी बना दिया।
राजवीर बार-बार अधिकारियों से गुहार लगाते रहे – “मैं राजवीर हूं, रामवीर नहीं!” लेकिन पुलिस ने न तो उनकी बात सुनी, न सबूत खंगाले, और उल्टा गैंगस्टर एक्ट तक ठोक दिया।

22 दिन जेल और 17 साल की अदालत की ठोकरें

राजवीर को 22 दिन जेल की सलाखों के पीछे गुजारने पड़े। इसके बाद 17 साल तक हर तारीख़ पर अदालतों के चक्कर लगाते रहे, जबकि उनका कोई अपराध ही नहीं था।

राजवीर ने बताया –
“मेरी जवानी अदालतों में खप गई, हर दिन बदनामी झेली, लोग मुझे अपराधी समझते रहे। पुलिस की गलती से मेरा जीवन तबाह हो गया।”

कोर्ट का बड़ा आदेश – पुलिस पर गिरी गाज

आखिरकार, सिविल कोर्ट के गैंगस्टर कोर्ट ने राजवीर यादव को निर्दोष करार दिया।
कोर्ट ने पुलिस की इस भारी चूक पर फटकार लगाते हुए जांच और कार्यवाही के आदेश जारी किए।

राजवीर का दर्द – “भरपाई कौन करेगा?”

राजवीर का सवाल हर उस पीड़ित की तरह है जिसे सिस्टम की लापरवाही ने रौंदा –
“मेरे 17 साल कौन लौटाएगा? मेरे टूटे सपनों की भरपाई कौन करेगा?”

स्थानीय गुस्सा – ‘पुलिस की हैवानियत बर्दाश्त नहीं’

गांव के लोग भी गुस्से में हैं। उनका कहना है कि पुलिस की ऐसी लापरवाही आम लोगों की ज़िंदगी तबाह कर देती है और अपराधियों को छूट देती है।
लोगों ने कड़ी कार्रवाई और मुआवज़े की मांग की है, ताकि आगे कोई राजवीर जैसी यातना न सहे।

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