जयंत चौधरी के करीबी के पिता पर गोलियों की बरसात – ईंट भट्ठे पर खून से लथपथ गिरे संदीप शाह, सियासी गलियारों में मचा तूफान
बागपत की धरती पर गोलियों की गूंज – सियासी हलचल तेज
बागपत जिले का कोतवाली खेकड़ा इलाका उस वक्त दहशत और सनसनी से कांप उठा, जब केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के मुखिया जयंत चौधरी के निजी सहायक विश्वेन्द्र शाह के पिता संदीप शाह को अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी।
यह कोई साधारण वारदात नहीं, बल्कि ऐसी घटना है जिसने सीधे-सीधे सियासत, कॉलेज प्रबंधन विवाद और व्यक्तिगत दुश्मनी के धागों को एक साथ उलझा दिया है।
बागपत में गोलीकांड: ईंट भट्ठे पर खून से लथपथ संदीप शाह – चश्मदीदों ने बताया पूरा मंजर
घटना उस वक्त हुई जब संदीप शाह, जो कभी गांधी इंटर कॉलेज, खेकड़ा के प्रबंधक रह चुके थे और फिलहाल उनकी पत्नी प्रबंधक हैं, रोज की तरह ईंट भट्ठे की तरफ टहलने निकले थे।
मौके पर मौजूद चश्मदीदों के मुताबिक,
“हम रोज की तरह भट्ठे पर बैठे थे, तभी अचानक संदीप साह खून से लथपथ हालत में दौड़ते हुए आए और चीखते हुए बोले – मुझे गोली मार दी गई है! हम सब घबरा गए, आनन-फानन में उन्हें उठाकर सीएचसी लेकर दौड़े।”
सीएचसी में उनकी हालत नाजुक देखते हुए मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
बागपत में गोलीकांड: क्यों बनी संदीप शाह जानलेवा साजिश का शिकार?
स्थानीय सूत्रों और पुलिस जांच के मुताबिक, इस हमले की जड़ गांधी इंटर कॉलेज के प्रबंधक पद को लेकर पुराना विवाद हो सकता है।
संदीप शाह खुद कभी कॉलेज प्रबंधक रह चुके हैं।
वर्तमान में उनकी पत्नी प्रबंधक हैं, जिससे कई लोगों की नाराज़गी मानी जा रही है।
इसी विवाद में उनके खिलाफ दुश्मनी पनपी और आज उन्हें गोलियों से छलनी करने की साजिश रची गई।
सियासत की चपेट में गोलियां – क्यों बढ़ी हलचल?
यह गोलीकांड महज एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि राजनीतिक तूफान का केंद्र बन गया है, क्योंकि संदीप शाह का नाम सीधे-सीधे जयंत चौधरी के नजदीकी सर्कल से जुड़ा है।
रालोद खेमे में खलबली मच गई है।
पुलिस-प्रशासन पर हमलावरों को तुरंत पकड़ने का दबाव है।
घटना ने स्थानीय चुनावी और सियासी समीकरणों को हिला कर रख दिया है।
बागपत में गोलीकांड: पुलिस की दबिश और जांच – फिर भी दहशत कायम
पुलिस ने घटना के बाद अज्ञात हमलावरों की तलाश में ताबड़तोड़ दबिशें शुरू कर दी हैं।
एसपी बागपत के मुताबिक –
“हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं, प्रबंधक विवाद और अन्य व्यक्तिगत रंजिशों को खंगाला जा रहा है। जल्द ही हमलावरों को पकड़ लिया जाएगा।”
फिर भी इलाके में दहशत का माहौल है, लोग दबी जुबान में सियासी दुश्मनी और कॉलेज प्रबंधन के गहरे खेल की बातें कर रहे हैं।
अब सवाल – कौन है इस साजिश के पीछे?
क्या यह हमला महज प्रबंधक पद की दुश्मनी का नतीजा है?
या फिर संदीप शाह की सियासी पहुंच ने उन्हें निशाना बनवाया?
कौन हैं वो गुप्त चेहरे जो अंधेरे में से गोलियां बरसाकर गायब हो गए?
फिलहाल संदीप शाह जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं, जबकि बागपत की फिज़ा में डर और सियासी खामोशी गूंज रही है।
वो बेवफ़ा है: कोयले से दीवार पर लिखा पत्नी-पुलिस के खेल की काली नग्न दास्तां, युवक ने दे दी जान