पीलीभीत: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। बीसलपुर इंटर कॉलेज में तैनात चपरासी इलहाम-उर्र-रहमान शम्सी पर करोड़ों रुपए के सरकारी धन के गबन का आरोप है। पुलिस ने शुक्रवार को उसकी दो पत्नियों, सास, साली और अन्य रिश्तेदारों समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि पिछले 8 वर्षों में फर्जी सैलरी और नकली भुगतान के जरिए करोड़ों रुपए रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किए गए।
चपरासी से बना करोड़पति
आरोपी इलहाम-उर्र-रहमान शम्सी जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर बीसलपुर इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर तैनात था। करीब 8 साल पहले उसने जुगाड़ के जरिए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में अटैचमेंट करा लिया।
इसके बाद वह सैलरी टोकन जनरेट करने और भुगतान से जुड़े काम देखने लगा। पुलिस जांच में आरोप है कि इसी पद का फायदा उठाकर उसने करोड़ों रुपए का घोटाला किया।
रिश्तेदारों को बना दिया टीचर और ठेकेदार
जांच में सामने आया कि इलहाम ने अपनी तीन पत्नियों, सास, साली और अन्य रिश्तेदारों को फर्जी तरीके से शिक्षक, बाबू और ठेकेदार दिखाया।
फर्जी सैलरी टोकन और भुगतान आदेश तैयार कर सरकारी पैसा अलग-अलग खातों में भेजा जाता था।
7 आरोपियों के खातों में पहुंचे 8.15 करोड़ रुपए
पुलिस के मुताबिक अब तक 53 बैंक खातों की पहचान की गई है, जिनमें घोटाले की रकम ट्रांसफर हुई।
फिलहाल जिन 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनके खातों में कुल 8 करोड़ 15 लाख रुपए ट्रांसफर होने का खुलासा हुआ है।
किसके खाते में कितनी रकम पहुंची?
- पत्नी लुबना के खाते में 2 करोड़ 37 लाख 12 हजार 640 रुपए
- पत्नी अजारा खान के खातों में 2 करोड़ 12 लाख 16 हजार 393 रुपए
- साली फातिमा नवी के खाते में 1 करोड़ 3 लाख 11 हजार 672 रुपए
- रिश्तेदार आफिया खान के खातों में 80 लाख 68 हजार 696 रुपए
- परवीन खातून के खाते में 48 लाख 55 हजार 261 रुपए
- सास नाहिद के खातों में 95 लाख 28 हजार 449 रुपए
- आशकारा परवीन के खाते में 38 लाख 112 रुपए
पुलिस ने 5.5 करोड़ रुपए फ्रीज किए
जांच के दौरान पुलिस ने अलग-अलग खातों में जमा 5 करोड़ 50 लाख रुपए की रकम फ्रीज कर दी है। पुलिस अब बाकी रकम और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जांच कर रही है।
बैंक मैनेजर की शिकायत से खुला मामला
पूरा घोटाला फरवरी 2026 में सामने आया, जब बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर ने पीलीभीत डीएम को पत्र लिखकर बताया कि ट्रेजरी से 1 करोड़ 15 लाख रुपए एक निजी खाते में ट्रांसफर किए गए हैं।
इसके बाद डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने जांच समिति बनाई। जांच में खुलासा हुआ कि DIOS कार्यालय से पिछले 8 वर्षों से फर्जी शिक्षकों के नाम पर सरकारी पैसा निजी खातों में भेजा जा रहा था।
फर्जी सैलरी टोकन बनाता था इलहाम
पुलिस जांच में इलहाम को पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड बताया गया है। आरोप है कि वह फर्जी सैलरी टोकन जनरेट करता था और अपने रिश्तेदारों के बैंक खाते इस्तेमाल करता था।
नाम किसी और के दिखाए जाते थे, जबकि पैसा सीधे परिवार और करीबियों के खातों में पहुंचता था।
तीनों पत्नियों को नहीं थी एक-दूसरे की जानकारी
जांच में यह भी सामने आया कि इलहाम की तीन पत्नियां थीं और वे अलग-अलग शहरों में रहती थीं।
- पहली पत्नी अर्शी खातून को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है, हालांकि अब वह जमानत पर बाहर है।
- दूसरी पत्नी अजारा खान बुलंदशहर की रहने वाली है और अलीगढ़ में रहती थी।
- तीसरी पत्नी लुबना संभल की रहने वाली बताई गई है।
पूछताछ में दूसरी पत्नी अजारा ने कहा कि उसे इलहाम की दूसरी शादियों की जानकारी नहीं थी।
पुलिस का क्या कहना है?
Vikram Dahiya ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खातों में करोड़ों रुपए पहुंचने की पुष्टि हुई है। पुलिस पूरे नेटवर्क और संदिग्ध खातों की गहराई से जांच कर रही है ताकि सरकारी धन की पूरी रिकवरी की जा सके।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).