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कानपुर में “एलर्जी” का तलाशा गया “सफल इलाज” – जानिए क्या बोले “धरती के भगवान”

रिपोर्ट – सर्वेश शर्मा – कानपुर नगर 

Kanpur News – एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने के तरीके ने अब आयुर्वेद पद्धति से की तरफ बड़ा कदम बढ़ाया है। जिसकी शुरुआत की गई है कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कालेज से। जिसके अंतगर्त आने वाले बाल रोग के विभागध्यक्ष डॉक्टर यशवंत राव द्वारा शुरू की गई है। परिक्षण करने वाले डॉक्टर के अनुसार क्रोनिक एलर्जी राइटेनिक्स पर प्रयोग अब तक का सबसे सफल प्रयोग रहा है। जिसके चलते शोध को पूरा होने में अभी वक्त लगेगा। वहीं अगर सब कुछ सफलता की तरफ अग्रसर रहा तो मरीज के शरीर में होने वाली एलर्जी को सिरे से समाप्त किया जा सकता है। आगे जानिए पत्रकार वार्ता में प्राचार्य ने क्या बताया। 
 
पढ़िए नया शोध 
 
एक प्रेसवार्ता का आयोजन कर प्राचार्य डॉक्टर संजय काला ने अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि एलर्जी की सबसे अधिक बच्चों के अलावा बुजुर्गों में पाई जाती है। जिसे जड से खत्म करने के लिए पीड्रियाट्रिक विभागध्यक्ष डा0 यशवंत राव के पास रूद्रपुर से वैद्य डा. बी प्रकाश का फोन आया और उन्होंने एलर्जी को लेकर चर्चा की। साथ ही उन्हें इस शोध के बारे में अवगत कराया। जिस पर डा. यशवंत राव ने प्राचार्य की सहमति से क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया से पंजीकृत करा अनुमति ली गई। वर्ष 22 जुलाई 2023 से दिसम्बर 2023 तक मरीजों के शरीर पर इसका रिसर्च किया गया। जिसके तहत इस रिसर्च में करीब 250 ऐसे मरीजों को चयनित किया गया, जिनके शरीर में दूसरी बिमारी होने के साथ एलर्जी की मात्रा अधिक थी। इन मरीजों में 110 मरीज एलोपैथिक पद्धति प्रणाली से इलाज के लिए चुने गए और 113 मरीज आयुर्वेद पद्धति से इलाज के लिए चुने गए और इलाज शुरू किया गया।  
 
रिसर्च में निकला सच 
 
प्राचार्य डा. संजय काला के अनुसार 110 मरीजों को एलोपैथी दवा लिवोसिट्रीजन 2.5 मिलीग्राम और मोंटील्यूकास्ट 4 मिलीग्राम दी गई तो वहीं 113 मरीजों को आयुर्वेद से बनी दवा दी गई। जिसमें 20 जड़ी बूटी और बहुत कम मात्रा में आयरन भस्म युक्त इम्बो नाम की दवा की 60 ग्राम डोज दी गई। जिसको 28 दिनो तक देकर देखा गया और उसका परिणाम एलोपैथी के मुकाबले आयुर्वेद में काफी अच्छा देखने को मिला। एक्यूट एलर्जी में तो एलोपैथी दवा देकर उसे रोका जा सकता है ,लेकिन आयुर्वेद पद्धति सीधे मर्ज की जड़ों पर असर कर रही थी। जिसमें मरीज को काफी फायदा मिला। उन्होंने बताया कि एलर्जी में मरीज के खून में आईजीई का लेबल बढ़ जाता है। जिससे उसको हमेशा कुछ न कुछ लगा ही रहता है। अगर समय रहते इस पर काबू न किया जाए तो आगे चल कर यही सीओपीडी को बढ़ा देता है। जिससे लग्ंस और अस्थमा जैसी बीमारियों का रूप ले लेता है। प्राचार्य डा0 संजय काला ने बताया कि अभी शोध का कार्य चल रहा है जिसमें समय लगेगा, लेकिन अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस पद्धति से क्रोनिक एलर्जी  राइटेनिक्स को जड से समाप्त किया जा सकता है।