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Kakori Legacy Reignites in Pilibhit: पीलीभीत से निकली जनपदीय रैली ने जगाई क्रांति की चिंगारी

काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी महोत्सव: 100 साल बाद फिर गूंजा ‘क्रांति का उद्घोष’, जिलाधिकारी ने दिखाई रैली को हरी झंडी

लखनऊ/08 अगस्त।
स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में दर्ज एक अमर अध्याय – काकोरी ट्रेन एक्शन की आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका रही। उसी ऐतिहासिक घटना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। इस क्रम में लखनऊ में आयोजित जनपदीय रैली को जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

यह रैली सिर्फ एक स्मृति यात्रा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को आजादी के संघर्ष और बलिदान की गाथा से जोड़ने का एक अभूतपूर्व प्रयास है।

काकोरी ट्रेन एक्शन क्या था? – एक पाठक–मैत्री व्याख्या

काकोरी ट्रेन एक्शन 9 अगस्त 1925 को क्रांतिकारियों द्वारा अंजाम दी गई एक साहसी घटना थी, जिसमें भारत के वीर सपूतों ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ हथियारों के लिए धन जुटाने हेतु सरकारी खजाने वाली ट्रेन को लखनऊ के काकोरी स्टेशन के पास लूट लिया था।

इस ऐतिहासिक कार्रवाई को हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के सदस्यों – रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, चंद्रशेखर आजाद, ठाकुर रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी समेत कई क्रांतिकारियों ने मिलकर अंजाम दिया था।
यह घटना ब्रिटिश हुकूमत के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में क्रांति की एक नई चिंगारी बनकर उभरी।

जनपदीय रैली का उद्देश्य – क्रांति की लौ को फिर से जलाना

इस रैली का आयोजन केवल अतीत को याद करने के लिए नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी में राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए किया गया है।
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने रैली को हरी झंडी दिखाते हुए कहा कि यह आयोजन केवल ऐतिहासिक श्रद्धांजलि नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा है।

रैली में छात्र-छात्राएं, NCC कैडेट्स, स्काउट-गाइड, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और समाजसेवी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
बैंड-बाजे, देशभक्ति नारों और क्रांतिकारियों के पोस्टरों के साथ निकली यह रैली लखनऊ की सड़कों पर मानो इतिहास को दोहराने निकली हो।

शताब्दी महोत्सव: 100 वर्षों की गौरवगाथा का उत्सव

काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी महोत्सव’ उत्तर प्रदेश सरकार और संस्कृति विभाग की साझेदारी में आयोजित हो रहा है। इसका उद्देश्य न केवल उस ऐतिहासिक क्षण को सम्मान देना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आजादी के नायकों की गाथाएं स्कूलों, विश्वविद्यालयों और आम जनमानस में पुनः जीवित हों।

राजकीय कार्यक्रमों के अंतर्गत पूरे प्रदेश में भाषण प्रतियोगिता, चित्रकला, वाद-विवाद, नुक्कड़ नाटक, और निबंध लेखन जैसे आयोजनों को भी इस महोत्सव से जोड़ा गया है।

शहीदों की स्मृति स्थलों पर दीप प्रज्वलन, पुष्पांजलि, झांकियों और ऐतिहासिक व्याख्यानों का भी आयोजन किया जा रहा है।

सरकार और प्रशासन का उद्देश्य क्या है?

युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के सच्चे इतिहास से जोड़ना।

क्रांतिकारियों की विचारधारा को पुनर्जीवित करना और ‘राजनीति बनाम राष्ट्रनीति’ का फर्क समझाना।

‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के भाव को मजबूत करना।

ऐसे आयोजनों के ज़रिए ‘लोकल इतिहास’ को ग्लोबल पहचान देना।

रॉकेट पोस्ट लाइव की विशेष अपील

काकोरी ट्रेन एक्शन सिर्फ इतिहास की किताबों में सीमित नहीं रहना चाहिए। यह हर भारतवासी के मन में क्रांति की चिंगारी बनकर जलता रहना चाहिए।
हमारा कर्तव्य है कि हम अपने बच्चों को यह बताएं कि देश की आजादी केवल संविधान के पन्नों में नहीं, बल्कि बिस्मिल और अशफाक की फांसी की रस्सियों में गूंजी थी।

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