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SSB Mansi Death Case: वीर बेटी की रहस्यमयी मौत ने पीलीभीत को हिला दिया, जानिए पूरी घटना

SSB Mansi Death Case: वीर बेटी की रहस्यमयी मौत ने पीलीभीत को हिला दिया, दौसा, राजस्थान में संदिग्ध हालात में मौत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दम घुटने और चोटों के निशान, जांच में सामने आए नए तथ्य,क्या छुपाया गया सच?जानिए पूरी घटना विस्तार से

पीलीभीत की एक महिला एसएसबी जवान की मौत का मामला अब रहस्यमयी मोड़ पर पहुंच गया है। डिप्टी कमांडेंट की तहरीर में स्पष्ट रूप से ‘स्वजन के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने’ का जिक्र है, लेकिन रिपोर्ट ‘अज्ञात’ के खिलाफ दर्ज की गई। यह विरोधाभास न केवल कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाता है, बल्कि मौत के पीछे छुपे असली सच की ओर भी इशारा करता है। क्या यह मात्र औपचारिकता है या किसी बड़े राज़ को पर्दे में रखने की चाल?

SSB Mansi Death Case: बीमारी से मौत का दावा—शक की शुरुआत

जहानाबाद थाना क्षेत्र के पुरैना मोहल्ले की रहने वाली 25 वर्षीय मानसी, एसएसबी की 59वीं बटालियन (नानपारा, बहराइच) में तैनात थीं। 8 अगस्त को घर लौटने के बाद अचानक उनकी मौत की खबर आई। परिवार ने दावा किया कि मौत बीमारी से हुई, लेकिन समय और तरीके ने पुलिस को चौंका दिया।

SSB Mansi Death Case: पोस्टमार्टम ने पलट दिया खेल

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। डॉक्टरों ने मृत्यु का कारण दम घुटना (asphyxia) बताया, साथ ही शरीर पर 10 से अधिक चोटों के निशान और श्वासनली में क्षति की पुष्टि की। ये तथ्य किसी प्राकृतिक मौत के बजाय हिंसक परिस्थिति की ओर इशारा करते थे।

डिप्टी कमांडेंट की तहरीर और कानूनी विरोधाभास

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एसएसबी के डिप्टी कमांडेंट ने ईमेल के जरिए तहरीर भेजते हुए साफ कहा—मामला स्वजन द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाने का है। लेकिन, आश्चर्यजनक रूप से FIR अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुई। यह सवाल पैदा करता है कि जब तहरीर में आरोप स्पष्ट है, तो अभियुक्त का नाम क्यों नहीं जोड़ा गया?

SSB Mansi Death Case: थाना प्रभारी का बयान—मामला राजस्थान स्थानांतरित

थाना प्रभारी जहानाबाद ने बताया कि मानसी की मौत के मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। उन्होंने आगे कहा कि प्रारंभिक तथ्यों और जांच की दिशा को देखते हुए पूरा केस राजस्थान के थाना दौसा पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां आगे की विवेचना की जाएगी।

क्या है ‘अज्ञात’ लिखने का मतलब?

कानून विशेषज्ञ मानते हैं कि पीलीभीत पुलिस द्वारा एफआईआर में आरोपी का नाम न लिखकर ‘अज्ञात’ दर्ज करना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। मामला शुरू में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप के रूप में सामने आया था, जिसकी जानकारी केवल एसएसबी कमांडेंट के हवाले से मिली थी। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मानसी के शरीर पर चोट के निशान और श्वासनली में क्षति की पुष्टि ने घटनाक्रम को हिंसक परिस्थिति और संभवतः निर्दयतापूर्ण हत्या की ओर भी मोड़ दिया है। यही कारण है कि जहानाबाद पुलिस ने जल्दबाजी में किसी को नामजद करने के बजाय ‘अज्ञात’ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, ताकि जांच का दायरा केवल आत्महत्या के एंगल तक सीमित न रहकर हत्या सहित अन्य संभावित पहलुओं पर भी खुला रहे।

दो राज्यों की पुलिस का समन्वय

इस केस में पीलीभीत पुलिस ने राजस्थान (दौसा) पुलिस से सहयोग मांगा है, क्योंकि घटना के कुछ कड़ियां वहां से जुड़ी बताई जा रही हैं। होटल सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स की जांच तेज हो गई है।

क्या मिलेगा न्याय?

इस विरोधाभासी कार्रवाई ने आम लोगों के मन में यह शंका पैदा कर दी है कि कहीं मामला ‘क्लोज’ करने की तैयारी तो नहीं हो रही। मानसी की मौत अब सिर्फ एक केस फाइल नहीं, बल्कि सिस्टम और समाज की पारदर्शिता की परीक्षा बन चुकी है।

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