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Lord Parshuram की जन्मस्थली को मिला नया नाम: शाहजहाँपुर का जलालाबाद अब ‘परशुरामपुरी’

भगवान परशुराम की जन्मस्थली को मिला नया गौरव: शाहजहाँपुर का जलालाबाद अब ‘परशुरामपुरी’

Lord Parshuram: सनातन परंपरा और आस्था का सम्मान

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले का ऐतिहासिक नगर जलालाबाद अब “परशुरामपुरी” के नाम से जाना जाएगा। यह सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि करोड़ों सनातन आस्थाओं के लिए गर्व और हर्ष का क्षण है। भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की जन्मस्थली माने जाने वाले इस नगर को आखिरकार वह पहचान मिल गई, जिसकी मांग वर्षों से होती आ रही थी। इस निर्णय ने न केवल स्थानीय निवासियों की भावनाओं को सम्मान दिया है बल्कि संपूर्ण सनातनी समाज को आत्मगौरव से भर दिया है।

Lord Parshuram: गृह मंत्रालय की स्वीकृति और राजनीतिक नेतृत्व

प्रदेश सरकार के अनुमोदन के बाद केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने शाहजहाँपुर के जलालाबाद का नाम “परशुरामपुरी” करने की अनुमति दे दी। केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि यह निर्णय समूचे सनातन समाज के लिए गौरव का क्षण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लंबे समय से चली आ रही मांग को आखिरकार मंजूरी मिल गई।

Lord Parshuram: क्यों बदला गया नाम?

जलालाबाद नगर लंबे समय से भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में आस्था का केंद्र रहा है। यहां स्थित प्राचीन परशुराम मंदिर इस नगर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान है। स्थानीय नगर पालिका परिषद ने मार्च 2018 और सितंबर 2023 में नगर का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद अप्रैल 2024 में जिला अधिकारी ने भी अपनी संस्तुति के साथ प्रस्ताव शासन को भेजा था।

वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी

यह मांग वर्षों से स्थानीय जनता और सनातन समाज द्वारा उठाई जाती रही थी। 24 अप्रैल 2022 को शासन की ओर से जलालाबाद को परशुराम की जन्मस्थली घोषित किया गया था। इसके बाद से ही इस स्थान के सुंदरीकरण और विकास की दिशा में सरकार लगातार प्रयासरत रही है। अंततः 2025 में इस नगर को उसका वास्तविक नाम “परशुरामपुरी” मिल गया।

पर्यटन और धार्मिक महत्व

मंदिर प्रांगण और आसपास के क्षेत्र को एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। 30 करोड़ रुपये की धनराशि इस नगर और मंदिर क्षेत्र के सुंदरीकरण पर खर्च की जा रही है।

मुख्यमंत्री संवर्धन योजना के तहत 19 करोड़ रुपये मंदिर प्रांगण और सुविधाओं पर खर्च हो रहे हैं।

अमृत सरोवर योजना के तहत 11 करोड़ रुपये तालाब की सफाई, घाट-सीढ़ियों और चौड़े मार्ग के निर्माण पर लगाए जा रहे हैं।

इससे न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि यह नगर धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में भी स्थापित होगा।

सनातन के समाज के लिए गौरव का क्षण

इस निर्णय ने देशभर के सनातनी समाज में उत्साह और गर्व का संचार किया है। परशुरामपुरी का नाम न केवल भगवान परशुराम के महिमामंडन का प्रतीक है बल्कि यह सनातन धर्म की परंपराओं और मूल्यों के सम्मान का भी द्योतक है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि अब यह नगर धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ देशभर में अपनी अलग छाप छोड़ेगा।

Lord Parshuram: आस्था से आत्मगौरव तक का सफर

शाहजहाँपुर का जलालाबाद अब परशुरामपुरी है—यह नाम परिवर्तन सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति की विजय है। सरकार की संवेदनशीलता, स्थानीय जनता का समर्पण और सनातन धर्म की धरोहर ने मिलकर इस नगर को नई पहचान दी है। परशुरामपुरी अब न केवल शाहजहाँपुर बल्कि पूरे भारत के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुका है।

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