Pilibhit: किसान भाइयों के लिए सुनहरा मौका, निःशुल्क मिल रहा है तोरिया (लाही) बीज मिनीकिट
किसान भाइयों! अक्सर बरसात और प्राकृतिक आपदाएँ हमारी मेहनत को चौपट कर देती हैं। खरीफ की फसल कभी बाढ़ से तो कभी सूखे से बर्बाद हो जाती है। ऐसे हालात में खेत खाली रह जाते हैं और किसान का मन मायूस हो जाता है। लेकिन अब चिंता की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि प्रदेश सरकार ने आप सबके लिए एक सुनहरा अवसर दिया है।
पीलीभीत जिले के उन किसानों के लिए, जिनकी खरीफ की फसल बोई नहीं जा सकी या बुवाई के बाद नष्ट हो गई है, सरकार ने निःशुल्क तोरिया (लाही) बीज मिनीकिट उपलब्ध कराने की योजना शुरू की है। यह मौका न केवल आपकी खोई हुई उम्मीदों को फिर से जगाएगा, बल्कि आने वाली रबी फसल की तैयारी के लिए भी सहारा बनेगा।
Pilibhit:तोरिया (लाही) फसल क्यों है खास?
किसान भाइयों, यह जानना ज़रूरी है कि तोरिया यानी लाही की फसल आपके लिए कितनी लाभदायक है।
यह फसल सितंबर माह के पहले पखवाड़े में बोई जाती है और कम समय में तैयार हो जाती है।
तोरिया की खेती से कम लागत में अच्छी पैदावार मिलती है।
इसका तेल और खली दोनों ही काम आते हैं, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिल सकती है।
सबसे बड़ी बात, इसे बोने के बाद आप आसानी से रबी की मुख्य फसलें जैसे गेहूं, चना और मटर भी समय पर बो सकते हैं।
Pilibhit:योजना के लाभ
प्रदेश सरकार ने इस योजना को किसानों के लिए राहत और सहारा देने के उद्देश्य से लागू किया है।
हर किसान को मिलेगा 2 किलो बीज का मिनीकिट।
मिनीकिट पूरी तरह निःशुल्क है।
योजना का उद्देश्य है कि किसान भाइयों की आय बढ़े और प्रदेश में तिलहन उत्पादन में इजाफा हो।
Pilibhit:आवेदन की प्रक्रिया
किसान भाइयों! अगर आप इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो समय बर्बाद मत कीजिए। आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2025 है।
सबसे पहले आप कृषि विभाग के पोर्टल agridarshan.up.gov.in पर जाएँ।
अपना ऑनलाइन आवेदन करें।
ध्यान रखें, यदि आवेदन संख्या तय लक्ष्य से अधिक हो जाती है, तो ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किसानों का चयन किया जाएगा।
Pilibhit:बीज वितरण कैसे होगा?
चयनित किसान भाइयों को केवल एक मिनीकिट ही दिया जाएगा।
बीज का वितरण राजकीय कृषि बीज भंडारों से होगा।
पूरी प्रक्रिया पीओएस मशीन से की जाएगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी के साथ भेदभाव न हो।
किसान भाइयों के लिए संदेश
यह योजना आपके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। जिस खेत में खरीफ की फसल बर्बाद हो चुकी है, वहीं अब तोरिया (लाही) बोकर आप अपनी आर्थिक क्षति की भरपाई कर सकते हैं। याद रखें –
समय पर आवेदन करना बेहद ज़रूरी है।
तोरिया की खेती से आपकी ज़मीन खाली नहीं रहेगी और रबी की बुवाई भी प्रभावित नहीं होगी।
यह फसल आपको अतिरिक्त आमदनी देगी और घर की जरूरतें पूरी करने में मदद करेगी।
किसान भाइयों! यह योजना केवल बीज देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपके भविष्य को सुरक्षित बनाने का प्रयास है। सरकार चाहती है कि आप हिम्मत न हारें और खेती को नई दिशा दें। तो देर किस बात की? तुरंत पोर्टल पर जाकर 31 अगस्त 2025 से पहले आवेदन करें और इस सुनहरे अवसर का पूरा फायदा उठाएँ।
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