Bihar Assembly Elections 2025:NDA का सीट बंटवारा फाइनल, जेडीयू 102, बीजेपी 101, चिराग को 20 और हम-आरएलएम को 10-10 सीटें
बिहार की राजनीति में लंबे समय से जिस मुद्दे पर सबसे अधिक अटकलें लगाई जा रही थीं, वह आखिरकार सुलझ गया है। एनडीए गठबंधन ने आगामी विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सीट बंटवारे का फार्मूला तय कर लिया है। इस बंटवारे ने स्पष्ट कर दिया है कि गठबंधन के भीतर कौन-सी पार्टी कितनी मजबूत स्थिति में चुनाव मैदान में उतरने जा रही है। जेडीयू और बीजेपी के बीच चली खींचतान के बाद अब तस्वीर साफ हो चुकी है, वहीं छोटे सहयोगियों को भी उनका हिस्सा मिल गया है।
Bihar Assembly Elections 2025: सीट बंटवारे का पूरा फार्मूला
एनडीए ने आपसी सहमति से सीटों का जो बंटवारा किया है, उसमें सबसे बड़ा हिस्सा जेडीयू को दिया गया है।
जनता दल यूनाइटेड (JDU) को 102 सीटें मिली हैं।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) 101 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) – चिराग पासवान गुट (LJP-RV) को 20 सीटें दी गई हैं।
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLM) को 10-10 सीटें मिली हैं।
राजनीतिक समीकरण और संदेश
इस सीट बंटवारे से कई बड़े राजनीतिक संदेश निकलकर सामने आते हैं।
जेडीयू ने यह साबित कर दिया है कि बिहार की राजनीति में उसकी पकड़ अभी भी मजबूत है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एनडीए के चेहरे के रूप में सबसे ज्यादा तरजीह दी जा रही है।
बीजेपी ने अपने पुराने सहयोगी के सम्मान को बनाए रखते हुए जेडीयू को एक सीट ज्यादा देकर गठबंधन की एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है।
चिराग पासवान की पार्टी को 20 सीटें मिलना दर्शाता है कि एनडीए उन्हें भी गंभीरता से ले रहा है और पासवान वोट बैंक को साधने की रणनीति बना रहा है।
वहीं हम और आरएलएम जैसी छोटी पार्टियों को 10-10 सीटें देकर गठबंधन ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि हर सहयोगी को सम्मानजनक जगह दी जा रही है।
Bihar Assembly Elections 2025: चुनावी असर
यह सीट बंटवारा न केवल गठबंधन की एकता को मजबूती देगा बल्कि विपक्षी खेमे को भी सीधा संदेश है कि एनडीए ने अपनी आंतरिक खींचतान को पीछे छोड़कर एकजुटता का रास्ता अपना लिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि महागठबंधन इस चुनौती का कैसे सामना करता है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का यह सीट बंटवारा आने वाले महीनों में पूरे राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा। जेडीयू और बीजेपी की बराबरी पर आधारित साझेदारी, चिराग पासवान की बढ़ती भूमिका और छोटे दलों की संतुलित भागीदारी इस चुनाव को और भी दिलचस्प बना रही है।
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