पीलीभीत में वन विभाग पर गंभीर आरोप: मरौरी गांव के नाबालिग बच्चों को बंधक बनाने का दावा, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, दर्जनों ग्रामीण पहुंचे डीएम कार्यालय!
थाना न्यूरिया क्षेत्र के ग्राम मरौरी में खेत की रखवाली के दौरान क्या हुआ? सच्चाई फाइलों में कैद
पीलीभीत जिले के थाना न्यूरिया क्षेत्र के ग्राम मरौरी से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में आक्रोश की आग भड़का दी । ग्राम मरौरी, थाना न्यूरिया क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीण एकजुट होकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और वन विभाग के अधिकारियों पर नाबालिग बच्चों को बंधक बनाने, मारपीट करने और झूठे मुकदमे में फंसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई मामूली घटना नहीं, बल्कि शक्ति के दुरुपयोग और निर्दोषों पर अत्याचार का खुला उदाहरण है।
खेतों की रखवाली कर रहे थे बच्चे और ग्रामीण, तभी पहुंचे वन कर्मी!
ग्रामीणों के अनुसार, थाना न्यूरिया क्षेत्र के ग्राम मरौरी में 3 मार्च 2026 को होली के समय गांव के लोग अपने खेत में सांडों से फसल बचाने के लिए रखवाली कर रहे थे। उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी मौजूद थे। माहौल सामान्य था इसी दौरान मौके पर वन दरोगा सुमित कुमार, फॉरेस्ट गार्ड सचिन और अन्य वन कर्मी पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने वहां मौजूद बच्चों को पकड़ लिया और और उन्हें बंधक बना लिया और बेरहमी से पिटाई की।
बच्चों की चीख-पुकार सुनकर दौड़े किसान, फिर हुआ बवाल!
जब बच्चों की चीखें सुनाई दीं , ग्रमीणों की माने ओम प्रकाश वहां पंहुचा। वहां का नज़ारा देख हालात बिगड़ गए।
वन विभाग के कर्मचारियों ने न सिर्फ बच्चों को बंधक बनाकर रखा, बल्कि ग्रामीणों के पहुंचने पर उनके साथ भी बेरहमी से मारपीट की गई।
ग्रामीण ओम प्रकाश बताया : “बच्चों को बांध रखा था, विरोध किया तो रायफल की बट से पीटा”
ग्राम मरौरी, थाना न्यूरिया क्षेत्र के निवासी ओम प्रकाश ने बताया:
“होली का समय था, हम खेतों में सांडों से फसल बचाने के लिए बच्चों के साथ रखवाली कर रहे थे। तभी वहां सुमित दरोगा और सचिन आए। उन्होंने छोटे-छोटे बच्चों को बांधकर रखा था। ये लोग शराब के नशे में थे।
जब मैंने बच्चों की आवाज सुनी और वहां पहुंचकर सवाल किया, तो मुझे रायफल की बट से मारा गया, जिससे मेरे पैर में गंभीर चोट आई।”
उन्होंने आगे बताया कि इस घटना के बाद उल्टा ग्राम मरौरी के ग्रामीणों के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जिसमें 64 अज्ञात और 14 नामजद लोग शामिल हैं।
“हम पीड़ित हैं, फिर भी हम पर मुकदमा!” –ग्रामीणों ने डीएम से लगाईं न्याय की गुहार
ग्रामीणों का आरोप है कि उनके साथ अन्याय हुआ है और उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही। इसी कारण वे सामूहिक रूप से जिलाधिकारी के पास पहुंचे और प्रार्थना पत्र देकर न्याय की मांग की।
उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- दर्ज किया गया “फर्जी मुकदमा” तत्काल हटाया जाए
- दोषी वन कर्मियों पर कार्रवाई हो
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि घटना के समय सामाजिक वानिकी विभाग के धर्मेंद्र और शेर सिंह दरोगा भी मौके पर मौजूद थे।
टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया
“होली के आसपास थाना न्यूरिया क्षेत्र के ग्राम मरौरी के कुछ लोगों ने वन विभाग के फॉरेस्टर और स्टाफ पर हमला किया था, जिसमें कई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं।”
पूरे मामले पर डीएम ने बताया: “सच्चाई सामने आएगी, जांच एसपी को सौंपी गई”
पूरे मामले ने जब तूल पकड़ा और ग्रामीणों का गुस्सा जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंच गया, प्रशासन भी हरकत में आया। इस प्रकरण पर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए बताया कि निष्पक्ष जांच पुलिस अधीक्षक को सौंप दी गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि “जो भी सच्चाई होगी, वह जांच पूरी होने के बाद सामने आ जाएगी और उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।”
सवालों के घेरे में पूरी घटना: सच कौन बोल रहा कुछ पता नहीं?
इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या सच में बच्चों को बंधक बनाया गया था?
- क्या वन कर्मी नशे में थे और उन्होंने शक्ति का दुरुपयोग किया?
- या फिर यह मामला ग्रामीणों द्वारा किए गए हमले को छुपाने की कोशिश है?
दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप ने पूरे मामले को रहस्य और विवाद में डाल दिया है।
ग्रामीणों में गुस्सा, प्रशासन पर दबाव बढ़ा
ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है। ग्रामीण खुलकर वन विभाग के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं—क्या सच सामने आएगा या मामला दबा दिया जाएगा?
क्या मासूमों के साथ वास्तव में अन्याय या सरकारी कर्मचारियों पर हमला—सच्चाई का इंतजार
यह मामला सिर्फ ग्राम मरौरी, थाना न्यूरिया क्षेत्र का नहीं, बल्कि कानून, व्यवस्था और इंसाफ की परीक्षा बन चुका है। एक ओर मासूम बच्चों के साथ कथित अत्याचार का आरोप है, तो दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों पर हमले की कहानी।
अब देखना यह होगा कि जांच में कौन सा सच सामने आता है ।