Organ Transplant: उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस ने छापेमारी कर इस गिरोह का पर्दाफाश किया, जहां एक MBA छात्र से 6 लाख में किडनी खरीदकर 80 लाख में मरीज को बेची गई। इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और मेडिकल सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे पकड़ा गया पूरा रैकेट?
सोमवार देर रात पुलिस ने शहर के मेड लाइफ हॉस्पिटल, आहूजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल में एक साथ छापेमारी की। शिकायत बिहार निवासी 23 वर्षीय MBA छात्र (आयुष) ने की थी, जिसने अपनी किडनी बेची थी।
मेड लाइफ हॉस्पिटल में पुलिस को किडनी डोनर और मरीज दोनों भर्ती मिले, लेकिन ट्रांसप्लांट से जुड़े कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले।
6 आरोपी गिरफ्तार, कई डॉक्टर फरार
पुलिस ने आहूजा हॉस्पिटल की मालकिन डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह और एजेंट शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक, 4 और डॉक्टरों की तलाश जारी है।
6 लाख में खरीदी, 80 लाख में बेची किडनी
जांच में सामने आया कि आरोपी गिरोह गरीब और जरूरतमंद लोगों को फंसाकर उनकी किडनी खरीदता था।
- आयुष से 6 लाख में किडनी ली गई
- मरीज से करीब 80 लाख रुपए वसूले गए
इंटरनेशनल नेटवर्क का खुलासा
प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह रैकेट सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं था। इसका नेटवर्क लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, नेपाल और दक्षिण अफ्रीका तक फैला हुआ था।
MBA छात्र को ऐसे फंसाया गया
पीड़ित आयुष (समस्तीपुर, बिहार निवासी) मेरठ में रहकर देहरादून से MBA कर रहा था। उसे एक टेलीग्राम ग्रुप के जरिए गिरोह के सरगना शिवम अग्रवाल ने फंसाया।
कानपुर बुलाकर 6 लाख रुपए में किडनी का सौदा किया गया। बाद में उसे पूरी रकम भी नहीं दी गई, जिसके बाद उसने पुलिस से शिकायत की।
मरीज और पैसों का पूरा खेल
मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर (30) का आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट किया गया।
- पारुल के परिवार ने 7 लाख एडवांस दिए
- बाकी रकम बाद में देने की बात हुई
शिवम ने:
- 3.5 लाख आयुष के खाते में डाले
- 2.75 लाख हॉस्पिटल को दिए
- बाकी रकम खुद रखी
फर्जी अस्पताल और रात में ऑपरेशन
जांच में सामने आया:
- कई अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे थे
- ऑपरेशन देर रात किए जाते थे
- बाद में मरीजों को दूसरे अस्पताल शिफ्ट कर दिया जाता था
- कोई वैध फाइल या डॉक्यूमेंट तैयार नहीं किए जाते थे
विदेशी मरीज का भी ट्रांसप्लांट
पुलिस के अनुसार, 3 मार्च को दक्षिण अफ्रीका की एक महिला का भी ट्रांसप्लांट इसी नेटवर्क के जरिए किया गया था।
8वीं पास एजेंट बना “डॉक्टर”
गिरोह का मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल सिर्फ 8वीं पास है और एंबुलेंस ड्राइवर है। वह एप्रन पहनकर और गले में स्टेथोस्कोप डालकर लोगों को झांसा देता था।
50 से ज्यादा ट्रांसप्लांट का शक
पुलिस के मुताबिक, अब तक 40-50 से ज्यादा अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की आशंका है। 7 और अस्पताल रडार पर हैं, जिनमें एक लखनऊ का भी है।
क्या हो सकती है सजा?
इस मामले में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 और BNS की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
अगर आरोप साबित होते हैं, तो दोषियों को:
- 10 साल तक की सजा
- 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
ACMO डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि तीनों अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है। उनसे 10 सवालों के जवाब मांगे गए हैं। जवाब मिलने के बाद लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।