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खाकी पर दाग: सब इंस्पेक्टर बना उगाही सरगना, भेजा गया जेल, दो साथियों पर 25-25 हजार का इनाम!

मथुरा में अवैध वसूली के आरोप में चौकी प्रभारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। दो फरार साथियों पर 25-25 हजार का इनाम घोषित, तलाश जारी।

खाकी पर दाग: जब चौकी प्रभारी ही बन बैठा उगाही का सरगना, तो कानून पर कैसे रहेगा भरोसा?

मथुरा में अवैध वसूली का सनसनीखेज खुलासा, सब-इंस्पेक्टर गिरफ्तार, दो गुर्गों पर 25-25 हजार का इनाम

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर लगातार कार्रवाई कर रही है। अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर से लेकर गैंगस्टर एक्ट तक की सख्त कार्यवाहियां हो रही हैं। लेकिन इसके बावजूद कुछ वर्दीधारी ऐसे भी हैं जो न केवल कानून का मजाक उड़ा रहे हैं बल्कि अपनी वर्दी और पद की ताकत का इस्तेमाल कर खुद ही अपराध की दुनिया का हिस्सा बनते जा रहे हैं। मथुरा के थाना जैत क्षेत्र से सामने आया मामला इसी कड़वी सच्चाई को उजागर करता है, जहां जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाला एक सब-इंस्पेक्टर ही कथित तौर पर अवैध वसूली का नेटवर्क संचालित करता मिला।

शिकायतों के बाद  जांच में सही निकले आरोप

मथुरा के थाना जैत क्षेत्र स्थित छटीकरा चौकी पर तैनात सब-इंस्पेक्टर शशांक कौशिक के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि स्थानीय दुकानदारों, खासकर चारधाम मंदिर क्षेत्र के आसपास व्यापार करने वाले लोगों से दबाव बनाकर धन उगाही की जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने एक विशेष टीम गठित कर जांच कराई। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पुलिस महकमे को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने आरोपी सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

अलीगढ़ से बुलाए गए थे कथित हिस्ट्रीशीटर, व्यापारियों पर बनाया जाता था निशाना 

प्राप्त शिकायत और जांच में सामने आया कि अवैध वसूली के लिए अलीगढ़ जनपद के इगलास क्षेत्र के गांव दुमेड़ी निवासी रोहताश उर्फ विशाल तथा उसके साथी छोटू सोलंकी को मथुरा बुलाया गया था।

आरोप है कि ये दोनों व्यक्ति स्थानीय व्यापारियों और मंदिर क्षेत्र में फूल-माला बेचने वाले दुकानदारों पर दबाव बनाकर धन उगाही करते थे। शिकायत में कहा गया कि कुछ व्यापारियों से हर माह मोटी रकम मांगी जाती थी और पैसा न देने पर जेल भेजने तक की धमकियां दी जाती थीं। पुलिस के भय और दबाव के कारण कई लोग खुलकर सामने नहीं आ सके, लेकिन शिकायतों का सिलसिला लगातार जारी रहा।

चौकी के आसपास संचालित हो रहा था कथित वसूली तंत्र

शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि चारधाम गेट नंबर-1 के पास चौकी प्रभारी की कथित संरक्षण में अवैध वाहन पार्किंग का संचालन कराया जा रहा था और उसके माध्यम से भी धन उगाही की जाती थी।

शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि चौकी क्षेत्र और मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों तथा कॉल डिटेल रिकॉर्ड के जरिए आरोपों की पुष्टि की जा सकती है। यही कारण रहा कि जांच एजेंसियों ने तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास किया।

112 पर हुई थी शिकायत, पीआरवी ने मौके से पकड़ा था एक व्यक्ति

शिकायत के अनुसार 10 जून 2026 को यूपी-112 पर भी सूचना दी गई थी। शिकायतकर्ता का दावा था कि सूचना मिलने पर पहुंची पीआरवी टीम ने एक व्यक्ति को मौके से पकड़कर चौकी के हवाले किया था। बाद में पीड़ित पक्ष को थाना जैत जाकर रिपोर्ट दर्ज कराने की सलाह दी गई।

इसी शिकायत के आधार पर आगे की जांच बढ़ी और मामला आखिरकार पुलिस विभाग के भीतर बैठे कथित भ्रष्ट तंत्र तक पहुंच गया।

फरार दो आरोपियों पर 25-25 हजार का इनाम

मामले में गिरफ्तार सब-इंस्पेक्टर के अलावा रोहताश उर्फ विशाल और छोटू सोलंकी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। दोनों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।

विशेष टीमें लगातार उनकी तलाश में दबिश दे रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

एसएसपी श्लोक कुमार ने क्या कहा?

मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने स्पष्ट किया कि सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए टीम गठित की गई थी। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद आरोपी सब-इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

एसएसपी के अनुसार, उसके दो अन्य साथी अभी फरार हैं, जिन पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल: जब कानून के रक्षक ही अपराधी बन जाए तो जनता किस पर भरोसा करे?

यह मामला सिर्फ एक सब-इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी भर नहीं है। यह उस विश्वास पर चोट है जो आम नागरिक पुलिस वर्दी पर करता है। जब कानून लागू कराने वाला अधिकारी ही कानून तोड़ने लगे, जब अपराधियों को पकड़ने के बजाय उनके साथ गठजोड़ कर कथित उगाही का नेटवर्क खड़ा किया जाए, तब सबसे बड़ा नुकसान न्याय व्यवस्था की साख को होता है।

जनता पुलिस के पास सुरक्षा और न्याय की उम्मीद लेकर जाती है। लेकिन यदि कुछ भ्रष्ट और निकम्मे अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर भय का कारोबार शुरू कर दें तो सबसे पहले पुलिस की पूरी छवि सवालों के घेरे में आ जाती है। ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं, बल्कि यह भी जरूरी है कि दोषियों को ऐसी सजा मिले जो पूरे तंत्र के लिए नजीर बन सके।

मथुरा का यह प्रकरण एक बार फिर साबित करता है कि योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति तभी प्रभावी होगी जब विभाग के भीतर छिपे भ्रष्ट तत्वों पर भी उतनी ही कठोर कार्रवाई हो जितनी बाहरी अपराधियों पर होती है। राहत की बात यह है कि शिकायतों को दबाने के बजाय उनकी जांच हुई और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई भी हुई।

लेकिन यह घटना एक चेतावनी भी है—खाकी की असली ताकत जनता का विश्वास है। जिस दिन वर्दी का इस्तेमाल सेवा के बजाय भय पैदा करने के लिए होने लगे, उसी दिन वह सम्मान खोने लगती है।